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नई दिल्ली: केंद्र सरकार से हटाए गए सीनियर मंत्रियों को बीजेपी संगठन में जल्द मिल सकती है अहम जिम्मेदारी।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में करीब दो साल बाद बदलाव हुआ है और इस बदलाव के बाद अब संगठन यानी भारतीय जनता पार्टी में भी जल्द बदलाव होने की प्रबल संभावना है। पार्टी सूत्रों की मानें तो अब जल्दी ही संगठन में भी फेरबदल होगा। सरकार की तरह पार्टी में भी कुछ बदलाव किए जाएंगे। वैसे भी पार्टी के तीन पदाधिकारी और एक प्रवक्ता केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए गए हैं। उनको जल्द से जल्द भरना होगा।
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी, राष्ट्रीय सचिव विशेश्वर टुडु और राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव चंद्रशेखर के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद रिक्त हुए पदों को तुरंत भरने की कवायद शुरू हो गई है। बता दें कि 7 जुलाई को कई मंत्रियों का इस्तीफा लेते वक्त ये कहा भी गया था कि अब आपकी सेवा की जरूरत पार्टी को है और पार्टी आपके अनुभवों का लाभ लेना चाहती है।
सूत्रों की मानें, तो केंद्र में मंत्री पद से हटे बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर और डॉ हर्षवर्धन जैसे नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। इन वरिष्ठ नेताओं की केंद्रीय मंत्रिमंडल से छुट्टी कर दी गई थी और अब उन्हें संगठन में बड़ी और अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद भी अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में अब तक कई विभाग/सेल में नई नियुक्ति नहीं हो सकी है। सूत्रों के मुताबिक, करीब आधा दर्जन से ज्यादा पार्टी के विभागों में पुराने संयोजक/प्रभारी ही काम कर रहे हैं। अब इन सभी पदों पर नई नियुक्ति भी जल्द की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी संगठन में फेरबदल में भी क्षेत्रीय संतुलन और खासकर चुनावी राज्यों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। जिस तरह कैबिनेट विस्तार में कुछ राज्यों में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखकर फैसला लिया गया है। वैसे ही संगठन में भी फेरबदल करते समय इन्हीं बात को प्रमुखता दी जाएगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कुछ वरिष्ठ नेताओं के अनुभवों का फायदा अगले 3-4 महीने में होने वाले राज्यपालों की नियुक्ति में लिया जाएगा। गौरतलब है कि इस साल अक्टूबर तक करीब आधे दर्जन राज्यपाल रिटायर्ड होने वाले हैं, जहां नए राज्यपाल नियुक्ति किए जाएंगे।
बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण दो प्रमुख राज्यों, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अगले साल के शुरुआत में चुनाव होने हैं जबकि साल के आखिर तक गुजरात में भी चुनाव होना है। ऐसे में संगठन को बूथ से लेकर राज्य स्तर तक मजबूत करने की चुनौती है और इसको ध्यान में रखते हुए केंद्र से हटाए गए लोगों के अलावा युवा नेता जिन्हें अभी तक न सरकार में जगह मिली है। न संगठन में, उनको संगठन में लाने की तैयारी चल रही है।
बीजेपी के संसदीय बोर्ड में भी लंबे वक्त से चार पद खाली पड़े थे। सुषमा स्वराज, अनंत कुमार ,अरुण जेटली के निधन से तीन पद खाली थे। वही वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति बनने के बाद भी एक जगह खाली हुई थी। और अब थावरचंद गहलोत को राज्यपाल नियुक्त करने के बाद पार्टी के संसदीय बोर्ड में अब पांच नेताओं की जगह खाली हो गई है। माना जा रहा है कि अब इन पदों को जल्द भर दिया जाएगा।