यूपी,पुलिस :: वायरलेस नहीं..अब मोबाइल फोन से काम करेगी पुलिस, वीडियो कॉल और जीपीएस लोकेशन की भी सुविधा,,,।
काशी विश्वनाथ धाम, कमिश्नरेट और वाराणसी जोन के नौ जिलों की पुलिस अब वायरलेस सेट का कामकाज मोबाइल से करेगी। इसके लिए मंगलवार को पुलिस आयुक्त के कैंप कार्यालय में डीजी (टेलीकॉम) डॉ. संजय एम. तरडे ने पुश टू टॉक ओवर सेल्युलर मोबाइल सर्विस का ट्रायल शुरू कराया। इससे पहले कांवड़ यात्रा के दौरान मेरठ व बरेली जोन में इस सेवा का ट्रायल किया गया था।
डीजी (टेलीकॉम) ने बताया कि पुलिस की वायरलेस सर्विस अभी जस की तस रहेगी। इसके समानांतर पुश टू टॉक ओवर सेल्युलर मोबाइल सर्विस का ट्रायल चलेगा। इसकी सुरक्षा, गोपनीयता और पुलिस अफसरों से मिले फीडबैक का अध्ययन किया जाएगा, फिर इसे स्थायी रूप से लागू किया जाएगा। इसका इस्तेमाल अभी फिनलैंड, फ्रांस और यूरोप सहित अन्य देशों की पुलिस कर रही है। इजाजत लेकर इसका ट्रायल शुरू किया गया है। इस दौरान पुलिस आयुक्त मुथा अशोक जैन, एडीजी जोन राम कुमार, जेसीपी डॉ. के. एजिलरसन और अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) एस. चनप्पा सहित अन्य पुलिस अफसर मौजूद रहे।
होंगे ये फायदे
- इंटरनेट पर आधारित सेवा से 300 मिली सेकेंड में पुलिसकर्मी एक-दूसरे से कनेक्ट होंगे।
- वन टू वन सर्विस भी जारी रहेगी। कई पुलिसकर्मियों को भी संबोधित किया जा सकेगा।
- वीडियो कॉल, जीपीएस लोकेशन और जियो-फेसिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
- किसी एक क्षेत्र विशेष के पुलिसकर्मियों से गोपनीय सूचनाओं का आदान-प्रदान आसानी से किया जा सकेगा।
- मोबाइल बॉडी वॉर्न कैमरे का भी काम करेगा।
- सेवा मोबाइल फोन में होगी, इसलिए वायरलेस सेट जैसे बातचीत कोई और नहीं सुन पाएगा। इससे गोपनीयता बनी रहेगी।
- डेटा हैक नहीं किया जा सकेगा।
- इसका उपयोग आम आदमी नहीं कर पाएगा और न मोबाइल में डाउनलोड करेगा।
- पुलिस कर्मियों के मोबाइल पर भी पुलिस की टेक्निकल टीम सिस्टम इंस्टॉल करेगी।
- मोबाइल इंटरनेट जहां भी होगा, वहां यह सर्विस आसानी से काम करेगी।
- पुलिसकर्मी जिला या प्रदेश से बाहर भी होंगे तो एक बटन दबाकर उनसे आसानी से संपर्क किया जा सकेगा।
- नए हार्डवेयर खरीदने या टॉवर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अफसरों से चौकी इंचार्जों तक के लिए सर्विस
डीजी (टेलीकॉम) ने बताया कि ट्रायल के दौरान यह सेवा पुलिस महकमे के राजपत्रित अधिकारियों, थानाध्यक्षों और चौकी इंचार्जों के लिए उपलब्ध रहेगी। ट्रायल पूरा होने के बाद हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल भी लाभ उठा सकेंगे। सभी दरोगा, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल अभी वायरलेस सेट से लैस नहीं रहते हैं, लेकिन इस सर्विस से अधिकारियों की नजर उन पर रहेगी।
कांवड़ यात्रा के दौरान मिला अच्छा रिस्पांस
डीजी (टेलीकॉम) ने बताया कि हाल ही में संपन्न हुई कांवड़ यात्रा के दौरान इस सर्विस का ट्रायल मेरठ और बरेली जोन में किया गया था। वहां इस सर्विस का बहुत अच्छा रिस्पांस रहा। इसके बाद लखनऊ में ट्रायल शुरू किया गया। बनारस के बाद प्रयागराज, अयोध्या और मथुरा सहित अन्य क्षेत्रों में ट्रायल किया जाएगा।
नक्सल प्रभावित जिलों के लिए फायदेमंद
एडीजी जोन राम कुमार ने बताया कि यह सेवा वाराणसी जोन के सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली के नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए लाभकारी है। अभी कई इलाके ऐसे हैं, जहां वायरलेस सेट काम नहीं करता है। मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट उपलब्ध रहता है। अब नक्सल प्रभावित इलाकों में बेहतर पुलिसिंग हो सकेगी।