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बंगाल :: कौन है राजू नस्कर? जिसके आलीशान बहुमंजिला इमारत पर चला सुवेंदु का बुलडोजर, बंगाल की राजनीति में क्यों मचा हड़कंप...

बंगाल :: कौन है राजू नस्कर? जिसके आलीशान बहुमंजिला इमारत पर चला सुवेंदु का बुलडोजर, बंगाल की राजनीति में क्यों मचा हड़कंप...

कोलकाता। वक्त क्या नहीं करवाता है। ममता बनर्जी के सीएम रहते जिस शख्स की कोलकाता में तूती बोलती थी, सुवेंदु अधिकारी के सीएम बनते ही उस शख्स पर बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कड़े तेवरों के बीच रविवार को कोलकाता के बेलेघाटा इलाके में एक बड़ी बुलडोजर कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। 

टीएमसी के बाहुबली नेता और रसूखदार प्रमोटर राजू नस्कर का अवैध रूप से बना एक आलीशान बहुमंजिला इमारत को कोलकाता नगर निगम और पुलिस ने बुलडोजर और हैमर से जमींदोज कर दिया गया। महज पांच दिन पहले ही मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के एक सार्वजनिक मंच से खुलेआम राजू नस्कर का नाम लेते हुए उसकी अवैध संपत्तियों को अपने रडार पर होने की बात कही थी, जिसके बाद केएमसी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राजू नस्कर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।

राजू नस्कर बेलेघाटा और उत्तर कोलकाता के इलाके में अपने भारी 'मनी पावर' और बाहुबल के लिए जाना जाता है. वह पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार के कार्यकाल में पार्टी के चुनावी प्रबंधन और विपक्षी कार्यकर्ताओं को दबाने के लिए करता था. इस बड़ी कार्रवाई ने बंगाल की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है और यह संदेश साफ कर दिया है कि नई भाजपा सरकार अवैध कब्जों और भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर काम कर रही है।
कौन है राजू नस्कर और क्या है उसका रसूख?

कोलकाता के बेलेघाटा इलाके में शनिवार को उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब स्थानीय प्रशासन और कोलकाता नगर निगम की टीमें भारी पुलिस बल और बुलडोजर के साथ टीएमसी के कद्दावर नेता और प्रमोटर राजू नस्कर के ठिकाने पर पहुंच गईं. देखते ही देखते राजू नस्कर द्वारा ईस्ट कूलिया रोड और बारवारीताला रोड के इलाके में अवैध रूप से खड़ी की गई पांच मंजिला अवैध इमारतों को तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया. यह कार्रवाई इतनी त्वरित और अप्रत्याशित थी कि बेलेघाटा के इस रसूखदार बाहुबली को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

जमीन हड़पने और मारपीट के कई संगीन आरोप

कोलकाता के रियल एस्टेट गलियारों में राजू नस्कर कोई नया नाम नहीं है।उत्तर कोलकाता और विशेषकर बेलेघाटा-मणिकतला बेल्ट में उसे 'बेलेघाटा का त्रास' या स्थानीय बाहुबली प्रमोटर के रूप में जाना जाता है। राजू नस्कर की खासियत यह रही है कि वह हमेशा सत्ता के करीब रहा है. वामपंथी शासन के आखिरी दिनों में उसने हवा का रुख भांप लिया और पाला बदलकर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गया. टीएमसी के भीतर विभिन्न गुटों में बंटी उत्तर कोलकाता की राजनीति में राजू नस्कर सभी गुटों के लिए एक'जेंटलमैन संकटमोचक' माना जाता था, जो टीएमसी सांसद सुदीप बनर्जी का भी बेहद करीबी रहा है। राजू नस्कर के पास अपार 'मनी पावर' और स्थानीय युवाओं का एक बड़ा नेटवर्क है। इस अकूत संपत्ति और बाहुबल का इस्तेमाल वह तृणमूल कांग्रेस के लिए पूरे उत्तर कोलकाता में 'चुनावी प्रबंधन' को संभालने के लिए करता था।

सुवेंदु सरकार के रडार पर हैं 18 अवैध संपत्तियां

राजू नस्कर टीएमसी का एक बेहद मजबूत जमीनी मोहरा था.जमीन हड़पने और मारपीट के कई संगीन आरोपराजू नस्कर की अकूत संपत्ति का राज बेलेघाटा के घने इलाकों में जबरन जमीन खाली कराना और बिना प्रशासनिक अनुमति के धड़ल्ले से बहुमंजिला इमारतें खड़ी करना रहा है. हाल ही में, स्थानीय थानों में उसके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हुए थे। आरोप है कि बेलेघाटा मेन रोड पर एक बुजुर्ग महिला और उसके बेटे सुकमल को घर खाली करने के लिए राजू के गुंडों ने अगवा किया और अपने दफ्तर के पास ले जाकर बेरहमी से मारपीट की, क्योंकि राजू उस कीमती जमीन पर प्रमोटिंग करना चाहता था। इसके अलावा पूर्व में भी उस पर इलाके में हिंसक झड़पें कराने, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
कोलकाता के रियल एस्टेट गलियारों में राजू नस्कर कोई नया नाम नहीं है।

क्या TMC पर बढ़ेगा दबाव?

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नगर विकास सचिव और केएमसी कमिश्नर को सौंपी अपनी रिपोर्ट में साफ किया था कि राजू नस्कर ने बेलेघाटा और ईएम बाईपास के आसपास अवैध रूप से कम से कम 18 आलीशान संपत्तियां और इमारतें खड़ी की हैं. नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, "इन सभी संपत्तियों के टैक्स चोरी, अवैध निर्माण और सरकारी जमीनों पर कब्जे की जांच की जा रही है. जो इमारतें नगर निगम के नियमों का उल्लंघन करके बनाई गई हैं, उन्हें पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा।

राजू नस्कर पर बुलडोजर कार्रवाई को राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक स्थानीय स्तर पर मजबूत नेताओं और सिंडिकेट नेटवर्क की चर्चा होती रही है. ऐसे में चुनावी माहौल से पहले किसी प्रभावशाली स्थानीय चेहरे पर कार्रवाई विपक्ष को बड़ा नैरेटिव दे सकती है। सवाल अब यह है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ अवैध निर्माण तक सीमित रहेगी या आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में और बड़े नाम भी जांच और बुलडोजर की जद में आएंगे।