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विरासत और विकास के साथ स्मार्ट सिटी के तौर पर होने लगी ब्रांड बनारस की पहचान,,,।

विरासत और विकास के साथ स्मार्ट सिटी के तौर पर होने लगी ब्रांड बनारस की पहचान,,,।

ब्रांड बनारस की पहचान विश्व में विरासत और विकास के साथ स्मार्ट सिटी के तौर पर होने लगी है। शहरी एवं आवास कार्य मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा इंदौर में आयोजित इंडिया स्मार्ट सिटी कॉन्क्लेव -2023 में वाराणसी को उत्तरी जोन में बेस्ट स्मार्ट सिटी का अवार्ड दिया गया। 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को वाराणसी स्मार्ट सिटी के सीईओ और नगर आयुक्त शिपू गिरि को सम्मानित किया। स्मार्ट सिटी वाराणसी को परियोजनाओं के समय से क्रियान्वयन, सक्सेस स्टोरी, परियोजनाओं की उपयोगिता, कुशल जनसहभागिता एवं फीडबैक प्रणाली के आधार पर पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।

प्रदर्शनी में वाराणसी मॉडल की धूम

इंदौर में आयोजित इंडिया स्मार्ट सिटी कॉन्क्लेव में प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमें वाराणसी के प्रमुख कार्यों को मॉडल के माध्यम से दिखाया गया है। बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वाराणसी में लगे 3000 एडवांस सर्विलांस कैमरे से यहां के सुरक्षा कवच को लाइव देखा। इसके अलावा रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, मच्छोदरी मॉडल स्कूल, वाराणसी की गलियों का अत्याधुनिक तरीके से विकास, इंटीग्रेटेड सिटी कमांड सेंटर आदि को प्रदर्शित किया गया है।

यह काशीवासियों का सम्मान
 
वाराणसी स्मार्ट सिटी के मुख्य महाप्रबंधक डॉ डी वासुदेवन ने इस पुरस्कार को समस्त काशी वासियों का सम्मान बताया। कहा कि वाराणसी का अलौकिक एवं आध्यात्मिक रूप के साथ यह आधुनिक संगम काशी के विकास को उदीयमान कर रहा है। मंडलायुक्त व अध्यक्ष, वाराणसी स्मार्ट सिटी कौशल राज शर्मा ने काशीवासियों को शुभकामनाएं देते हुए इसे गर्व का विषय बताया। साथ ही कहा कि भविष्य में भी वाराणसी स्मार्ट सिटी के अंतर्गत शहर के चहुमुंखी विकास के लिए तत्पर रहेगी।

वाराणसी स्मार्ट सिटी के कुछ प्रमुख काम
 ब्रांड बनारस बनी काशी की चर्चा जितनी पौराणिकता के लिए होती है, अब उतनी ही अत्याधुनिकता के लिए भी होने लगी है। 2017 में वाराणसी को स्मार्ट बनाने की कवायद शुरू हुई। अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर रुद्राक्ष, आधुनिक सुविधाओं से युक्त नमो घाट, शहर को जाम से मुक्ति दिलाती कई आधुनिक पार्किंग, एडवांस सर्विलांस सिस्टम, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, शहर के चप्पे चप्पे पर तीसरा नेत्र, आजादी के पहले के स्कूलों का कायाकल्प, पुरानी काशी के वार्डों का पुनरुद्धार, पौराणिक तालाब, कुंडों, पार्कों का जीर्णोद्धार, ओपन जिम, पार्को का जीर्णोद्धार, घाटों पर फसाड लाइट लगाया गया।

इसके साथ ही घाटों के महत्व को बताते हुए साइनेज, गंगा आरती और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की आरती का शहर में लाइव प्रसारण, इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन, शहर में कई जगहों पर फ्री वाई फाई सुविधा, दशाश्वमेध घाट पर पर्यटक सुविधा, मार्केट कॉम्प्लेक्स का निर्माण, गोदौलिया से दशाश्वमेध तक गुलाबी गलियारा व सौंदर्यी करण आदि काम हुए हैं। 2018 से अभी तक 51 परियोजनाओं के लिए स्वीकृत 1017.69 करोड़ का काम पूरा हो चुका है। सिगरा खेल स्टेडियम में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम निर्माणाधीन है। नमो घाट समेत तीन महत्वपूर्ण योजनाएं मार्च 2024 तक पूरी होना प्रस्तावित है। इसकी लागत लगभग 329 करोड़ है।