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लखनऊ :: अब भी UP पुलिस की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में दर्ज है साल भर पहले मारे गए माफिया का नाम ,,,।

लखनऊ :: अब भी UP पुलिस की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में दर्ज है साल भर पहले मारे गए माफिया का नाम ,,,।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि जब अतीक और अशरफ से बदमाश मिट्टी में मिल ही चुके हैं, तो सूबे में उनके जैसे बाकी जो बचे हैं वो भी मिट्टी में मिला दिए जाएं। इसको लेकर प्रशासन ने मोस्ट वॉन्टेड की लिस्ट भी तैयार की है। 

हालांकि इसी लिस्ट में यूपी की पुलिस की तरफ से भारी चूक सामने आई है, इस चूक से सूबे की खाकी की कार्यप्रणाली पर ही सवालिया निशान उठ सकता है। सूबे की पुलिस ने अब 2 लाख के उस इनामी गैंगस्टर को दोबारा से ‘ठोकने’ का इरादा बनाया है, जिसे यूपी पुलिस की एसटीएफ ही अब से करीब साल भर पहले एनकाउंटर में ‘ठोक’ कर निपटा चुकी है!

दरअसल यह हैरान करने वाला सच मंगलवार (4 जुलाई 2023) को उत्तर प्रदेश पुलिस की ऑफिशियल वेबसाइट खंगालते हुए सामने आया। जिसमें मौजूद है यूपी के मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर और माफियाओं से संबंधित संक्षिप्त जानकारी। जैसे कि वॉन्टेड अपराधी की फोटो, नाम, पता, थाना और उसकी गिरफ्तारी के लिए सूबे की सरकार या पुलिस द्वारा रखी गई उसके सिर पर इनामी राशि. यह जानकारी अपलोड की गई है अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध) कार्यालय की ओर से।

सूबे को मोस्ट वॉन्टेड माफियाओं की इस अधिकृत ब्लैक लिस्ट में 5-5 लाख के इनामी और उमेश पाल हत्याकांड के मोस्ट वॉन्टेड मास्टरमाइंड गुड्डू मुस्लिम और शूटर साबिर का भी नाम दर्ज है, इनके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश का 5 लाख का इनामी पुलिस कस्टडी से फरार बदन सिंह बद्दो भी शामिल है, 28 मोस्ट वॉन्टेड के नाम वाली इस सूची पर "केसरी न्यूज नेटवर्क" ने जब बारीकी से नजर डाली तो हैरान करने वाली जानकारी मिली तो पता चला कि इन 28 मोस्ट वॉन्टेड में से 19वें नंबर एक जिस मोस्ट वॉन्टेड मनीष सिंह उर्फ सोनू का नाम मय फोटो मौजूद है, वो 2 लाख का इनामी मोस्ट वॉन्टेड सोनू तो उत्तर प्रदेश पुलिस की ही स्पेशल टास्क फोर्स के हाथों मार्च 2022 के अंतिम दिनों में यानी बीते साल ही एनकाउंटर में ढेर किया जा चुका है। वो खूनी एनकाउंटर हुआ था वाराणसी के लोहता थाना क्षेत्र इलाके में।

लिस्ट में अब भी 2 लाख का फरार इनामी है सोनू

एनकाउंटर के बाद मौके से एसटीएफ ने पॉइंट 38 बोर की पिस्टल, 9 एमएम कारबाइन मय 20 कारतूस बरामद करने का दावा किया था। दिलचस्प कहिए या फिर गंभीर यह है कि जिस मनीष सिंह उर्फ सोनू को यूपी पुलिस की ही एसटीएफ बीते साल ठोक चुकी है, उसी मनीष सिंह उर्फ सोनू को यूपी पुलिस की ही अधिकृत वेबसाइट पर मौजूद मोस्ट वॉन्टेड की ब्लैक लिस्ट में 19वें नंबर पर 2 लाख का इनामी बताया जा रहा है। यह स्थिति 5 जुलाई 2023 तक यूपी पुलिस की वेबसाइट पर बदस्तूर बनी हुई थी। पुलिस की आफिशियल वेबसाइट पर मनीष सिंह उर्फ सोनू पुत्र अनिल सिंह के बारे में जो संक्षिप्त जानकारी मौजूद है उसमें उसे नरोत्तमपुर थाना लंका वाराणसी का मूल निवासी बताया गया है।


