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ना तो नस्लीय हमला...ना ही टूटी हड्डी, एमपी में असम के छात्र के साथ मारपीट मामले में पुलिस का है दावा...

ना तो नस्लीय हमला...ना ही टूटी हड्डी, एमपी में असम के छात्र के साथ मारपीट मामले में पुलिस का है दावा...

मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच मारपीट के मामला तूल पकड़ता जा रहा है। हॉस्टल में हुई मारपीट मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। वहीं इस मामले में पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं जिसने इस मामले की कहानी को ही बदल दिया है। पुलिस के मुताबिक, मारपीट की घटना कोई सोची समझी साजिश नहीं है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) के छात्रावास में अर्थशास्त्र के पोस्ट ग्रेजुएट छात्र हिरोस ज्योति दास के साथ पांच छात्रों ने मारपीट की। आरोपियों ने दास से पूछा कि वह कहां से हैं और विश्वविद्यालय में क्या कर रहे हैं. इसी बात पर कहासुनी हुई, जो मारपीट तक आगे बढ़ गई। इस हमले में दास की आंखों और नाक पर चोटें आई हैं।

छात्रों के खिलाफ केस दर्ज

शिकायत के आधार पर विश्वविद्यालय ने आरोपी छात्र अनुराग पांडे, जतिन सिंह, रजनीश त्रिपाठी, विशाल यादव और उत्कर्ष सिंह को निष्कासित कर दिया है। उनके खिलाफ स्थानीय पुलिस स्टेशन में एफआईआर भी दर्ज की गई है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी और कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अपने स्तर पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है, किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा। अनूपपुर के पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान ने बताया कि पीड़ित के मेडिकल प्रमाणपत्र में नाक और आंखों के नीचे चोटें पाई गई हैं, जिसके आधार पर मामले में केस दर्ज किया गया था।

घटना की जांच में जुटी पुलिस

घटना 13 जनवरी की सुबह लगभग 4 बजे की बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी छात्र अनुराग पांडे, जतिन सिंह, विशाल यादव और अन्य दो छात्रों ने हॉस्टल गए थे। आरोपी छात्र हॉस्टल के उसी कमरे में गए थे जहां वे पहले रहते थे। मौजूदा समय में उस कमरे में असम के छात्र हिरोश ज्योति दास रहते हैं। आरोपी छात्रों की ज्योति दास के साथ किसी बात को लेकर बहस हो गई। अनूपपुर पुलिस अधीक्षक (SP) मोती उर रहमान के अनुसार यह मामला आपसी कहासुनी और सामान्य मार-पीट का है न कि किसी सोची-समझी साजिश का।