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यूपी : पांच विभागों की एनओसी में अटका वाराणसी सारनाथ का विकास, वहीं बरसात से पहले काम पूरा हो पाने में संशय के घिरे बादल। .

यूपी : पांच विभागों की एनओसी में अटका वाराणसी सारनाथ का विकास, वहीं बरसात से पहले काम पूरा हो पाने में संशय के घिरे बादल। .


वाराणसी। नगरीय प्रबंधन के साथ ही निर्माण से संबंधित विभागों की मनमानी नहीं थम रही है। इसका खामियाजा प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं को भुगतना पड़ रहा है। वक्त से पहले तो छोडि़ए, तय वक्त में ही कार्य पूरा होना संभव नहीं हो रहा है। सारनाथ में प्रस्तावित प्रो-पूअर योजना इस मनमानी की एक बानगी मात्र है। 

वहीं हालात ऐसे हैं कि अब तक पांच विभागों ने कार्य प्रारंभ करने के लिए अपने स्तर से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) ही जारी नहीं किया है। यह मनमानी तक है जब प्रमुख सचिव पर्यटन ने सख्त निर्देश जारी किया है जो दरकिनार है। एनओसी नहीं मिलने की जानकारी कमिश्नर दीपक अग्रवाल तक पहुंची है जिन्होंने गहरी नाराजगी जाहिर की है। 

वहीं इसके लिए मंगलवार को एक बैठक बुलाई है जिनमें नगर निगम, जल निगम, पावर कार्पोरेशन, लोक निर्माण विभाग व एएसआइ के अफसर शामिल रहेंगे। ये वही विभाग हैं जिनके स्तर से अब तक एनओसी नहीं मिल सकी है। करीब 74 करोड़ की यह योजना है। इसमें प्रस्तावित निर्माण कार्य की शुरुआत 14 मार्च को हो गई है। प्रोजेक्ट के अनुसार बरसात से पहले मूलभूत सुविधाओं मसलन, सीवर लाइन, पेयजल समेत अन्य विकास कार्य पूरा हो जाना चाहिए।

वहीं इसको लेकर कमिश्नर ने कार्यदायी कंपनी को ताकीद भी कराया है। सड़कों की खोदाई कर सीवर लाइन व स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम डालना है। कमिश्नर के निर्देश के बाद निर्माण एजेंसी केके कंस्ट्रक्शन ने निर्धारित स्थान पर जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करा दी है। खोदाई की शुरूआत भी कर दी गई है। कमिश्नर के आदेशानुसार ट्रैफिक विभाग को प्रस्तावित कार्य के बाबत निर्देश जारी किया है ताकि रूट का डायवर्जन किया जा सके जिससे पर्यटकों समेत स्थानीय लोगों को यातायात संबंधित समस्या का सामना न करना पड़े।

वहीं काम को गति देने के लिए आगरा से डिजिटल गूगल पोजिशनिंग सिस्टम नामक मशीन मंगाई गई है। यह मशीन 10 किमी के दायरे में जमीन के लेवल को बताएगी। इस मशीन के जरिए ड्रेनेज व सीवर सिस्टम को आकार देना आसान हो जाएगा। मशीन के बताए डेटा के आधार पर ड्रेनेज लाइन में पानी का फ्लो गड़बड़ नहीं होगा।

वहीं योजना के तहत सारनाथ के सांस्कृतिक व ऐतिहासिक महत्व के 29 स्थलों की एक दूसरे से कनेक्टिविटी देने के साथ ही सीवर लाइन, स्ट्रीट लाइट, अंडरग्राउंड केबलिंग, रोड निर्माण आदि होंगे। इससे यहां के रहनवारों का जीवन स्तर बेहतर हो सकेगा। करीब साढे पांच किमी रोड बनाकर इस स्थल को वल्र्ड हेरिटेज के रूप में विकसित किया जाएगा।