अध्यक्ष खोज रही थी BJP, इस बीच उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दे दिया इस्तीफा, केंद्र सरकार में बहुत बड़े बदलाव के आसार...
नईदिल्ली, ब्यूरो। मांनसूत्र सत्र की शुरुआत उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे से हुई। उन्होंने सोमवार शाम स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अब माना जा रहा है कि उनके कदम सरकार के अलावा भारतीय जनता पार्टी में भी बड़े बदलावों की संभावनाएं हैं। दरअसल, धनखड़ ने पद ऐसे समय पर छोड़ा है जब भाजपा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश में जुटी हुई है।
उपराष्ट्रपति का पद रिक्त होने के बाद भाजपा के पास दो काम आ गए हैं। पहला तो नए अध्यक्ष का चुनाव और दूसरा उपराष्ट्रपति को चुनना जहां, NDA सरकार में शामिल अन्य दलों को भी साथ लेकर चलना अहम होगा।
उपराष्ट्रपति पद के लिए भाजपा को ऐसे उम्मीदवार की तलाश होगी, जिसे संवैधानिक जिम्मेदारियां संभालने का अनुभव और क्षमता हो। खास बात है कि 2029 से पहले एक देश एक चुनाव जैसे बड़े बिल लाए जाने की संभावनाएं हैं। ऐसे में राज्यसभा अध्यक्ष की भूमिका सरकार और भाजपा के भविष्य का एजेंडा के खिलाफ काफी अहम हो जाती है।
कैसे उम्मीदवार की तलाश
पार्टी अध्यक्ष पद के लिए पार्टी को ऐसे उम्मीदवार की तलाश है, जो 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशा तय करने में मददगार हो। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार की उपलब्धियों को भी आगे बढ़ा सके।
कैबिनेट विस्तार के आसार
इन हालात को देखते हुए मंत्रिमंडल में विस्तार की भी चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। हालांकि, इसे लेकर सरकार ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। वहीं, कुछ मौजूदा मंत्रियों को नए पदों पर भेजा जा सकता है। इसके चलते सरकार और पार्टी दोनों में ही बड़े स्तर पर बदलाव होंगे।
खास बात है कि हाल ही में RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने 75 साल की उम्र को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी थीं। विपक्षी दलों के नेता दावा कर रहे थे कि यह पीएम मोदी के लिए संदेश है। इधर, धनखड़ मई में 74 साल के हुए थे।
जल्द कराने होंगे चुनाव
संविधान के अनुच्छेद 68 के खंड दो के अनुसार, उपराष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या उन्हें पद से हटाए जाने या अन्य किसी कारण से होने वाली रिक्ति को भरने के लिए चुनाव, रिक्ति होने के बाद 'यथाशीघ्र' आयोजित किया जाएगा। रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति 'अपने पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक' पद धारण करने का हकदार होगा।
संविधान में इस पर कुछ नहीं कहा गया है कि उपराष्ट्रपति की मृत्यु या उनके कार्यकाल की समाप्ति से पहले त्यागपत्र देने की स्थिति में, या जब उपराष्ट्रपति भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं, तो उनके कर्तव्यों का निर्वहन कौन करेगा।