Headlines
Loading...
राजधानी में दलित बुजुर्ग को पेशाब चटवाने पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक सख्त, बोले- दोषियों के विरुद्ध होगी कड़ी कार्रवाई...

राजधानी में दलित बुजुर्ग को पेशाब चटवाने पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक सख्त, बोले- दोषियों के विरुद्ध होगी कड़ी कार्रवाई...

राजधानी लखनऊ में दलित बुजुर्ग को पेशाब चटवाने के मामले में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सख्ती दिखाई है। उन्होंने कहा, मामले की जांच शुरू कर दी गई है। दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। डिप्टी सीएम पाठक ने कहा, सरकार ऐसी घटनाओं को लेकर संवेदनशील है और दलितों, गरीबों और वंचितों के साथ मजबूती से खड़ी है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गहन जांच की जा रही है। पुलिस ने बताया कि यह घटना 20 अक्टूबर को हुई थी, जब काकोरी थाना इलाके के पुराने बाजार इलाके में शीतला मंदिर के पास एक बुजुर्ग दलित व्यक्ति रामपाल (60) को कथित तौर पर जमीन चाटने के लिए मजबूर किया गया, क्योंकि उस पर वहां पेशाब करने का आरोप था।

आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इस कृत्य की निंदा करते हुए इसे जाति-आधारित मानसिकता का शर्मनाक प्रदर्शन बताया। आज़ाद ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, यह सिर्फ़ एक अपराध नहीं, बल्कि जातिवाद व सामंतवाद की वर्षों पुरानी दलित विरोधी मानसिकता का नंगा प्रदर्शन है। आरोपी आरएसएस कार्यकर्ता ने न सिर्फ़ बुज़ुर्ग व्यक्ति को जातिवादी गालियां देकर अपमानित किया, बल्कि उन्हें ज़मीन चाटने पर भी मजबूर किया।" उन्होंने अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून के तहत आरोपी को गिरफ़्तार करने और पीड़ित के लिए सरकारी सुरक्षा और मुआवज़ा की मांग की। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य ने आरोप लगाया, भाजपा राज में दलित होना जुर्म हो गया है।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, किसी की भूल का अर्थ ये नहीं कि उसे अपमानजनक अमानवीय सज़ा दी जाए। परिवर्तन ही परिवर्तन लाएगा! इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता ने एक बुजुर्ग दलित व्यक्ति को अपना पेशाब चाटने पर मजबूर किया। बुजुर्ग व्यक्ति एक मंदिर प्रांगण में बैठा था, तभी बीमारी के कारण उसने गलती से पेशाब कर दिया।

गुस्साए संघ कार्यकर्ता ने मौके पर पहुंचकर उसे जातिसूचक गालियां दीं और पेशाब चाटने पर मजबूर किया। हालांकि, पुलिस ने कहा कि आरोपी का संघ से कोई संबंध नहीं है। कांग्रेस ने पोस्ट में कहा, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित उत्तर प्रदेश में हुई यह घटना मानवता पर कलंक है। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। यह घटना आरएसएस-भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता का प्रतीक है। दलितों के प्रति नफरत उनके खून में है। इसीलिए वे संविधान को खत्म करके देश में 'मनुवाद' लागू करना चाहते हैं, ताकि वे जाति के आधार पर लोगों का शोषण कर सकें।" आरोपी स्वामी कांत उर्फ पम्मू को गिरफ्तार कर लिया गया है। रामपाल के पोते मुकेश कुमार ने दावा किया कि उनके दादा को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और उनका खांसते समय गलती से पेशाब निकल गया था। मुकेश कुमार ने कहा, मेरे दादाजी को सांस लेने में तकलीफ है। अगर वह दवाइयां नहीं लें तो शायद उनकी जान नहीं बच पाएगी।

कल शाम उन्हें खांसी आने लगी और इसी दौरान उन्हें थोड़ा पेशाब निकल गया। इसके बाद पम्मू वहां आया और मेरे दादाजी को जातिसूचक शब्द कहने लगा।" मुकेश कुमार ने बताया कि इससे उसके दादा डर गए और जब उन्हें पेशाब चाटने को कहा गया तो उन्होंने उसे चाट लिया। इसके बाद, आरोपी ने रामपाल से उस जगह को धोने को कहा और रामपाल ने तालाब के पानी से उस जगह को धोया। मुकेश ने कहा, मेरे दादाजी ने रात में परिवार में किसी को भी इस घटना के बारे में नहीं बताया। उन्होंने आज घटना के बारे में बताया जिसके बाद हमने पम्मू के खिलाफ मामला दर्ज कराया। मुकेश ने यह भी बताया कि मुख्य मंदिर उस जगह से कम से कम 40 मीटर की दूरी पर है जहां उसके दादा ने गलती से पेशाब किया था। शिकायत में पीड़ित रामपाल रावत ने कहा कि वह सोमवार शाम शीतला माता मंदिर में पानी पी रहे थे, तभी स्वामी कांत उर्फ पम्मू आया और उनपर पेशाब करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, "मैंने कहा कि मैंने पेशाब नहीं किया है, वहां पानी गिर गया है। लेकिन वह नहीं माना और मुझे जातिसूचक शब्द कहे। उसने मुझे धमकाया और मुझे जमीन चाटने पर मजबूर किया। स्वामी कांत उर्फ पम्मू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता धारा 115(2) (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 351(3) (आपराधिक धमकी) और 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सूत्रों ने यह पूछे जाने पर कि क्या दलित व्यक्ति को वाकई पेशाब चाटने के लिए मजबूर किया गया था, तो उन्होंने बताया, यह जांच का विषय है। पीड़ित यह बात कह रहा है जबकि आरोपी कह रहा था कि उसे पेशाब चाटने के लिए नहीं बल्कि छूने के लिए मजबूर किया गया था। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।