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कितना सही है वैज्ञानिकों का ‘ऊनी मैमथ’ की क्लोनिंग का प्रयास?

कितना सही है वैज्ञानिकों का ‘ऊनी मैमथ’ की क्लोनिंग का प्रयास?

नॉलेज . क्लोनिंग को पिछले कुछ सालों में बहुत अधिक सफलता मिली है. फिर भी जानवरों की क्लोनिंग आज भी एक विवादित विषय है. वैज्ञानिकों की एक टीम ने नेवले की प्रजाति के जानवर, काले पैर का फैरेट (Ferret) का क्लोन सफलता पूर्वक बना दिया जिसके बारे में माना जा रहा था कि वह 1980 के दशक में विलुप्त हो चुका है. उसे एक 30 साल पहले मर चुके जानवर के संरक्षित जीन्स से बनाया गया. अब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों (Harvard Scientists) की एक टीम करोड़ों साल पहले विलुप्त हो चुके ऊनी मैमथ (Woolly Mammoth) का क्लोन बना कर उसे फिर से जिंदा करने का प्रयास कर रहे हैं.

बहस के बीच क्लोनिंग में आगे बढ़ने का प्रयास

अमेरिकी वैज्ञानिक फेरेट की विविध जनसंख्या को लौटाने के प्रयास कर रहे हैं. यह अब भी बहस का ही विषय है कि जेनेटिक तौर पर डिजाइन किए गए विलुप्त हो चुके या हो रहे जानवरों को क्लोनिंग से बचाना कितना जायज है. इससे कई तरह के खतरे सामने आने की आशंका व्यक्त की जाती रही है जिसके लिए मानव तैयार नहीं हैं.

एक बड़ा सवाल ये भी
लेकिन मैमथ जैसे विशालकाय जीव को आज के हालातों में फिर से क्लोन कर बनाना कितना सही है. यह एक बड़ा सवाल है. वहीं यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या वाकई यह संभव भी है या नहीं. इसके लिए वैज्ञानिकों को अच्छी तरह से संरक्षित और सुरक्षित अवशेषों की आवश्यकता होगी जिससे वे स्वस्थ मैमथ का निर्माण कर सकें जो इस समय असंभव काम लगता है.

वास्तव में हो क्या रहा है
सवाल यह भी अहम है कि आखिर ऐसा प्रयास किया ही क्यों जा रहा है. वास्तव में वैज्ञानिक एक विशेष परियोजना पर काम कर रहे हैं. जिसमें वे मैमथ और एशियाई हाथी की बीच की संकर प्रजाति को बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो दोनों की नजदीकी संबंधी है. इस तरह का डीएक्सटिंक्शन एक तरतह से कुछ पारिस्थितिकी तंत्रों को बचाने के साथ बेहतर बनाने का तरीका हो सकत है.