Headlines
Loading...
केंद्र सरकार का आदेश मानने को तैयार नहीं हैं ये अजमेर दरगाह से जुड़े तीन हजार खादिम...

केंद्र सरकार का आदेश मानने को तैयार नहीं हैं ये अजमेर दरगाह से जुड़े तीन हजार खादिम...

राजस्थान राज्य ब्यूरो, जयपुर। राजस्थान के अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह से जुड़े करीब तीन हजार खादिम केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के निर्देशों को मानने को तैयार नहीं है।

दरगाह में जियारत के लिए आने वाले देश-विदेश के जायरीनों के साथ होने वाले अभद्र व्यवहार और मनमाने तरीके से पैसे वसूलने पर लगाम लगाने के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय की ओर से नियुक्त दरगाह कमेटी के नाजिम ने खादिमों को लाइसेंस देने का निर्णय लिया।

इसके लिए पांच जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए लेकिन आवेदन करने की अवधि समाप्त होने तक एक भी खादिम ने लाइसेंस के लिए आवेदन ही नहीं किया।

खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जागदान और अंजुमन शेख जादगान लाइसेंस प्रक्रिया का विरोध कर रही है। सीमा सुरक्षा बल के पूर्व डीआइजी बिलाल खान का मानना है कि दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम, 1955 की धारा 11 (एफ) में वर्णित प्रविधानों के अनुसार लाइसेंस प्रक्रिया सही है। उन्होंने कहा कि लाइसेंस प्रक्रिया से किसी का हित प्रभावित नहीं होगा।

उधर, अंजुमन सैयद जागदान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने इसे तुगलकी फरमान बताते हुए कहा कि खादिम इसको नहीं मानेंगे। खादिमों की दो संस्था अंजुमन सैयद में करीब 2200 एवं अंजुमन शेख में करीब 800 सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक मंत्रालय दरगाह में पैसा खर्च नहीं करता, बल्कि दरगाह की ओर से उनके अमले को पैसा दिया जाता है।

रोजाना एक लाख जायरीन पहुंचते हैं दरगाह

अजमेर जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि दरगाह में जियारत के लिए प्रतिदिन करीब एक लाख जायरीन पहुंचते हैं। 17 से 27 दिसंबर तक चले उर्स के दौरान दस दिन में 14 लाख से अधिक जायरीन जियारत के लिए पहुंचे थे। कई बार जायरीनों के साथ मारपीट, अभद्र व्यवहार, धमकाकर पैसे वसूलने के मामले सामने आते हैं।

लाइसेंस व्यवस्था से आपराधिक प्रवृति के खादिमों पर लगाम लगेगी, वहीं सही तरह से काम करने वाले खादिमों और जायरीनों को सुरक्षा मिलेगी। लाइसेंस व्यवस्था से दरगाह में अनुशासन, जवाबदेही एवं पारदर्शिता आएगी।