Bihar Voter List: मतदाता सूची से हटाए जाएंगे 35 लाख नाम, बिहार चुनाव से पहले EC का बड़ा फैसला...
ब्यूरो, नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए चलाए जा रहे विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान के बीच चुनाव आयोग ने सोमवार को एक और बड़ा दावा किया है और कहा कि राज्य के करीब 17.38 लाख मतदाता स्थाई रूप से दूसरी जगहों पर स्थानांतरित हो गए है, जिनकी संख्या राज्य के कुल मौजूदा 7.90 करोड़ मतदाताओं का 2.2 प्रतिशत है।वहीं, मतदाता सूची में मौजूद करीब 12.56 लाख (1.59 प्रतिशत) मतदाताओं के मृत और करीब 5.76 लाख (0.73 प्रतिशत) मतदाताओं के नाम दो जगह से दर्ज पाए गए है। इन सभी के नाम अब एक अगस्त को प्रकाशित होने वाली मतदाताओं की प्रारूप सूची में दर्ज नहीं होंगे।
88 प्रतिशत मतदाताओं के गणना का काम पूरा
चुनाव आयोग ने जारी किए गए अपने एक बयान में बताया है कि सोमवार शाम तक राज्य के कुल 7.90 करोड़ मतदाताओं में से 6.60 करोड़ मतदाताओं ने अपने गणना फार्म जमा कर दिए है, जो कुल मतदाताओं का करीब 83.66 प्रतिशत है। ऐसे में राज्य से स्थानांतरित हो चुके, मृत हो चुके और दो जगहों से नाम दर्ज कराने वाले मतदाताओं को जोड़ दें अब तक करीब 88.18 प्रतिशत मतदाताओं के गणना का काम पूरा हो चुका है।
गणना फार्म जमा के लिए अभी बाकी हैं 11 दिन
अब सिर्फ 11.82 प्रतिशत मतदाताओं के गणना फार्म आना बाकी है। वहीं, मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान के तहत गणना फार्म जमा करने की अंतिम तारीख में अभी 11 दिन का समय बाकी है। आयोग की ओर से घोषित किए गए पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत मतदाता 25 जुलाई तक वह अपने गणना फार्म जमा करा सकते है।
आयोग के मुताबिक इस बीच शहरी क्षेत्रों के प्रत्येक मतदाताओं तक पहुंचने के लिए बचे 11 दिनों में एक अभियान भी चलाया जाएगा। इन दौरान सभी 261 नगरीय निकायों के 5683 वार्डों में विशेष कैंप लगाए जाएंगे। आयोग का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र मतदाता गणना फार्म जमा करने से छूटे नहीं है।
इन लोगों का नाम वोटर लिस्ट से कट जाएगा
आयोग के मुताबिक शिफ्ट हो गए मतदाताओं के साथ मृत मतदाताओं व दो जगह से नाम दर्ज कराने वाले मतदाताओं के नाम अब एक अगस्त को प्रकाशित होने वाली मतदाता प्रारूप सूची से हटा दिया जाएगा। इस बीच करीब 5.74 करोड़ मतदाताओं के भरे हुए गणना फार्म ऑनलाइन अपलोड भी कर दिया गया है।
गौरतलब है कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण में करीब एक लाख बूथ लेवल आफीसर (बीएलओ) लगाए गए है। जबकि इस अभियान को बाहर से राजनीतिक दलों से जुड़े 1.50 लाख बूथ लेवल एजेंट सहयोग दे रहे है।