उत्तर प्रदेश: मुसलमानों को भड़का रहे हैं...मदनी के बयान पर भड़के शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी...
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जमीयत उलेमा-ए हिंद की बैठक में मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सरकार के दबाव में फैसले लिए जा रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट को ‘सुप्रीम’ कहा जाना उचित नहीं है.उन्होंने ये भी कहा कि जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा. मदनी के इस बयान पर बवाल मच गया है। वहीं इस मामले पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है।
रजवी ने शनिवार (29 नवंबर) को मौलाना महमूद मदनी के बयान की निंदा करते हुए कहा कि मदनी का बयान समाज को बांटने, देश को भ्रमित करने और मुसलमानों को भड़काने वाला है। उन्होंने कहा ‘सुप्रीम कोर्ट ही नहीं बल्कि सभी अदालतों पर मुसलमानों का भरोसा है. संसद जनता के हितों के लिए काम करती है, हमारा इस पर भी भरोसा है, कोई भी सरकार जनता के हितों के खिलाफ काम नहीं करती, हर सरकार संविधान के दायरे में रहकर जनता के जन कल्याण के लिए काम करती है’।
‘मदनी देश के मुसलमानों को उकसा रहे हैं’
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि भारत के करोड़ों मुसलमान सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों का सम्मान करते हैं . उन्होंने कहा कि मौलाना मदनी देश के मुसलमानों को उकसा रहे हैं। रजवी ने कहा कि इस वक्त भारत में अमन और शांति है, इस शांति के वातावरण को मौलाना मदनी खराब करना चाहते हैं।
रजवी ने की मदनी के बयान की निंदा
शहाबुद्दीन रजवी ने आगे कहा ‘मैं मौलाना मदनी के बयान की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं, और भारत के मुसलमानों से अपील करता हूं कि इस तरह के उल जलूल बयानों से अपने आप को बचाए, और विवादित बयानों और समाज को तोड़ने वाले बयानों पर ध्यान न दें।
क्या कहा था मौलाना महमूद मदनी ने
दरअसल जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने भोपाल में एक कार्यक्रम में जिहाद शब्द के दुरुपयोग और मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती नकारात्मक धारणाओं पर कड़ा एतराज जताया.जमीयत उलेमा-ए-हिंद की नेशनल गवर्निंग बॉडी मीटिंग में उन्होंने कहा कि इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मनों ने जिहाद जैसे इस्लाम के पवित्र विचारों को गलत इस्तेमाल, गड़बड़ी और हिंसा से जुड़े शब्दों में बदल दिया है. उन्होंने कहा कि इस्लाम के शब्द जिहाद को गाली का हमनाम बना दिया गया है. मजहब की तौहीन की जा रही है।
‘जब जब जुल्म होगा, तब तब जिहाद होगा’
महमूद मदनी ने कहा कि जब जब जुल्म होगा, तब तब जिहाद होगा. उन्होंने कहा कि बीते कुछ अरसे से खासकर बाबरी मस्जिद, तीन तलाक और कई अन्य मामलों में फैसलों के बाद ऐसा लगता है कि पिछले कुछ सालों से अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट उस समय तक ही सुप्रीम कहलाने का हकदार है, जब तक कि वो संविधान पर अमल करे अगर ऐसा न करे तो वह नैतिक तौर पर सुप्रीम कहलाने का हकदार नहीं है।