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यूपी : इस यून‍िवर्स‍िटी का अस्तित्व होगा समाप्त, योगी कैबिनेट में प्रस्ताव को स्वीकृति; इस वजह से की गई बड़ी कार्रवाई...

यूपी : इस यून‍िवर्स‍िटी का अस्तित्व होगा समाप्त, योगी कैबिनेट में प्रस्ताव को स्वीकृति; इस वजह से की गई बड़ी कार्रवाई...

लखनऊ, राज्य ब्यूरो। फर्जी डिग्रियों और गंभीर अनियमितताओं के मामले में जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद (फिरोजाबाद) के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसके परिसमापन का फैसला लिया गया है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई है।

इसके साथ ही विश्वविद्यालय का अस्तित्व समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और इसके सभी शैक्षणिक व प्रशासनिक अभिलेख डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा को सौंपे जाएंगे। इन्हीं अभिलेखों के आधार पर अब तक जारी की गई डिग्रियों और अंकतालिकाओं का सत्यापन किया जाएगा, ताकि फर्जी और वास्तविक डिग्रियों की स्पष्ट पहचान हो सके।

कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि जांच में यह सामने आया कि जेएस विश्वविद्यालय ने नियमों को ताक पर रखकर बीपीएड पाठ्यक्रम की फर्जी और बैकडेट में अंकतालिकाएं और डिग्रियां जारी कीं। इन फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल राजस्थान की शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में चयन के लिए किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान पुलिस ने इस पूरे प्रकरण की जांच की, जिसमें विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और कुलसचिव की गिरफ्तारी भी हुई। शासन स्तर पर गठित जांच समितियों की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय में व्यापक अनियमितताएं उजागर हुईं। रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय ने उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम की कई धाराओं का उल्लंघन किया। जांच में यह भी सामने आया कि विश्वविद्यालय ने डिग्री देने की शक्ति का दुरुपयोग किया और संगठित तरीके से फर्जी डिग्रियां और अंकतालिकाएं जारी कीं।

इसके अलावा विश्वविद्यालय के पास निर्धारित 40 एकड़ भूमि के स्थान पर केवल 35.637 एकड़ भूमि पाई गई, जो अधिनियम की धारा तीन का उल्लंघन है। यही नहीं, विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों के प्रवेश, परीक्षा परिणाम, जारी की गई डिग्रियों और परीक्षाओं में शामिल छात्रों का पूरा विवरण नियमित रूप से उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद को नहीं भेजा गया।

कैबिनेट के निर्णय के तहत परिसमापन की अवधि में विश्वविद्यालय से जुड़ी शेष जिम्मेदारियों के संचालन के लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 55(6) के अंतर्गत तीन सदस्यीय अंतरिम समिति गठित करने का भी फैसला लिया गया है, ताकि शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों को व्यवस्थित रूप से पूरा किया जा सके।

परिसमापन के बाद डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा को अभिलेख संरक्षित रखने और सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस फैसले से निजी विश्वविद्यालयों को यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि नियमों के उल्लंघन और शिक्षा के नाम पर फर्जीवाड़ा करने पर कठोर कार्रवाई तय है।