अब भी यूपी पुलिस की वेबसाइट पर मौजूद है मारे गए माफिया का नाम

ये तो ब्लंडर है- पुलिस अधिकारी

इस बारे में यूपी पुलिस के एक अधिकारी ने अपनी पहचान उजागर न करने की शर्त पर कहा, “यह तो ब्लंडर है कि जो अपराधी एक साल पहले मुठभेड़ में मारा जा चुका हो वो अब तक पुलिस की अधिकृत वेबसाइट पर 2 लाख का इनामी मोस्ट वॉन्टेड बनाकर ही सजा रखा है। हालांकि, यह भूल मानवीय भी हो सकती है, उस इंसान के द्वारा जिसने पुलिस वेबसाइट पर मोस्ट वॉन्टेड की इस सूची को अपडेट किया हो, संभव है कि अब जब आपकी (केसरी न्यूज नेटवर्क) इस खबर से पुलिस महकमे का ध्यानाकर्षण हो तो पुलिस महकमा भूल सुधार करके इस मोस्ट वॉन्टेड माफिया का नाम अपने उन मोस्ट माफियाओं की सूची से वेबसाइट से डिलीट कर दे, जहां वो अभी जिंदा मानकर मौजूदा वक्त में भी मोस्ट वॉन्टेड ही शो हो रहा है।”

इस बारे में जब मीडिया ने 1974 बैच के पूर्व आईपीएस और उत्तर प्रदेश के रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक डॉ. विक्रम सिंह को बताया तो वे भी हैरत में पड़ गए, बोले -“यह तमाशा तो पहली बार देख सुन रहा हूं अपने ही पुलिस महकमे का। वैसे यह कारस्तानी बाबू-क्लर्क की लापरवाही तो होगी ही, इसमें उस शख्स की जिम्मेदारी या लापरवाही भी नजर आती है, जिसने मोस्ट वॉन्टेड की लिस्ट पुलिस महकमे की वेबसाइट पर अपलोड होने के लिए तैयार करके सौंपी होगी। मैं सूची को अपलोड करने वाले को दोष नहीं दूंगा. उसे तो ऊपर से जारी जो सूची थमाई गई उसने जस की तस अपलोड कर दी।”

“अपलोड करने वाला पुलिसकर्मी सूची में कोई भी रद्दो-बदल का कानूनी हक भी नहीं रखता है। पकड़ा उसे जाना चाहिए जिस पुलिस अफसर-कर्मचारी ने यह ब्लंडर कर, ऊट पटांग सूची तैयार कर अपलोड करने वाले को आंख मूंदकर थमा दी। लेकिन यह तमाशा यूपी पुलिस के लिए जग-हंसाई की बात तो है ही। अगर "केसरी न्यूज नेटवर्क" की नजर से इस मेजर मिस्टेक को न पकड़ा जाता तो, न मालूम आने वाले समय में कब तक मुठभेड़ में काफी पहले ढेर किया जा चुका बदमाश ही, मोस्ट वॉन्टेड माफिया की ब्लैक लिस्ट में घुसा रहता।”

मरने के 12-14 महीने बाद भी मोस्ट वॉन्टेड

इस बारे में 1998 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी और यूपी पुलिस के रिटायर्ड आईजी इंटेलीजेंस आर के चतुर्वेदी ने कहा, “यह ह्यूमन ऐरर और लापरवाही है। पहली गलती तो उस इंसान की है जिसने इस सूची को अपलोड किया. दूसरी गलती उसकी है जिसने सूची तैयार करके अपलोड करने वाले के हवाले की, जिसने यही देखना गवारा नहीं किया कि सूची में वो मोस्ट वॉन्टेड भी शामिल कर डाला गया है जिसका एनकाउंटर सवा साल पहले ही हो चुका है, तो जो इंसान सवा साल पहले ही ढेर हो चुका होगा मुठभेड़ में वो अब पुलिस का मोस्ट वॉन्टेड कैसे हो सकता है?”

“कभी क्या लाशें या कोई स्वर्गवासी अपराधी भी मोस्ट वॉन्टेड हो सकता है? यह स्थिति तो हास्यास्पद है। अब देखिए शायद मीडिया की  इस खबर से कुछ सजग होकर, भूल सुधार कर लिया जाए। हालांकि कहने-देखने को तो, यह हास्यास्पद और ब्लंडर तो है ही पुलिस महकमे का कि किसी मारे जा चुके बदमाश को भी मोस्ट वॉन्टेड की ब्लैक लिस्ट में शामिल कर रखा है। और वो 12-14 महीने बाद भी।”