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मिर्जापुर : गौरवशाली इतिहास व आध्यात्म से समृद्ध रहा विंध्य क्षेत्र : आयुक्त योगेश्वर राम मिश्र

मिर्जापुर : गौरवशाली इतिहास व आध्यात्म से समृद्ध रहा विंध्य क्षेत्र : आयुक्त योगेश्वर राम मिश्र

मिर्जापुर । जीडी बिनानी पीजी कालेज में आजादी के 75 वर्ष अमृत महोत्सव के तहत 'स्वबोध, स्वराज एवं प्रतिरोध का इतिहास : मिर्जापुर के विशेष संदर्भ में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई जहां विंध्य क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास व संस्कृति पर विशद चर्चा हुई। मंडलायुक्त योगेश्वर राम मिश्र ने कहा विध्य क्षेत्र महा लक्ष्मी, महा सरस्वती और महा काली का समन्वित क्षेत्र है। गौरवशाली इतिहास एवं आध्यात्म दोनों से ही समृद्ध रहा है विंध्य क्षेत्र। यह विषय बहुत महत्वपूर्ण है।

हमारे इतिहास का मूल आधार हमारी आध्यात्मिक परंपरा रही है। हमारे इतिहास की जिओग्राफी थोड़ी कठिन है। हमें विश्वास है कि इतिहास संकलन समिति अंग्रेजों की ओर से लिखित विकृत इतिहास को संशोधित करते हुए पुन: एक नवीन गौरवशाली इतिहास प्रस्तुत करेगी।

उद्धाटन सत्र में धन्यवाद व आभार प्राचार्य डा. कृष्ण कुमार चौरसिया ने किया। शुभारंभ शिक्षिका ज्योति वर्मा ने छात्राओं संग सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और वंदना प्रस्तुत कर किया। डा. अनुराधा सिंह ने स्वबोध, स्वराज और प्रतिरोध के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1857 की क्रांति हो या फिर 1947 के आजादी की लड़ाई मीरजापुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना अध्यक्ष डा. देवी प्रसाद सिंह ने कहा कि पढ़े लिखे होने के साथ ही क्रियाशील रहना और भी महत्वपूर्ण है।

मुख्य वक्ता डा. बाल मुकुंद पांडेय ने कहा कि अपने को जानने का कार्य कोई आचार्य ही कर सकता है। यह विद्या हमारे राष्ट्र में मौजूद है। प्राचीन इतिहास बीएचयू की प्रो. सुमन जैन ने मीरजापुर के इतिहास का संक्षिप्त परिचय रखा। कहा कि आज बलिदानियों को हृदय से याद करने का समय है। मुख्य वक्ता डा. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मीरजापुर का गठन 30 सितंबर 1795 में वाराणसी और इलाहाबाद को काटकर बनाया गया। उस समय पहले कलेक्टर एमवाई डाईची थे। मीरजापुर का क्षेत्रफल सबसे बड़ा था। 1857 में पहले डिप्टी कलेक्टर सर राबर्ट थे, इन्हीं के नाम पर राबर्टसगंज पड़ा।

केएमपीजी कालेज की डा. रीतू सिंह ने मीरजापुर के संदर्भ में अपना शोध प्रबंध प्रस्तुत किया। केबी कालेज की डा. ऋचा शुक्ला ने पुरातात्विक आधार पर मीरजापुर के विशेषताओं का वर्णन किया। डा. शशिधर शुक्ला, डा. ध्रुवजी पांडेय, कृष्ण गोपाल वर्मा, डा. ऋषभ कुमार ने शोध पत्र पढ़ा।