लखनऊ :: अलीगंज के 242 साल पुराने हनुमान मंदिर में खिला अनोखा फूल, बना आकर्षण का केंद्र, देखने को उमड़ रही भारी भीड़, देखें फोटोज
हनुमान मंदिर के सचिव और भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी राजेश पांडे ने पारिजात वृक्ष के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि, ' समुद्र मंथन के 14 रत्नों में पारिजात वृक्ष भी शामिल है। इस वृक्ष की उत्पत्ति को लेकर कहा जाता है कि इसे स्वर्ग से लाकर धरती पर लगाया गया था।
पारिजात का ये वृक्ष मंदिर परिसर में काफी समय से लगा हुआ है। लेकिन पहली बार साल 2023, मई के महीने में इस वृक्ष में फूल हमने देखे थे। जानकारों के मुताबिक इस वृक्ष में फूल खिलने का महीना नवंबर होता है। ऐसे में मई के महीने में वृक्ष से फूल की उत्पत्ति के कारण श्रद्धालु इसे देखने के लिए मंदिर आ रहे हैं।'
मंदिर सचिव ने बताया पारिजात वृक्ष का महत्व
उन्होंने आगे कहा कि, 'पारिजात वृक्ष की अनोखी बात ये है कि इस वृक्ष में रात के समय ही फूल खिलते हैं। लेकिन सुबह होते होते ये फूल स्वर्णिम हो जाता है। दोपहर के वक्त ये फूल मुरझा जाता है। जानकार बताते हैं कि इसके फूलों को तोड़ा नहीं जाता है। बीते वर्ष धनतेरस के मौके पर वृक्ष में लगे 151 फूलों को हमने माता लक्ष्मी को चढ़ाया था। ज्येष्ठ के मंगलवार में श्रद्धालुओं की भारी संख्या मंदिर में भगवान के दर्शन करने के लिए आती है। ऐसे में जैसे इस वृक्ष का प्रचार होगा, श्रद्धालुओं की संख्या उतनी ही बढ़ेगी।'
मंदिर सचिव राजेश पांडे ने कहा, 'पारिजात के ये पेड़ प्रदेश में कई जगह लगे हुए हैं, लेकिन पुष्प निकलने की बात कहीं से सामने नहीं आई है। यहां क्योंकि मंदिर है और श्रद्धालु आते रहते हैं तो इस वजह से लोगों ने इसपर ध्यान दिया है। खुशी की बात है कि ये तीसरा साल है, जब वृक्ष में से पुष्प लगातार निकल रहे हैं। अब इसे भगवान की कृपा ही कह सकते हैं।
क्योंकि ये मंदिर 6 मई 1787 में निर्मित हुआ था। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेड़ के पास नल लगाया गया है, ताकि लोग उसमें पानी डाल सके. मंदिर में लगे पारिजात वृक्ष को लेकर लोगों में काफी श्रद्धा है।'