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वाराणसी : गांधी-जेपी की विरासत सर्वसेवा संघ को ध्वस्त करने उतरा प्रशासन, कई गांधीवादी नेता हिरासत में ,,,।

वाराणसी : गांधी-जेपी की विरासत सर्वसेवा संघ को ध्वस्त करने उतरा प्रशासन, कई गांधीवादी नेता हिरासत में ,,,।

उत्तरप्रदेश के वाराणसी के राजघाट स्थित सर्व सेवा संघ भवन की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज होने के बाद शनिवार सुबह से ही प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो गई। भवन को खाली कराने के लिए प्रशासन की टीम के साथ कई थानों का फोर्स राजघाट पहुंच गया।पुलिस बल के साथ बुलडोजर और नगर निगम की गाड़ियां भी पहुंची। 

प्रशासनिक अधिकारियों ने भवन में रहने वालों को परिसर खाली करने और बाहर आने की चेतावनी दी। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने प्रशासन का विरोध शुरू कर दिया। गेट पर धरना प्रदर्शन करते हुए आक्रोश जताया। दूसरी ओर लोग मकानों से अपना सामान बाहर निकाल रहे हैं। वहीं तमाम विरोध के बावजूद पुलिस प्रशासन मौके पर डटा है। उधर, भवन कि ध्वस्तीकरण की जानकारी पाकर दिल्ली से बड़ी संख्या में गांधीवादी पहुंच गए।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. संत प्रकाश के मुताबिक, वाराणसी प्रशासन बड़ी फोर्स के साथ बिना न्यायिक प्रक्रिया के पूरा हुए जबरिया 'सर्व सेवा संघ' राजघाट, वाराणसी स्थित जेपी-विनोबा की विरासत को खाली करवा रहा है और इस विरासत पर बुलडोज़र चलाने पर अमादा हैं। गांघी-जेपी के मानने वाले लोगों, दलों से अपील है कि आगे आएं और इस विरासत को बचाएं।

इधर, सर्व सेवा संघ के भवनों को तोड़ने की जानकारी मिलते ही दिल्ली के प्रो. राजकुमार जैन, प्रो. रमाशंकर सिंह, जेएनयू के प्रो. आनंद कुमार, सुनील, अभय क्रांतिवीर, शुभम बनवासी, धनंजय, महेंद्र राठौर, अरविंद सिंह आदि लोग धरना स्थल पर पहुंच गए है। विरोध कर रहे सामाजिक नेताओ का कहना है कि यह सरकार महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू सहित आजादी के नायकों की छवि खराब करने व राष्ट्रीय धरोहरों को नष्ट करने पर आमादा है। जलियांवाला बाग और साबरमती आश्रम को बदलकर इस सरकार ने पर्यटन स्थल बना दिया है।

नेताओं का कहना है कि जय प्रकाश नारायण द्वारा स्थापित सर्व सेवा संघ और गांधी आश्रम को भी तोड़कर यहां गेस्ट हाउस बनाना चाह रही है। रेलवे और जिला प्रशासन को आगे करके सर्व सेवा संघ की जमीन एडिट को भी फर्जी साबित करने की कोशिश की जा रही है। इस मामले को लेकर सर्वे सेवा संघ द्वारा सुप्रीम, हाईकोर्ट और जिला न्यायालय में पहले ही याचिका दायर की गई है। मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा सर्व सेवा संघ की भूमि के मालिकाना हक को लेकर जिला न्यायालय में वाद पर सुनवाई होना सुनिश्चित किया गया है।

याचिका खारिज होने के बाद पहुंची टीम

वाराणसी में जेपी और गांधी समेत कई महापुरुषों की विरासत पर बुलडोजर चलाने की तैयारी है। जेपी और विनोबा भावे से जुड़ा भवन अब इतिहास बन जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ऋषिकेश राय और जस्टिस पंकज मित्तल की ओर से संघ की याचिका खारिज करने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। परिसर खाली कराने की चेतावनी के बाद सामान बाहर निकालने की चेतावनी दी गई है। संघ कार्यकर्ता गेट पर बैठकर धरना देने लगे। पुलिस को अंदर जाने से रोकने लगे। इस दौरान कार्यकर्ताओं की पुलिस से नोकझोंक भी हुई। उनका कहना था कि बुलडोजर के आगे लेट जाएंगे, लेकिन गांधी और जेपी की विरासत गिरने नहीं देंगे। ध्वस्तीकरण की जानकारी के बाद कई दलों के राजनेता भी सर्व सेवा संघ भवन की ओर रवाना हो गए।

ये है भवन से जुड़ा इतिहास

गांधी विचार के राष्ट्रीय संगठन सर्व सेवा संघ की स्थापना मार्च 1948 में भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में हुई थी। विनोबा भावे के मार्गदर्शन में करीब 62 साल पहले सर्व सेवा संघ भवन की नींव रखी गई। इसका मकसद महात्मा गांधी के विचारों का प्रचार-प्रसार करना था। वर्ष 1960 में इस जमीन पर गांधी विद्या संस्थान की स्थापना के प्रयास शुरू हुए। भवन का पहला हिस्सा 1961 में बना था। 1962 में जय प्रकाश नारायण खुद यहां रहे थे।

ये है विवाद

सर्व सेवा संघ और उत्तर रेलवे के बीच जमीन के मालिकाना हक पर चल रहे विवाद में जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने सुनवाई के बाद रेलवे के हक में फैसला दिया है। उन्होंने सर्व सेवा संघ का निर्माण अवैध करार देते हुए जमीन को उत्तर रेलवे की संपत्ति माना है। सर्व सेवा संघ भवन को ध्वस्त करने के लिए उत्तर रेलवे प्रशासन ने 30 जून 2023 की तिथि नियत की, लेकिन इस फैसले का विरोध शुरू हो गया। सर्व सेवा संघ के पदाधिकारियों ने प्रशासन के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज करते हुए अस्तरीय बताया।