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राष्ट्र के नाम संबोधन में पीएम मोदी बोले- देश को हासिल करना है बड़ा लक्ष्य, इसलिए अभी सावधानी जरूरी

राष्ट्र के नाम संबोधन में पीएम मोदी बोले- देश को हासिल करना है बड़ा लक्ष्य, इसलिए अभी सावधानी जरूरी


नई दिल्ली । भारत में 21 अक्टूबर को वैक्सीनेशन के मामले में एक इतिहास रच दिया गया. देश में लोगों को 100 करोड़ वैक्सीन डोज लगा दी गई. इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को देश को संबोधित कर रहे हैं. इससे पहले, 100 करोड़ डोज पूरा होने पर पीएम मोदी ने कहा कि देश के पास अब कोविड से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच है. पीएम मोदी ने गुरुवार को राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल का दौरा भी किया.


अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, कवच कितना ही उत्तम हो, कवच कितना ही आधुनिक हो, कवच से सुरक्षा की पूरी गारंटी हो, तो भी, जब तक युद्ध चल रहा है, हथियार नहीं डाले जाते. उन्होंने कहा, मेरा आग्रह है, कि हमें अपने त्योहारों को पूरी सतर्कता के साथ ही मनाना है. देश बड़े लक्ष्य तय करना और उन्हें हासिल करना जानता है. लेकिन, इसके लिए हमें सतत सावधान रहने की जरूरत है. हमें लापरवाह नहीं होना है.


पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, जैसे स्वच्छ भारत अभियान, एक जनआंदोलन है, वैसे ही भारत में बनी चीज खरीदना, भारतीयों द्वारा बनाई चीज खरीदना, वॉकल फॉर लोकल होना, ये हमें व्यवहार में लाना ही होगा. उन्होंने कहा, मैं आपसे फिर ये कहूंगा कि हमें हर छोटी से छोटी चीज, जो मेड इन इंडिया हो, जिसे बनाने में किसी भारतवासी का पसीना बहा हो, उसे खरीदने पर जोर देना चाहिए. और ये सबके प्रयास से ही संभव होगा.


पीएम मोदी ने कहा, भारत का पूरा वैक्सीनेशन प्रोग्राम विज्ञान की कोख में जन्मा है, वैज्ञानिक आधारों पर पनपा है और वैज्ञानिक तरीकों से चारों दिशाओं में पहुंचा है. हम सभी के लिए गर्व करने की बात है कि भारत का पूरा वैक्सीनेशन प्रोग्राम, Science Born, Science Driven और Science Based रहा है.



पीएम मोदी ने ट्वीट कर वैक्सीनेशन में इतिहास रचने पर कहा, ‘भारत ने इतिहास रच दिया. हम भारतीय विज्ञान, उद्यम और 130 करोड़ भारतीयों की सामूहिक भावना की विजय के साक्षी बन रहे हैं. वैक्सीनेशन में 100 करोड़ का आंकड़ा पार करने पर भारत को बधाई. हमारे डॉक्टरों, नर्सों और उन सभी को धन्यवाद जिन्होंने इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए काम किया.


अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, कोरोना महामारी की शुरुआत में ये भी आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं कि भारत जैसे लोकतंत्र में इस महामारी से लड़ना बहुत मुश्किल होगा. भारत के लिए, भारत के लोगों के लिए ये भी कहा जा रहा था कि इतना संयम, इतना अनुशासन यहां कैसे चलेगा? लेकिन हमारे लिए लोकतंत्र का मतलब है-‘सबका साथ’. उन्होंने कहा, सबको साथ लेकर देश ने ‘सबको वैक्सीन-मुफ़्त वैक्सीन’ का अभियान शुरू किया. गरीब-अमीर, गांव-शहर, दूर-सुदूर, देश का एक ही मंत्र रहा कि अगर बीमारी भेदभाव नहीं नहीं करती, तो वैक्सीन में भी भेदभाव नहीं हो सकता! इसलिए ये सुनिश्चित किया गया कि वैक्सीनेशन अभियान पर VIP कल्चर हावी न हो.



पीएम मोदी ने कहा, जब 100 साल की सबसे बड़ी महामारी आई, तो भारत पर सवाल उठने लगे. क्या भारत इस वैश्विक महामारी से लड़ पाएगा? भारत दूसरे देशों से इतनी वैक्सीन खरीदने का पैसा कहां से लाएगा? भारत को वैक्सीन कब मिलेगी? भारत के लोगों को वैक्सीन मिलेगी भी या नहीं? क्या भारत इतने लोगों को टीका लगा पाएगा कि महामारी को फैलने से रोक सके? भांति-भांति के सवाल थे, लेकिन आज ये 100 करोड़ वैक्सीन डोज, हर सवाल का जवाब दे रही है.


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, एक्सपर्ट और देश-विदेश की अनेक एजेंसियां भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बहुत सकारात्मक है. आज भारतीय कंपनियों में ना सिर्फ रिकॉर्ड निवेश आ रहा है, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बन रहे है. स्टार्ट-अप्स में रिकॉर्ड निवेश के साथ ही रिकॉर्ड स्टार्ट-अप्स, यूनिकॉर्न बन रहे है.