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यूपी: वाराणसी में बजट 2022 में केन- बेतवा प्रोजेक्ट से पूर्वांचल को बाढ़ से मिलेगी निजात।

यूपी: वाराणसी में बजट 2022 में केन- बेतवा प्रोजेक्ट से पूर्वांचल को बाढ़ से मिलेगी निजात।

                                 S.K. Gupta Reporter

वाराणसी। पूर्वांचल के मैदानी इलाके की बड़ी नदियां हिमालय से निकल कर बंगाल की खाड़ी में मिल जाती हैं। इसमें आने वाली बाढ़ से पूर्वांचल के एक दर्जन जिले समय-समय पर प्रभावित होते रहते हैं। इसके बावजूद कई बार ऐसा होता है कि न तो हिमालय की पर्वत श्रृंखला क्षेत्र में न ही उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाके में भारी वर्षा होती है फिर भी यहां बाढ़ की स्थिति बनी रहती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मध्य प्रदेश में भारी वर्षा का यमुना व गंगा में दबाव बढ़ता है। 

वहीं इस कारण पूर्वांचल के कई जिले बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। फसलों से लगायत जान-माल को भारी नुकसान होता है। केंद्रीय बजट-2022 में मध्य प्रदेश की केन और बेतवा नदियों को जोडऩे के लिए बजट की व्यवस्था कर दी गई है। इससे मध्य प्रदेश को सिंचाई और बिजली का लाभ तो मिलेगा ही साथ ही पूर्वांचल के बड़े इलाके को बाढ़ से राहत मिलेगी।

वहीं दरअसल मध्य प्रदेश में वर्षा से केन और बेतवा नदियां उफना जाती हैं। इसके बाद केन और बेतवा का पानी यमुना नदी में मिल जाता है। कई बार मध्य प्रदेश के बांधों को बचाने के लिए अचानक पानी छोड़ दिया जाता है। इसके बाद बाढ़ का पानी हमीरपुर, जालौन, बांदा के रास्ते प्रयागराज में गंगा मिल जाता है। इससे गंगा में अचानक बाढ़ आ जाती है। 

वहीं परिणाम स्वरूप भदोही, मीरजापुर, वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, बलिया जिलों में गंगा के मैदानी इलाके में भारी तबाही उत्पन्न हो जाती है। फसलों के साथ ही जान-माल का भारी नुकसान होता है। इस आपदा को आने से रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के पास नियंत्रण का कोई भी जरिया नहीं सिवाय इसके कि वह केवल बाढग़्रस्त लोगों को राहत प्रदान करे। 

वहीं यहां तक कि मध्य प्रदेश में स्थित कुछ बांधों से पानी छोडऩे की जानकारी भी उत्तर प्रदेश सरकार तक को नहीं दी जाती है। अब जब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच समझौते के बाद केन-बेतवा को जोडऩे की योजना को बजट में अमली जामा पहना दिया गया है तो निश्चित रूप से इसका पूर्वांचल को बर्बादी से बचाने से सीधा लाभ मिलेगा।

वहीं बीते दिसंबर को केंद्र सरकार ने केन-बेतवा को जोडऩे वाले प्रॉजेक्ट को मंजूरी दे दी थी। आठ साल में इस योजना को पूरा किया जाएगा। यमुना की सहायक नदियों केन और बेतवा को जोडऩे के लिए 221 किमी लंबी नहर बनाई जानी है। इसमें दो किलोमीटर की सुरंग भी बनाई जानी है। इससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखा प्रभावित बुंदेलखंड के 13 जिलों को फायदा होगा। 
वहीं जल शक्ति मंत्रालय का दावा है कि उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिले और मध्य प्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दामोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी व रायसेन जिलों को पानी की समस्या से निजात मिलेगी। इस प्रकार प्रॉजेक्ट पूरा होने पर 10 लाख हेक्टेयर खेतों और 62 लाख की आबादी को पेयजल भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही आने वाले दिनों में पूर्वांचल को बाढ़ से राहत मिलेगी।