RSS 100 Years:'पहलगाम घटना से पता चला कौन हमारा दोस्त और कौन दुश्मन', विजयादशमी उत्सव में बोले मोहन भागवत...
100 years of RSS: राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 साल पूरे हो गए हैं। इस खास मौके पर नागपुर के रेशमबाग मैदान में मुख्य कार्यक्रम का आयोजित किया है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद में कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद हैं। विजयादशमी उत्सव पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया। वहीं, रामनाथ कोविंद और भागवत ने कार्यक्रम को संबोधित भी किया।
महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को किया याद
विजयादशमी उत्सव कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर याद किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता की लड़ाई में महात्मा गांधी का योगदान अविस्मरणीय है। लाल बहादुर शास्त्री ने देश के लिए प्राण अर्पित किए।
पहलगाम हमले का जिक्र कर क्या बोले भागवत?
अपने संबोधन में RSS प्रमुख पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते भी नजर आए। उन्होंने कहा कि पहलगाम में सीमापार से आए आतंकियों द्वारा हमला हुआ। 26 नागरिकों का धर्म पूछकर हत्याएं हुई, जिससे देश में क्रोध की लहर पैदा हुई। सरकार और सेना ने इसका पुरजोर जवाब दिया। हमारी सेना का शौर्य और समाज की एकता का उत्तम चित्र प्रस्थापित हुआ। ये (पहलगाम आतंकी हमले की) घटना हमको सिखा गई हम सबके प्रति मित्र भाव रखेंगे, फिर भी अपनी सुरक्षा के लिए हमको ज्यादा से ज्यादा सजग रहना होगा और समर्थ बनना पड़ेगा। देश के भीतर भी, ऐसे असंवैधानिक तत्व हैं जो देश को अस्थिर करना चाहते हैं
उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद दुनिया के देशों ने जो भूमिका ली, उससे हमारे ध्यान में आया हमारे मित्र कौन कौन हैं और कहां तक हैं।
'हमें आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा, स्वदेशी को अपनाना पड़ेगा'
भागवत ने कहा कि अमेरिका ने अपने हित के लिए नई टैरिफ नीति अपनाई। उसकी मार सभी पर पड़ रही है। ये सारा परिदृश्य उस पर हम निर्भर हो जाएं, ऐसा नहीं है। अकेला राष्ट्र अलगाव में जी नहीं सकता, लेकिन निर्भरता मजबूरी में ना बदल जाए। वो कब, कैसे बदलेगी, उसका कोई पता नहीं है। विश्व जीवन की एकता को मानते हुए, इसको मजबूरी ना बनाते हुए जीना है तो हमें आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा, स्वदेशी को अपनाना पड़ेगा।
RSS प्रमुख ने आगे कहा कि विश्व भारत की तरफ अपेक्षा से देखता है। भारत में आशा की किरण दिखाई देती है। भारत की नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना निरंतर बढ़ी है। आधुनिक विश्व के पास अधूरी दृष्टि है, आर्थिक विकास होता है, नैतिक विकास नहीं। अमेरिका का जीवन विकसित माना जाता है, इसका कारण दृष्टि का अधूरापन है। विश्व भारत से अपेक्षा कर रहा है, नियति यही कार्य भारतवासियों से चाहती है, हम विश्व को नया रास्ता दें।
अपने संबोधन में उन्होंने ये भी कहा कि संघ की शाखा आदत बदलने का तरीका है। संघ को लालच दिखाया गया, संघ को राजनीति में आने का आमंत्रण मिला, लेकिन संघ ने वो नहीं किया। हर परिस्थिति में स्वयंसेवकों ने शाखा को नित्य चलाया।