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सोनभद्र : पंचायती राज विभाग के सेक्रेटरी ने दी बाबू को धमकी

सोनभद्र : पंचायती राज विभाग के सेक्रेटरी ने दी बाबू को धमकी


सोनभद्र: एक तरफ जहां विधानसभा चुनाव के राजनीतिक अखाड़े में नेता चुनावी ताल ठोक रहे हैं तो वहीं जिले का एक सेक्रेटरी डीपीआरओ ऑफिस में तैनात एक बाबू को ही ठोंक देने की धमकी दे रहा है. 

इस सनसनीखेज घटना के बाद जिलापंचायत राज अधिकारी भी सन्न रह गए और तत्काल उस सेक्रेटरी के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब कर दिया है.दरअसल, मामला यह था कि सूचना के अधिकार के तहत राबर्ट्सगंज ब्लॉक में तैनात एक सेक्रेटरी द्वारा समय से जवाब न देने पर विभाग द्वारा उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माने का आदेश किया गया था इसी जुर्माने को हटाने के लिए सेक्रेटरी ने जब विभाग के बाबू से कहा तो बाबू ने मना कर दिया. जिसपर गुस्साए सेक्रेटरी ने बाबू को ठोंक देने की धमकी दी.

विभाग से मिले एक महत्वपूर्ण दस्तावेज में साफ देखा जा सकता है कि कैसे सदर ब्लॉक का एक सेक्रेटरी पूरे पंचायतराज विभाग में गदर मचा रखा है. डीपीआरओ द्वारा जारी पत्र संख्या 3050/प-7/नोटिस/2021-22 दिनांक 14 फरवरी 2022 के मुताबिक रावर्ट्सगंज ब्लॉक में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी मनोज कुमार दुबे जनसूचना के तहत समय से सूचना न देने के कारण, उन पर 25 हजार रुपये जुर्माना किए जाने के आदेश के खिलाफ डीपीआरओ ऑफिस पहुंचे थे.

डीपीआरओ ऑफिस में तैनात लेखाकार गजेंद्र मोहन पांडेय के पास पहुंचकर आदेश को गलत बताते हुए 25000 रुपये वसूली आदेश को वापस लेने का दबाव बनाने लगे. जब गजेंद्र मोहन पांडेय द्वारा मना कर दिया गया तो सेक्रेटरी अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें ठोंक देने की धमकी देने लगा. बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद पूरे विकास भवन में हड़कंप मच गया.मामले की गंभीरता व मनबढ़ सेक्रेटरी को देखते हुए गजेंद्र मोहन पांडेय ने इसकी लिखित शिकायत डीपीआरओ से की. जिसके बाद डीपीआरओ विशाल सिंह ने फौरी तौर पर सेक्रेटरी के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर जबाब तलब किया है. साथ ही दोबारा इस तरह के कृत्य किये जाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है. 


इससे पहले भी फोन पर एक अन्य सेक्रेटरी के साथ गाली-गलौज के मामले में विभाग के बाबू पर कार्रवाई कुछ ही दिन पहले की गई थी. जबकि ऐसे ही एक अन्य मामले में एडीओ पंचायत को बरी कर दिया गया था बहरहाल इन मामलों के लगातार सामने आने से पंचायती राज विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है.