UP मिशन 2027 के लिए यूपी भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्षों का जातीय समीकरण लगभग तय, 15 जून तक हो सकती है घोषणा...
लखनऊ। विधान सभा चुनाव को नाक का सवाल बना चुकी भाजपा में क्षेत्रीय अध्यक्षों की भूमिका कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होगी। पार्टी चेहरों के चयन में सभी पहलुओं पर चिंतन-मंथन करते हुए जातीय समीकरणों को तकरीबन तय कर चुकी है।
पश्चिम, ब्रज एवं कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में जातीय कार्ड बदलने की तैयारी है, जबकि अवध, गोरखपुर एवं काशी क्षेत्र में जातीय समीकरण पूर्ववत रखते हुए चेहरे बदलने की चर्चा है। प्रदेश संगठन एवं क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा 15 जून के आसपास की जा सकती है। फिलहाल सूची को लेकर दिल्ली से हरी झंडी की प्रतीक्षा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकसभा सीट वाराणसी की वजह से 71 विधान सभा सीटों वाले काशी क्षेत्र पर राजनीतिक पंडितों की दृष्टि बनी हुई है। वर्तमान में ओबीसी चेहरा दिलीप पटेल क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं, जिनके विकल्प के रूप में ओबीसी समाज से किसी दूसरी जाति के हाथ कमान दी जा सकती है।
सर्वाधिक 82 विधान सभा सीटों वाले अवध क्षेत्र की कमान युवा कमलेश मिश्र के हाथ में है, जहां इस बार विकल्प के रूप में दो अन्य ब्राह्मण चेहरों का नाम चर्चा में है। अवध क्षेत्र के अंतर्गत प्रदेश सरकार एवं संगठन का मुख्यालय होने से इस क्षेत्र का राजनीतिक महत्व अधिक रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी दोनों 62 विधान सभा सीटों वाले गोरखपुर क्षेत्र से आते हैं, जहां सहजानंद राय अध्यक्ष हैं। यहां पर जातीय समीकरण पहले की तरह रखते हुए दो अन्य भूमिहार चेहरों के बीच मुकाबला है।
71 विधान सभा सीटों वाले पश्चिम क्षेत्र में क्षत्रिय चेहरा सतेंद्र शिशौदिया की जगह इस बार गुर्जर एवं वैश्य में से किसी एक फैक्टर पर दांव खेलने की तैयारी है। 52 विधान सभा सीटों वाले कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की कमान प्रकाश पाल के हाथ में है, जिनकी जगह इस बार क्षत्रिय चेहरे को भूमिका देने की तैयारी है।
65 विधान सभा सीटों वाले ब्रज क्षेत्र में दुर्गविजय शाक्य क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं, जिनके विकल्प के रूप में दो लोध चेहरों के बीच समीकरण बनाया जा रहा है। यह क्षेत्र पार्टी के हार्डकोर हिन्दुत्व का बड़ा गढ़ है।
चुनावी तैयारी की दृष्टि से नए क्षेत्रीय अध्यक्षों के पास सिर्फ छह माह का समय होगा। 2024 लोकसभा चुनाव में सभी क्षेत्रों का प्रदर्शन निराशाजनक था, ऐसे में विधान सभा चुनाव में पार्टी नई रणनीति एवं बदलाव के साथ आगे बढ़ेगी।