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यूपी : रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के गृह जनपद चंदौली में मतदाताओं के दरबार में सियासी रणबांकुरे।

यूपी : रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के गृह जनपद चंदौली में मतदाताओं के दरबार में सियासी रणबांकुरे।


चंदौली। विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्येक सीट पर चुनावी शतरंज की बिसात सज गई है।यह जिला रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के गृहजनपद के तौर पर भी पहचाना जाता है। युद्ध जीतने के लिए राजा (प्रत्याशी) ने प्यादों (सैनिकों) को आगे बढ़ा दिया है। उनके पीछे हाथी सीधा चल रहा है, तो घोड़ा भी हिनहिना रहा है। अपनी तिरछी चाल से ऊंट भी मात देने को तैयार है। 

वहीं कौन शह देगा और किसकी शिकस्त होगी, यह फैसला प्रभु (मतदाता) के ऊपर है। जो वक्त की नजाकत को समझते हुए फिलहाल मौन साधे हैं। हालांकि प्रचार थमने के बाद चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे रणबांकुरे मतदाताओं की दरबार में हाजिरी लगाई। बिना ताम-झाम के घर-घर जाकर उनका रूझान जाना। 'धान के कटोरे में लहलहा रही 'भाग्यविधाताओं' की फसल का उपज कितना किसके हिस्से में जाएगा।

वहीं यह सोमवार को ईवीएम रूपी भंडारे में स्टोर हो जाएगा। चंदौली की चार सीटों में से अधिकांश पर भाजपा व सपा की बीच सीधा मुकाबला है। 17 वीं विस चुनाव का परिणाम भाजपा के पक्ष में रहा। यहां की तीन सीटों भाजपा तो सिर्फ एक सीट पर सपा काबिज हुई, जबकि बसपा की झोली खाली रही।

वही चंदौली जनपद की यह एक मात्र सुरक्षित सीट है। पूर्व विधायक व सपा प्रत्याशी जितेंद्र कुमार की प्रतिष्ठा इस बार भी दांव पर है, चूंकि वह अबकी चौथी बार किस्मत आजमा रहे हैं। बसपा लहर में 2007 में विधायक बने थे। इसके बाद के चुनाव में वह उप विजेता की भूमिका में रहे। 40 फीसद अनुसूचित वाली सीट पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, पटेल व मौर्य मतदाता निर्णायक होते हैं। भाजपा ने सीटिंग विधायक शारदा प्रसाद का टिकट काटकर संघ के पदाधिकारी कैलाश आचार्य को मैदान में उतार है। 

वहीं यह राजनीति में बिल्कुल नए चेहरे हैं। वहीं जितेंद्र राजनीति के माहिर खिलाड़ी तो हैं ही, अनुसूचित जाति में उनकी गहरी पैठ है। बसपा प्रत्याशी विकास आजाद की भी कैडर के अलावा मुस्लिम मतदाताओं में पकड़ दिख रही। गृह क्षेत्र के लोकप्रिय नेता व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने इनके समर्थन में जनसभा कर माहौल बदलने की पुरजोर कोशिश की है। भाजपा व संघ के अथक प्रयास के बाद सपा से भाजपा की सीधी लड़ाई देखी जा रही। बसपा कैडर के मतदाताओं तक ही सीमित रह जाएगी।

वहीं एरिया की सबसे बड़े कोल मंडी वाले मुगलसराय विस सीट पर इस बार फिर सपा के चंद्रशेखर का सीधा मुकाबला भाजपा के रमेश जायसवाल से है। बसपा ने इरशाद अहमद को यहां मैदान में उतारा है। इससे मुस्लिम मतदाताओं में बिखराव होना तय माना रहा। दूसरा कारण यह कि असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिम बाहुल दुलहीपुर में जनसभा कर मुस्लिम मतदाताओं का मूड बदल दिया है। 

वहीं सीटिंग विधायक साधना सिंह का टिकट कटने व पूर्व सांसद व सपा के वरिष्ठ नेता रामकिशुन यादव को टिकट नहीं मिलने से दोनों नेताओं के खेमे में जबरदस्त नाराजगी है। हालांकि 18 फीसद सवर्ण व 26 फीसद वैश्य मत का समीकरण सब पर भारी रहता है। यही निर्णायक की भूमिका में रहते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की जनसभा से भाजपा की राह आसान हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने

वहीं 2012 के परिसीमन में यह नई सीट बनी। बलिदानियों की धरती धानापुर का अस्तित्व समाप्त होने बाद इस सीट पर वोटरों का समीकरण बदल गया। यहां अनुसूचित जाति के सर्वाधिक, जबकि दूसरे नंबर पर यादव मतदाता हैं। यह क्षेत्र सपा का गढ़ माना जाता है। इस बार के चुनाव में भी भाजपा सपा से लड़ रही। भाजपा ने दोबारा सूर्यमुनि तिवारी को यहां मैदान में उतारा है। 

वहीं सपा से विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव, बसपा जय श्याम त्रिपाठी व कांग्रेस से देवेंद्र सिंह मुन्ना मैदान में हैं।भाजपा इस बार सपा के गढ़ सेंध लगाई हुई है। पिछले चुनाव में 15 हजार मत से चूके सूर्यमुनि के पक्ष में गृह मंत्री अमित शाह चुनाव सभा कर चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी चंदौली में चुनावी सभा में जोश भरा। वोटों की सेंधमारी का खेल शुरू हो चुका है। इसलिए मौजूदा विधायक व सपा प्रत्याशी की राह आसान नहीं दिख रही।

वहीं पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रही बसपा ने नए चेहरे अमित यादव को मैदान में उतारा है। इसी चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे सपा के मनोज सिंह भाजपा के प्रत्याशी व विधायक सुशील सिंह को सीधे टक्कर दे रहे हैं। यहां 28 फीसद पिछड़ा और पांच फीसद मुस्लिम बीते चुनाव में सपा की संजीवनी बने थे। 

वहीं हालांकि तब भाजपा व सपा के प्रत्याशियों को मिले वोटों में भारी अंतर रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, गठबंधन के डाक्टर संजय निषाद, भोजपुरी स्टार पवन सिंह की चुनावी सभाएं कर सुशील के पक्ष में हवा बना चुके हैं। इससे सुशील की स्थिति की स्थिति बेहतर हुई है।