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Up: जौनपुर में लाकडाउन के चलते नहीं खुले देवी मंदिरों के पट

Up: जौनपुर में लाकडाउन के चलते नहीं खुले देवी मंदिरों के पट


जौनपुर। शीतला चौकियां धाम में गर्भगृह व परिक्रमा मार्ग को सेनेटाइज नहीं किया गया। सुबह नगर पालिका कर्मियों ने मंदिर के बाहर गलियों, नालियों व दुकानों के आसपास दवाओं का छिड़काव किया। परन्तु मंदिर के गर्भगृह व परिक्रमा मार्ग को सेनेटाइज नहीं किया गया। एक्टर आशीष माली ने बताया कि इससे पंडा पुजारियों में क्षोभ है। मंदिर के मुख्य पुजारी शिव कुमार पंडा का कहना है कि नगर पालिका कर्मियों ने गर्भगृह व परिक्रमा मार्ग को सेनेटाइज नहीं किया। जबकि कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते गर्भगृह को सेनेटाइज करना चाहिए था।

वहीं वासंतिक नवरात्र की षष्टी तिथि पर रविवार को मां भगवती के कात्यायनी स्वरूप का पूजन किया गया। लाक डाउन के चलते देवी मंदिरों के पट नहीं खुले। शीतला चौकियां धाम, मैहर मंदिर व नव दुर्गा शिव मंदिर में दिनभर गहन सन्नाटा छाया रहा। श्रद्धालुओं ने घरों में माता का पूजन किया। नवरात्र के छठवें दिन ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने चौरा माता व डीह बाबा स्थान पर धार अर्पित किया। डीह स्थान पर बहुत सी महिलाओं ने कड़ाही चढ़ाई। 

घरों में कलश बैठाकर नौ दिनों तक व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिन भर पूजा पाठ व दुर्गा सप्तशती का पाठ करने में लगे रहे। कारण कि लाक डाउन के चलते किसी को कहीं आना जाना नहीं था। लोगों ने कलश के समक्ष विधि विधान से मां भगवती के कात्यायनी स्वरूप का पूजन किया। ज्योतिष व वास्तु विशेषज्ञ डा.टीपी त्रिपाठी के अनुसार मां कात्यायनी चार भुजाओं वाली हैं। दो हाथों से आशीर्वाद प्रदान करती मुद्रा में रहती हैं। षष्ठी के दिन इनकी पूजा होती है। भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए गोपियों ने कालिंदी यमुना के तट पर इस मां की आराधना की थी। मां के इस रूप के पूजन से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष की प्राप्ति सहज होती है। महिलाएं सुबह और शाम चौरा स्थान व डीह बाबा स्थान पर धार अर्पित कर रही हैं।