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UK : 2015 के बाद एक बार फिर पुलिसकर्मियों को नही मिला ग्रेड पे विरोध जारी, कई गिरफ्तार
देहरादून । उत्तराखंड में सन 2015 के बाद इस बार फिर पुलिस में ग्रेड पे में कटौती को लेकर आक्रोश दिखा है। हालांकि इनके आक्रोश को लेकर अधिकारियों ने नकारा है। लेकिन सोशल मीडिया पर बीते दिनों में लगातार पुलिस काले मास्क में दिखे थे। वहीं, पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने जवानों की मांग को तर्कसंगत बताते हुए कहा कि काला मास्क पहनने पर किसी भी तरह की मनाही नहीं है, लेकिन उन्होंने इस मामले में विरोध जताने जैसी बात से इन्कार किया था लेकिन यह विरोध अब और बढ़ गया है। बता दें कि, पुलिस के जवानों के ग्रेड-पे कटौती के विरोध में मुख्यमंत्री आवास कूच के दौरान पुलिस ने उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं को कोविड कर्फ्यू के उल्लंघन का हवाला देते हुए सीएम आवास से पहले उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
वहीं मामले में पुलिस ने आधा दर्जन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने के बाद महामारी एक्ट में मुकदमा दर्ज कर दिया। हालांकि, बाद में कुछ घंटे आराघर चौकी में बिठाने के बाद निजी मुचलकों पर रिहा कर दिया।
बता दें कि, सुबह करीब 11 बजे मुख्यमंत्री आवास कूच में केंद्रीय खेल प्रकोष्ठ के अध्यक्ष वीरेंद्र रावत, होटल यूनियन अध्यक्ष सुमन बडोनी, लोकायुक्त आंदोलन के संयोजक परमानंद बलोदी, युवा मोर्चा अध्यक्ष सीमा रावत, नगर अध्यक्ष अंकित घिल्डियाल, अनदीप नेगी, युवा मोर्चा के संगठन सचिव दिनेश नेगी आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया। इस दौरान उक्रांद नेताओं की पुलिस अधिकारियों से बहस भी हुई। उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय मीडिया प्रभारी शिवप्रसाद सेमवाल ने आरोप लगाए कि इंसाफ मिलने तक वह काला मास्क ही पहनेंगे। हम अपने जवानों के इंसाफ की लड़ाई जारी रखेंगे।
शिव प्रसाद सेमवाल ने कहा कि पुलिस के हेड कांस्टेबल के प्रमोशन में 4600 ग्रेड पे से कम किसी भी हालत में स्वीकार नही किया जाएगा। उक्रांद नेता शांति भट्ट ने कहा कि पुलिसकर्मियों के ग्रेड-पे कटौती के खिलाफ उत्तराखंड क्रांति दल लगातार पिछले तीन दिनों से आवाज उठाता रहा है, घंटाघर स्थित स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी की मूर्ति के नीचे उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने पिछले तीन दिनों से उपवास रख धरना दिया।
खेल प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र रावत ने कहा कि यदि सरकार जल्दी ही पुलिसकर्मियों के ग्रेड-पे कटौती का फैसला वापस नहीं लेती तो उत्तराखंड क्रांति दल कोरोना कर्फ्यू के बाद आंदोलन को तेज करेगा। उक्रांद नेताओं इस बात पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया कि सत्ता धारी नेताओं पर कोविड कर्फ्यू लागू नहीं है और सरकार जनता की आवाज कुचलने के लिए महामारी एक्ट का दुरुपयोग कर रही है।
दरअसल, कांस्टेबल को 10 साल की सेवा के बाद हेड कांस्टेबल का ग्रेड-पे दिया जाता है। इसके बाद 20 साल में सब इंस्पेक्टर व 30 साल की सेवा में इंस्पेक्टर का ग्रेड-पे दिया जाता है। लेकिन पुलिस विभाग में कांस्टेबल के प्रमोशन की प्रक्रिया कई वर्षों से लंबित है, इसमे कुछ भी फेरबलद देखने को नहीं मिले हैं।
लेकिन प्रमोशन न मिलने की स्थिति में उच्च वेतनमान अनिवार्य रूप से दिया जाता रहा है। आरोप है कि सरकार के ताजा आदेश से ग्रेड-पे में 1800 रुपये तक की कटौती हो गई है। जवानों के मुताबिक सातवें वेतनमान आयोग ने स्पष्ट किया था कि 10 साल में संतोषजनक सेवा करने पर 2400 रुपये ग्रेड-पे, 20 साल की सेवा पर 4600 रुपये, जबकि 30 साल की सेवा पर 4800 रुपये ग्रेड पे दिया जाएगा।