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रायबरेली : कोविड अस्पताल में मरीजों से लाखों की वसूली, भाजपा कार्यकर्ता ने जताया विरोध
रायबरेली : कोरोना संकट के दौर में संवेदनहीनता इतनी है कि कोविड अस्पतालों में भर्ती मरीजों से इलाज के नाम पर लाखों की वसूली हो रही है। सोशल मीडिया पर अस्पताल के कारनामों की पोल खुलने पर अब भाजपाई भी इसके खिलाफ मुखर हो गए हैं।
मंगलवार को भाजपा नेता संतोष पांडे ने अपने साथियों के साथ अस्पताल परिसर में ही अवैध वसूली के खिलाफ धरना देना शुरू कर दिया। हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि यदि कोई शिकायत मिलेगी तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, रायबरेली में कोविड का एकमात्र निजी क्षेत्र का 20 बेड का वृतांता अस्पताल संचालित है। कुछ दिन पहले ही अस्पताल को कोविड संचालन की अनुमति मिली थी। अनुमति मिलने के बाद लोगों को लगा था कि इससे उनकी समस्याओं को निजात मिलेगी लेकिन हुआ उल्टा। अब अस्पताल प्रबंधन एक दिन का 25 से 30 हजार की वसूली कर रहा है। पांच छह दिन का बिल डेढ़ लाख से ऊपर का आ रहा है। यही नहीं बिना बिल के मरीज का डेथ सर्टिफिकेट भी ईशु नहीं किया जा रहा है। शहर के बस स्टॉप निवासी एक मरीज के छह दिन का बिल एक लाख अस्सी हजार थम दिया। यही नही बिल में ऑक्सीजन का बिल 500 रुपया प्रति घंटा का चार्ज वसूला गया है। अस्पताल के बिल की इस तरह की कहानी अकेले एक की नहीं है, कई मरीजों ने इस तरह की शिकायतें की हैं।
हालांकि इस सम्बंध में जिला प्रशासन का कहना है कि उनके पास इस तरह की अभी कोई शिकायत नही है, यदि कोई शिकायत आएगी तो जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इन अव्यवस्थाओं को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता संतोष पांडे मंगलवार को धरने पर बैठ गए।उनका कहना है कि शासन द्वारा जो देय निर्धारित है उसके इतर वसूली की जा रही है,यदि प्रबंधन इससे बाज नहीं आता और मरीजों और तीमारदारों का शोषण बंद नहीं करता तो आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
कोरोना संकट में जनता का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। एक डॉक्टर और नर्सिंग स्टॉफ के भरोसे कोविड अस्पताल 20 बेड के कोविड अस्पताल में मात्र एक डॉक्टर की नियुक्ति की गई है, वह भी पूरे समय नहीं रहते। तीन-चार नर्सिंग स्टाफ के भरोसे पूरा अस्पताल चल रहा है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि 20 बेड की अनुमति होने के बावजूद यहां 40 बेड लगाए गए हैं और मरीजों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। इलाज की बाबत मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि इलाज के नाम पर कुछ नहीं है कोई देखने वाला नहीं है। कोई भी एक्सपर्ट डॉक्टर इस अस्पताल में है ही नहीं। केवल एक डॉक्टर ही नियुक्त हैं। भारी अव्यस्था के बीच चल रहे इस अस्पताल का मामला जब सोशल मीडिया में आया तो सबके कान खड़े हो गए।
आमजन में भी अस्पताल द्वारा चल रही इस लूट-खसोट को लेकर काफी आक्रोश है। जिला प्रशासन अब जांच की बात कर रहा है।