वाराणसी जिला महेशपुर क्षेत्र में - गलियों में गंदे पानी का 'तालाब', नल में आ रहा सीवर की गंदगी धृतराष्ट्र बना नगर निगम, सीएम हेल्पलाइन भी...
वाराणसी। जिले के महेशपुर में धर्मी कॉलोनी के निवासी नारकीय जीवन जी रहे हैं। गलियां सीवर के गंदे पानी से जैसे 'तालाब' बन गई हैं। नलों में बदबूदार पानी आ रहा है। चारों तरफ कूड़े के ढेर हैं। महीनों से न फागिंग हुई, न कूड़ा उठा। बच्चे बीमारियों से जूझ रहे हैं। टूटे नालों, अंधेरी गलियों में हर समय खतरा रहता है। गैस पाइपलाइन बिछाने से सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। यहां के लोग सीएम पोर्टल पर शिकायत के साथ ही साथ मेयर का भी दरवाजा खटखटाए चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई हैं। बुनियादी सुविधाओं से त्रस्त महेशपुर स्थित धर्मी कॉलोनी के निवासियों को यह सूझ नहीं रहा कि वे अपनी शिकायतें किससे करें।
उन्होंने 'Media' से बातचीत में कॉलोनी के हालात बताए। घनश्याम गुप्ता, संजू चौहान ने कहा कि कॉलोनी में सीवर चोक होने के कारण हर तरफ गंदा और बदबूदार पानी जमा है। घरों के बाहर, गलियों में और सामने के खाली प्लाटों में सीवर का दूषित पानी भरा हुआ है। जलजमाव की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि सीवर का दूषित पानी कई घरों के दरवाजे की चौखट पारकर अंदर तक घुस रहा है। लोगों को अपने घरों के प्रवेश द्वार पर ईंटें लगानी पड़ रही हैं ताकि गंदा पानी भीतर न आ सके। हम गंदे पानी में कैद होकर रह गए हैं।
यह सिर्फ बारिश का पानी नहीं, बल्कि शौचालयों और नालियों का गंदा पानी है, जो हमारे घरों के सामने जमा है। बदबू से सांस लेना मुश्किल है। रात-दिन मच्छरों का प्रकोप रहता है। मलौ देवी, संजू चौहान ने कहा कि जलजमाव और गंदगी के कारण कॉलोनी में बीमारियां फैल रही हैं। कई लोग रोगों से पीड़ित हो चुके हैं। नगर निगम और जलकल विभाग को समस्या से अवगत कराया है, लेकिन किसी भी तरफ से स्थायी समाधान नहीं मिल पाया है।
निवासियों ने कहा कि समस्या हल कराने के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल, नगर निगम और यहां तक कि मेयर को शिकायतें की गई हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। कई लोगों ने शिकायतें मुख्यमंत्री पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज कराईं, जहां से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद होती है। लेकिन बिना किसी हस्तक्षेप व कार्य किए बिना ही पोर्टल पर निस्तारण लिख दिया गया।
बढ़ रहा है मच्छरों का प्रकोप
इंदू गिरि, ललिता ने कहा कि सीवर चोक और जलजमाव की समस्या से जूझ रहे लोगों की मुश्किलें अब मच्छरों के प्रकोप से कई गुना बढ़ गई हैं। नगर निगम या स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरों पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। ओमप्रकाश गिरि ने कहा कि कॉलोनी में फागिंग नहीं होती। दिन हो या रात, मच्छरों के झुंड चैन से नहीं रहने देते। शाम होते ही घर से निकलना मुश्किल हो जाता है।
मच्छरों और चारों ओर फैली गंदगी से कॉलोनी में बीमारियों ने अपने पैर पसार लिए हैं। लगभग हर घर में कोई न कोई सदस्य वायरल बुखार, पेट संबंधी संक्रमण या त्वचा रोगों से पीड़ित है। पाइप लाइन से सीवर का रिसाव आदित्य कुमार सिंह ने कहा कि कॉलोनी में जल निगम द्वारा बिछाई गई पीने के पानी की पाइपलाइन ध्वस्त हो चुकी है। घरों के नलों में पीने का दूषित, बदबूदार और सीवर मिश्रित पानी आ रहा है। एक तरफ गलियों में सीवर का गंदा पानी भरा हुआ है, दूसरी तरफ लोगों को वही दूषित पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है।
