वाराणसी :: फाइलेरिया मुक्त अभियान जंग में रोड़ा बन गए हैं, जैतपुरा पीएचसी व चोलापुर ब्लॉक, अब दोनो जगह शुरू होगा अभियान,,,।
वाराणसी :: चोलापुर ब्लॉक और शहरी क्षेत्र का जैतपुरा वार्ड जिले को फाइलेरिया मुक्त अभियान बनाने में रोड़ा बन रहा है। दोनों जगह फाइलेरिया का प्रसार एक फीसदी ज्यादा है। अब फरवरी में दोनों क्षेत्रों में घर-घर स्क्रीनिंग कर परिवार के एक-एक सदस्य को ट्रिपल ड्रग थेरेपी दी जाएगी। चोलापुर में 2.81 लाख और जैतपुरा में 66200 लोगों को दवा खिलाई जाएगी।
फाइलेरिया उन्मूलन के तहत जिले में ट्रांसमिशन असेस्मेंट सर्वे (टास) हुआ है. सभी पीएचसी और सात ब्लॉक में फाइलेरिया का प्रसार नहीं है। आठवें ब्लॉक चोलापुर और जैतपुरा में प्रसार दर एक फीसदी से ज्यादा मिली है। उन क्षेत्रों में किसी एक को फाइलेरिया होता है तो उससे दूसरों में फैलने की संभावना है।
जिला मलेरिया अधिकारी शरदचंद्र पांडेय ने बताया कि इन दोनों क्षेत्रों में ट्रिपल ड्रग थेरेपी में आइवेर्मेक्टिन, डीईसी और एल्बेण्डाजोल (आईडीए) दवा खिलाई जाएगी। ये दवाएं दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गम्भीर रूप से बीमार व्यक्तियों को नहीं दी जाएंगी।
दिव्यांग बना सकता है रोग बायोलॉजिस्ट डॉ. अमित कुमार सिंह ने कहा कि फाइलेरिया मच्छर जनित रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसे लिम्फोडिमा (हाथी पांव) भी कहा जाता है। इससे पैरों व हाथों में सूजन, पुरुषों में हाइड्रोसील और महिलाओं के स्तन में सूजन की समस्या आती है। परजीवी (पैरासाइट) संक्रमण फैलने के बाद इसके लक्षण 5 से 10 साल में दिखाई देते हैं। शुरू में दवा से रोग को रोका जा सकता है। यह न सिर्फ व्यक्ति को दिव्यांग बनाता है बल्कि मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
ऐसे करें बचाव
● मच्छरदानी का प्रयोग करें।
● घर के आसपास व अंदर सफाई रखें, पानी जमा न होने दें।
● रूके हुए पानी में कीटनाशक, जला हुआ मोबिल ऑयल या डीजल डालें।