सनसनीखेज खबर :: जमीन यहां, मालिक सरहद पार, UP में करोड़ों की प्रॉपर्टी पाकिस्तानियों के नाम,,,।
देश की सीमाओं का बंटवारा होने के बाद भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का जब भी जिक्र आता है, तब-तब भारत में सियासत गरमा जाती है। अगर ऐसे में भारत में करोड़ों की जमीन के मालिकाना हक अगर पाकिस्तान में रह रहे नागरिकों के नाम अभी तक कागजों में दर्ज हो तो चौंकना लाजमी है। जी हां ऐसा उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में है, जहां पाकिस्तान में रह रहे लोगों के नाम कानपुर देहात की जमीन उनके नाम पर लिखी हुई है।
कानपुर देहात के बारा गांव में इस जमीन को भारतीय नागरिक नहीं बल्कि पाकिस्तान में रह रहे करामत अली के पुत्रों असलम खां व नियाज अहमद और हनीफ के पुत्रों शराफत अली व जमील अहमद खां के नाम कागजों में लिखी है। ये हम नहीं कह रहे बल्कि सरकारी दस्तावेज कह रहे हैं।
सरकारी दस्तावेजों में दर्ज भूस्वामी का नाम और निवास स्थान के कॉलम को इसमें भारत कि जगह पाकिस्तान का नाम दर्ज है, ये दस्तावेज पाकिस्तान के नहीं बल्कि यूपी के कानपुर देहात जिले की अकबरपुर तहसील के बारा गांव के हैं। खाता संख्या 1109, खाता संख्या 83 के अभिलेख हैं।
देश छोड़ पाकिस्तान जा चुके ये लोग
हैरत की बात ये नहीं कि ये लोग पाकिस्तान के रहने वाले है। खास बात ये है कि अरसा पहले मुल्क छोड़ चुके यह लोग आज भी यहां NH-2 के पास करोड़ों कि जमीन के मालिक बने बैठे हैं। ताजा रैवन्यू रिकॉर्ड के अनुसार देश के नाम के स्थान पर पाकिस्तान का नाम दर्ज है।
लोगों ने उनकी जमीन पर किया कब्जा
सरहदों का बंटवारा होने के बाद ही यहां के रहने वाले असलम खां, नियाज अहमद, शराफत अली, जमील अहमद खां पाकिस्तान चले गए थे। वहीं जाकर वे बस गये, बंटवारे के बाद उनका यहां आना जाना भी नहीं हुआ। यह भी नहीं मालूम कि सभी लोग अब जीवित भी है कि नहीं, लेकिन उनकी जमीन लावारिस पड़ी है। अन्य लोगों ने उनकी जमीनों पर कब्जा कर लिया है।
की जा रही है कार्रवाई
एडीएम प्रशासन जेपी गुप्ता के बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला अधिकारी के माध्यम से पत्र भारत के शत्रु अधिकारी ब्रिगेडियर अर्बिंदम को लिखा गया था।वहां से जिलाधिकारी से पत्र द्वारा बारा गांव के निवासियों की पाकिस्तान जाने की तिथि मांगी गई है। इसके लिए एसडीएम अकबरपुर को पत्र लिखा गया है। अभी तक पाकिस्तान जाने की तारीख तस्दीक न होने पर 13 सितंबर को फिर से एसडीएम को रिमाइंडर भेजा गया है, लेकिन अभी तक उधर से कोई जवाब नही आया है। जिसका प्रशासन को इंतजार है।।