कॉलोनी के निवासियों के लिए दोहरी मार बन गया है। दिलीप श्रीवास्तव ने कहा कि कॉलोनी की पुरानी और टूटी पेयजल पाइप लाइनें ओवरफ्लो सीवर के गंदे पानी के संपर्क में आ गई हैं। जल आपूर्ति शुरू होते ही, ये पाइप लाइनें दूषित पानी खींच लेती हैं। नलों से आने वाले पानी का रंग मटमैला है। तेज दुर्गंध भी आती है। यह पानी पीने लायक नहीं है।
डोर-टू-डोर कूड़ा उठान नहीं होता
वीके उपाध्याय ने कहा कि कूड़े की गाड़ी रोजाना नहीं आती है। डोर-टू-डोर कूड़ा उठान की सुविधा भी प्रभावी रूप से लागू नहीं है। कूड़ा उठाने की अनियमित व्यवस्था के कारण कॉलोनी के निवासियों को मजबूरन अपने घरों का कचरा सामने के खाली प्लाटों में फेंकना पड़ रहा है। इन प्लाटों में अब कूड़े के ढेर लग गए हैं, जो दुर्गंध और बीमारियों के स्रोत बन गए हैं।
संजू चौहान ने कहा कि खाली प्लाट अब अनधिकृत डंपिंग ग्राउंड बन चुके हैं। कूड़े के कारण चूहों, मक्खियों और अन्य कीटों का प्रकोप बढ़ गया है। लोगों ने सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाने, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन नियमित करने, खाली प्लाटों कचरा हटाने की मांग की है।
पर्याप्त लाइट का अभाव
डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि कॉलोनी के मुख्य मार्गों और गलियों में कुछ ही स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें लगी हैं। अपर्याप्त स्ट्रीट लाइटिंग के कारण कॉलोनी में शाम ढलते ही असुरक्षा का माहौल बन जाता है। आपराधिक गतिविधियां बढ़ने की आशंका रहती है। महिलाओं और बच्चों का रात में घर से निकलना मुश्किल हो गया है। दीपक गुप्ता ने कहा कि जलजमाव और गड्ढों वाली सड़कों पर अंधेरे के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। रात में कहीं आने-जाने में डर लगता है। ऐसा लगता है जैसे हम किसी पिछड़े गांव में रह रहे हैं। स्ट्रीट लाइटें किसी भी शहरी क्षेत्र की सबसे मूलभूत आवश्यकता होती हैं।
गैस पाइप के गड्ढे बने तालाब
अभिषेक, विकास गुप्ता ने कहा गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदे गए गड्ढे बिना भरे छोड़ दिए गए हैं। गैस वितरण कंपनी द्वारा पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कें वैसी की वैसी पड़ी हैं। इन खुले गड्ढों को भरा नहीं गया है। इनमें कॉलोनी का गंदा पानी भर जाता है। ये गड्ढे बारिश के बाद पानी से भरकर मिनी तालाब का रूप ले लेते हैं। प्रखर ने कहा कि कॉलोनी की सड़कें उबड़-खाबड़ हो चुकी हैं। पैदल चलना और वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। कई स्थानों पर खुले नालों के ढक्कन टूट गए हैं या वे अपनी जगह से हट चुके हैं।
जिम्मेदार 'धृतराष्ट्र' बन गया है सिस्टम
कॉलोनी की समस्याओं के समाधान के लिए कई बार नगर आयुक्त से मुलाकात की गई है। इस दुर्दशाग्रस्त क्षेत्र का शिवपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक और कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने भी दौरा किया था। इसके बावजूद सिस्टम धृतराष्ट्र बना हुआ है।
- राजेश कनौजिया, पार्षद-मंडुवाडीह वार्ड एक नजर में - 27 वर्ष पहले बसी धर्मीपुर कॉलोनी - 15 सालों से सीवर चोक की समस्या है -800 के आसपास है कॉलोनी की आबादी -100 के आसपास मकान बने हैं।