तमिलनाडु से काशी पहुंचा 25 पुजारियों का दल, मां विशालाक्षी शक्तिपीठ में कुंभाभिषेक अनुष्ठान आज से प्रारंभ...
-प्रत्येक 12 वर्ष पर होता है कि मंदिर के शिखर का कुंभाभिषेक
वाराणसी, ब्यूरो। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में स्थित शक्तिपीठ मां विशालाक्षी मंदिर का कुंभाभिषेक एक दिसम्बर को होगा। प्रत्येक 12 वर्ष पर होने वाले कुंभाभिषेक में विविध धार्मिक अनुष्ठान की शुरूआत आज शुक्रवार से शुरू हो जाएंगे।
पहले दिन गणपति पूजन के साथ सायंकाल प्रथम यज्ञशाला का आयोजन होगा। दूसरे दिन 30 नवम्बर को यज्ञशला में विविध यज्ञ, धार्मिक अनुष्ठान, लक्षार्चन, कुमकुमाभिषेक, लक्ष्मीसूक्त पाठ आदि होंगे। इसके बाद एक दिसंबर को मंदिर के शिखर का कुंभाभिषेक किया जाएगा ।
इसमें शिखर पर एक धागा बांधकर उसे गर्भगृह में स्थापित देवी विग्रह तक लाया जाएगा, इसके पश्चात देवी प्रतिमा में पुनर्प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। गुरूवार शाम यह जानकारी मंदिर के महंत, वरिष्ठ पत्रकार पं. राजनाथ तिवारी ने दी है।
उन्होंने बताया कि कुंभाभिषेक के लिए कर्मकांडी व वैदिक विद्वान ब्राह्मण पुजारियों का दल तमिलनाडु से काशी पहुंच चुका है। प्रत्येक 12 वर्ष पर कुंभाभिषेक कराने का दायित्व नाटकोट्टम क्षत्रम नामक दक्षिण भारत की संस्था निभाती है। उन्होंने बताया कि काशी के नव शक्ति पीठों में मां विशालाक्षी का महत्वपूर्ण स्थान है।
मान्यता के अनुसार इस स्थान पर मां सती का कर्ण कुण्डल और उनकी आंख गिरी थी। जिससे इस स्थान की महिमा और महात्म्य दोनों काफी बढ़ गए। विशाल नेत्रों वाली मां विशालाक्षी का यह स्थान मां सती के 51 शक्ति पीठों में से भी एक है। इनका महत्व कांची की मां (कृपा दृष्टा) कामाक्षी और मदुरै की मत्स्य नेत्री मीनाक्षी के समान है।
शास्त्रों के अनुसार काशी के पालनहार बाबा विश्वनाथ मां विशालाक्षी के मंदिर में ही विश्राम करते हैं। महंत बताते है कि मंदिर का जीर्णोद्धार सन् 1908 में मद्रासियों ने कराया था। मंदिर के गर्भगृह को छोड़कर मंदिर का अन्य भाग दक्षिण भारतीय मंदिर शैली का बना हुआ है।