UP news
यूपी : पीएम स्वनिधि योजना से आत्मनिर्भरता की मिसाल बने वाराणसी और आसपास के जिलों के स्ट्रीट वेंडर।
वाराणसी। देश के सबसे बड़े प्रदेश की धड़कन पूर्वांचल में भी अब विधानसभा चुनाव का रंग जमने लगा है। एक-दूसरे को मात देने में जुटे सियासी दल भले ही जाति-धर्म के तीर चला रहे हों, मतदाताओं के सिर पर तो विकास और सुशासन का रंग चढ़ा हुआ है।
वहीं पूर्वांचल के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में गरीबी-बेरोजगारी की मार झेल रहे हजारों युवाओं ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के सहयोग से स्वावलंबन की राह पकड़ी और अपने परिवार और समाज को आत्मनिर्भर बनाया। कोरोना की पहली लहर में एक जून 2020 को लांच हुई पीएम स्वनिधि योजना के तहत बिना गारंटी मिले दस हजार रुपये का ऋण 74,926 परिवारों के लिए संजीवन साबित हुआ। बीते दो वर्षों में रेहड़ी-पटरी और ठेला लगाने वालों को योजना के तहत 74.92 करोड़ रुपये दिए गए। साल भर के अंदर कर्ज चुकाने पर सात प्रतिशत सब्सिडी भी मिलती है।
वहीं पर्यटन स्थल सारनाथ में कोरोना महामारी से पहले आइसक्रीम बेचने वाले सारनाथ घुरुहूपुर के राजू का काम लाकडाउन में पूरी तरह ठप हो गया। पांच माह का समय बहुत मुश्किल था। परिवार का खर्च चलाना असंभव हो गया था। भविष्य अंधकारमय दिख रहा था। राजू बताते हैं कि सितंबर माह में ठेला पटरी व्यवसायियों के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना आई।
वहीं दोस्त रामचंद्र प्रजापति व राजेश से योजना की जानकारी ली। बैक से दस हजार रुपये का लोन मिलते ही पर्यटन स्थल सारनाथ के संग्रहालय के समीप भेलपुरी, दाना का ठेला लगाना शुरू किया। अब ठीक-ठाक कमाई हो जाती है और परिवार का खर्च आसानी से चल जा रहा है। वहीं जौनपुर के केराकत विधानसभा क्षेत्र के नरहन निवासी सरदार खान भी मानते हैैं कि कोरोना महामारी के बीच रेहड़ी-पटरी पर ठेला आदि लगाकर आजीविका कमाने वाले निम्न आय वर्ग के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना बहुत बड़ी राहत बनकर आई।
वहीं ताला-चाभी व किचेन के सामान की मरम्मत का काम लाकडाउन में बंद हुआ तो रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। लाकडाउन खत्म हुआ, लेकिन दोबारा काम जमाने के लिए पूंजी की जरूरत थी। पीएम स्वनिधि योजना के तहत स्टेट बैैंक से दस हजार रुपये मिले तो जरूरत का सामान खरीदकर दोबारा काम शुरू किया। प्रतिमाह 900 रुपये की किस्त आती थी। जल्द ही पूरा ऋण जमा कर दिया।
वहीं आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सहादतपुरा निवासी शुभम के परिवार के लिए भी पीएम स्वनिधि योजना सहारा बनी। किराए के घर में रहने वाले शुभम छह साल से फुल्की व चाट का काम कर रहे हैैं। काम ठीक चल रहा था कि कोरोना आ गया। काम तो ठप हुआ ही, बचत भी खत्म हो गई। फिर पीएम स्वनिधि योजना के तहत सरकार 10 हजार रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया। डेढ़ माह में पैसा खाते में आ गया। काम को न सिर्फ शुरू किया बल्कि इसे और बढ़ाया। पहले दुकान पर दो लोग काम करते थे, अब पांच लोग करते हैैं। परिवार के सदस्य भी काम में लगे हैैं। ठीक से रोजी-रोटी चल रही है।
वहीं दूसरी तरफ़ गाजीपुर जिले के जहूराबाद विधानसभा क्षेत्र निवासी अशोक गुप्ता ने भी पीएम स्वनिधि योजना के तहत मिले 10 हजार रुपयों से चाय की दुकान शुरू की। आज उनका परिवार इस दुकान से ही पल रहा है। वह कहते हैं कि कोरोना के कारण सब ठप हो गया था। ऐसे में नगरपालिका से पीएम स्वनिधि योजना का पता चला।
वहीं कर्मचारी ने बताया कि आवेदन करने पर 10 हजार रुपये मिलेंगे। आवेदन किया तो पैसे मिले और इनसे चाय की दुकान शुरू की। उन्होंने पूरा कर्ज वापस कर दिया है और 20 हजार रुपये के लिए नया आवदेन करने की तैयारी है। इन पैसों से दुकान का विस्तार करेंगे। वह कहते हैैं कि इन पैसों से उन्हें दोबारा जीवन मिला है।
वहीं प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना तमाम लोगों के लिए आखिरी सहारा बनकर सामने आई। बलिया सदर विधानसभा क्षेत्र के सुंदर पाल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। पान की गुमटी से घर चलाना मुश्किल हो रहा था। फिर पता चला सरकार रेहड़ी दुकानदारों को बिना गारंटी कर्ज दे रही है।
वहीं उन्होंने आवेदन किया और दस हजार रुपये मिल गए। उन्होंने दुकान में सामना बढ़ाया और बिस्कुट, टाफी, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स आदि भी रखने लगे। धीरे-धीरे दुकान चलने लगी और परिवार का खर्च चलाना आसान हो गया। पाल का कहना है कि सरकार के सहारे ही जीवन की गाड़ी चल निकली है।
वहीं वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत 10 हजार रुपये ऋण लिया था। इन पैसों से काम बढ़ाया और ऋण चुका दिया है। 2021 में फिर 20 हजार रुपये का ऋण लिया है। बालूघाट पर गुमटी में मोबाइल फोन के उपकरणों और रिपेयरिंग की दुकान है। कोरोना काल में काम एकदम ठप हो गया था। धीरे-धीरे बचे हुए पैसे भी खत्म हो गए। ऐसे में पीएम स्वनिधि योजना के बारे में पता चला तो ऋण के लिए आवेदन किया। दस हजार रुपये की मदद मिली तो दोबारा खड़े होने की हिम्मत मिली। अब तो लोन भी चुकता कर दिया है।
वहीं बहुत मुश्किल घड़ी में सरकार ने यह मदद दी। कोरोना के घने अंधकार के समय में पीएम स्वनिधि योजना उम्मीद की किरण बनकर आई। आज मैं खुद के दम पर अपने परिवार का जीवकोपार्जन कर रहा हूं। व्यवसाय भी पहले से बढ़ा है। कोरोना काल में मेरी दुकान बंद हो गई थी। ऐसे में पीएम स्वनिधि के बारे में पता चला। मैंने आवेदन किया और मुझे 10 हजार रुपये मिला। इन पैसों से मैैंने किराने की दुकान को आगे बढ़ाया। आज मैैं आसानी से परिवार का खर्च चला पा रहा हूं।