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2024 मकर संक्रांति पर इन पवित्र घाटों पर करें गंगा स्नान, पूरी होगी मनोकामना, जाने संक्रांति पर्व की कथा, महात्म व स्नान फल,,,।

2024 मकर संक्रांति पर इन पवित्र घाटों पर करें गंगा स्नान, पूरी होगी मनोकामना, जाने संक्रांति पर्व की कथा, महात्म व स्नान फल,,,।

Makar Sankranti 2024: हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक मकर संक्रांति इस साल 15 जनवरी 2023 को मनाई जाएगी। मकर संक्रांति को भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इस त्यौहार को उत्तर पूर्व में खिचड़ी, गुजरात में उत्तरायण और दक्षिण भारत में पोंगल कहा जाता है। संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रांति के दौरान गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है।

क्या है मकर संक्रांति की धार्मिक मान्यताएं 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान करने से सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं। इस धार्मिक मान्यता से जुड़ी एक कहानी भी प्रचलित है। इसी मान्यता के आधार पर लोग मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी या गंगा सागर में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं। इस दिन सभी गंगा घाटों पर भीड़ होती है। अगर आप भी मकर संक्रांति के दिन डुबकी लगाना चाहते हैं तो इन खास जगहों पर गंगा में डुबकी लगाने का दोगुना मजा ले सकते हैं। 

प्रयागराज

प्रयागराज संगम सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। मकर संक्रांति के दिन प्रयागराज में संगम पर शाही स्नान होता है। इस स्थान को संगम इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह तीन पवित्र नदियों गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम है। प्रयागराज में संगम तट पर कुम्भ मेले का भी आयोजन होता है। सन 2025 में यहां पर महाकुंभ का आयोजन होगा। जिसकी तैयारियां राज्य सरकार द्वारा जोर-जोर से की जा रही है।

वाराणसी 

काशी भगवान शिव की प्रिय नगरी है। काशी में ज्योतिर्लिंग बोलेनाथ विद्यमान हैं। बनारस के गंगा घाट काफी प्रसिद्ध और लोकप्रिय हैं। वैसे देखा जाए तो वाराणसी के 85 घाटों पर स्नान के लिए भारी भीड़ लगेगी, लेकिन दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, केदारघाट, पंचगंगा घाट, नमो घाट, बालाजी घाट, गायघाट, प्रहलादघाट,और सिंधियाघाट पर विशेष रूप से स्नानपर्व पर भारी भीड़ देखी जाती है। मकर संक्रांति के इन दिन गंगा घाटों पर प्रमुखरूप से स्नान किया जाता है। 

गंगा स्नान करने के बाद लोग दानपुण्य भी करते हैं और इस दिन काशी विश्वनाथ मंदिर में खिचड़ी महोत्सव भी आयोजित किया जाता है। और प्रसाद के रूप में सभी श्रद्धालु गानों में खिचड़ी वितरित की जाती है। साथ ही मकर संक्रांति के पर्व पर अगर पतंगबाजी का जिक्र ना किया जाए तो यह बेईमानी होगी। पूरे प्रदेश में पतंगबाजी की धूम मच जाती है, और आज ही से पतंग का उड़ना प्रारंभ होता है। कई जगहों पर तो प्रसिद्ध पतंगबाजी प्रतियोगिता भी होती है। अब हम आपको मकर संक्रांति की कथा बताते हैं.....।

पौराणिक ग्रंथ के अनुसार मकर सक्रांति की कथा

शिव पुराण समेत कुछ धार्मिक पुस्तकों में गंगा अवतरण की कथा है। पौराणिक कथा के अनुसार, इक्ष्वाकु वंश के राजा सगर अपने धर्म पुण्य कार्यों के लिए प्रसिद्ध थे। एक बार उन्होंने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया तो देवराज इंद्र ने उस यज्ञ के अश्व को चुराकर कपिल मुनि के आश्रम के पास बांध आए। राजा सगर ने अपने पुत्रों को उस घोड़े की खोज में लगा दी।

वे लोग अश्वमेध यक्ष के घोड़े को खोजते हुए कपिल मुनि के आश्रम पहुंच गए। उनको वह घोड़ा वहीं पास में बंधा हुआ दिखाई दिया। राजा सगर के पुत्रों ने कपिल मुनि पर अश्व चोरी करने का आरोप लगाया। इस बात से मुनि क्रोधित हो गए क्योंकि आरोप झूठा था। उन्होंने क्रोध में आकर राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को अपने श्राप से भस्म कर दिया। इस घटना से आहत राजा सगर कपिल मुनिक के आश्रम आए और उनसे क्षमा प्रार्थना की।

कपिन मुनि ने कहा कि अब तो श्राप वापस नहीं हो सकता, लेकिन इन संतानों के मोक्ष के लिए गंगा को पृथ्वी पर लाना होगा। राजा सगर के वंशज राजा भागीरथ ने अपने कठोर तप से मां गंगा को प्रसन्न किया। मां गंगा ब्रह्म देव के कमंडल से निकलकर भगवान शिव की जटाओं से होती हुई पृथ्वी पर अवतरित हुईं। राजा सगर मां गंगा को कपिल मुनि के आश्रम लेकर आए, जहां उनके स्पर्श मात्र से ही राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को मोक्ष मिल गया। उनके पाप नष्ट हो गए।

कहा जाता है कि जिस दिन मां गंगा ने राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को मोक्ष प्रदान किया, उस दिन मकर संक्रांति थी। इस वजह से हर साल मकर संक्रांति पर गंगा स्नान करते हैं। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर गंगा जल अमृत के समान लाभकारी हो जाता है। इस वजह से लोग गंगा स्नान करते हैं। एक लोक मान्यता के अनुसार गंगासागर में मकर संक्रांति के अवसर पर स्नान करने का अपना अलग ही महत्व है। कहा जाता है कि*सारे तीरथ बार-बार गंगासागर एक बार" इसलिए बड़े भाग्य से लोगों को मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा सागर स्नान करने का पुण्य मिलता है।

डिस्क्लेमर :: उपरोक्त लेख में पौराणिक ग्रंथ  के अनुसार मकर संक्रांति के पर्व पर "केसरी न्यूज़ नेटवर्क" द्वारा प्रस्तुत किया गया है। पाठकगढ़ कृपया इसे धार्मिक ग्रंथ भक्ति के रूप में अपने जीवन में ग्रहण करें।