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वाराणसी में 100 करोड़ रुपये में बनेगा शंकर नेत्रालय, चातुर्मास के बाद कांची मठ शंकराचार्य अयोध्या रवाना हुए,,,।

वाराणसी में 100 करोड़ रुपये में बनेगा शंकर नेत्रालय, चातुर्मास के बाद कांची मठ शंकराचार्य अयोध्या रवाना हुए,,,।

कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य शंकर विजयेंद्र सरस्वती ने कहा कि शंकर नेत्रालय का 17वां केंद्र वाराणसी में 2024 में अपनी सेवाएं देना शुरू कर देगा। 100 करोड़ रुपये की लागत से तुलसी पट्टी हरिहरपुर रिंग रोड फेज वन में बनने वाले अस्पताल से शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा।आंखों के इलाज के लिए दूर-दराज नहीं भटकना होगा।

काशी में सौ दिनों का चातुर्मास पूर्ण करने के बाद शंकराचार्य बुधवार को अयोध्या के लिए रवाना हो गए। इससे पहले शंकराचार्य ने शंकर नेत्रालय के निर्माण कार्य का जायजा लिया। शंकराचार्य ने कहा कि "सर्व इंद्रियांणांम नैनम प्रधानम" अर्थात सभी इंद्रियों में आंख प्रमुख है हम संसार को इसके द्वारा ही देखते हैं। इसलिए इसे ठीक रखना जरूरी है।

कोयंबटूर में एक छोटे से कमरे में शुरू हुआ था शंकर नेत्रालय

इसी बात को ध्यान में रखकर श्री कांची मठ की ओर से वर्ष 1974 में नेत्र चिकित्सा सेवा के लिए कोयंबटूर में एक छोटे से कमरे में यह सेवा कार्य प्रारंभ किया था । नेत्र चिकित्सा सेवा कार्य का विस्तार इस समय भारत के 13 राज्यों में 16 केंद्रों के द्वारा किया जा रहा है। 17 वां केंद्र वाराणसी में खुलने जा रहा है।

शंकराचार्य 100 दिनों तक लघु भारत काशी में चातुर्मास करने के बाद अयोध्या के लिए रवाना हो गए। अयोध्या में वह नवरात्र तक अपने आराध्य भगवान श्रीराम के धाम में हाजिरी लगाएंगे और विश्व कल्याणार्थ वसुधैव कुटुंबकम के लिए सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया की प्रार्थना करेंगे।

15 जुलाई को काशी आए थे शंकराचार्य

शंकराचार्य के अयोध्या रवाना होने से पूर्व कांची मठ में काशीवासियों की ओर से कुंवर अनंत नारायण सिंह ने अपने पुत्र के साथ चरण पादुका पूजन किया। शंकराचार्य 15 जुलाई की शाम सड़क मार्ग से प्रयागराज से काशी आए थे। 

शंकराचार्य शंकर विजयेंद्र सरस्वती महाराज ने इस दौरान यहां मां गंगा, बाबा विश्वनाथ, काल भैरव, श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर में पूजन अर्चन किया। गोपाल मंदिर में मत्था टेककर रामनगर किला गए और वहां काले स्वरूप में विराजमान हनुमान जी का दर्शन किया। शूलटंकेश्वर, सांग्वेद विद्यालय, वेदव्यास मंदिर में वट वृक्ष का पूजन अर्चन किया।