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Chhath In South Korea : दक्ष‍िण कोर‍िया में गूंजे छठी मैया के गीत, किया एक ड‍िग्री तापमान में कठ‍िन व्रत का आयोजन...

Chhath In South Korea : दक्ष‍िण कोर‍िया में गूंजे छठी मैया के गीत, किया एक ड‍िग्री तापमान में कठ‍िन व्रत का आयोजन...


वाराणसी/सियोल। ब‍िहार और पूर्वांचल का प्रमुख छठ महापर्व का उत्सव अब वैश्‍वि‍क हो चला है। कठ‍िन पर‍िस्‍थ‍ित‍ियों में भी परंपराओं के छठ पर्व का आयोजन व‍िदेशों में भी क‍िया जा रहा है। दक्षि‍ण कोर‍िया में इन द‍िनों खूब ठंड पड़ रही है। लेक‍िन, भारतीय दूतावास की उप मिशन प्रमुख की पत्नी ने कठ‍िन हालातों में भी छठ व्रत की परंपरा का दूसरे देश में भी न‍िर्वहन कर म‍िसाल दी है।

दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल के हान नदी के तट पर छठ महापर्व का आयोजन पर‍िवार ने धूमधाम से किया। इस अवसर पर भारतीय दूतावास में उप मिशन प्रमुख के पद पर कार्यरत पटना न‍िवासी निशिकांत सिंह की प्रतापगढ़ की न‍िवासी पत्नी शालिनी स‍िंंह ने इस पवित्र पर्व का व्रत किया। छठ महापर्व, जो मुख्यतः बिहार और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है, सूर्य देवता और छठी माई की पूजा का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

शालिनी स‍िंंह ने इस पर्व के दौरान पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार व्रत किया। उन्होंने स‍ियोल में सूर्य को अर्घ्य देने के लिए हान नदी के किनारे विशेष तैयारी की। इस अवसर पर उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर पूजा-अर्चना की और छठ महापर्व की महत्ता को साझा किया। उन्‍होंने बताया कि यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में एकता और भाईचारे का भी संदेश देता है।

छठ महापर्व के दौरान, श्रद्धालु विशेष रूप से उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के समय नदी या तालाब के किनारे जाकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस पर्व में विशेष पकवानों का भी महत्व होता है, जिसमें ठेकुआ, कद्दू की सब्जी और अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं। शालिनी ने इस पर्व के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है।

सियोल में भारतीय समुदाय के सदस्यों ने भी इस पर्व को मनाने में भाग लिया। वाराणसी के ही वीके राय स‍ियोल में प्रत‍िष्‍ठ‍ित कंपनी में कार्यरत हैं, उन्होंने बताया क‍ि पूजा-अर्चना की और एक-दूसरे के साथ इस पवित्र अवसर पर दूसरे देश में भी अपनी माटी के आयोजन को करना काफी सुखद है।

छठ महापर्व ने सियोल में भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण कार्य किया है। इस पर्व के माध्यम से भारतीय समुदाय ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और साझा करने का एक अनूठा उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।
 

स‍ियोल में पटना न‍िवासी आइएफएस अध‍िकारी निशिकांत सिंह की प्रतापगढ़ न‍िवासी पत्नी शालिनी स‍िंंह ने इस पवित्र पर्व का व्रत किया।