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अगर एक बार भी आरक्षण का लाभ लिया तो जनरल सीट पर कोई हक नहीं, UPSC परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला...

अगर एक बार भी आरक्षण का लाभ लिया तो जनरल सीट पर कोई हक नहीं, UPSC परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला...

नई दिल्ली। आरक्षण का फायदा लेने वालों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर कोई कैंडिडेट परीक्षा में आरक्षित श्रेणी (जैसे- एससी, एसटी) की छूट का फायदा उठाता है, तो वह अनारक्षित यानी जनरल सीट पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला भारतीय वन सेवा (आईएफएस) परीक्षा से जुड़े एक मामले में आया। यह मामला 2013 की इंडियन फॉरेस्ट सर्विस एग्जाम से जुड़ा था। इस परीक्षा में दो चरण थे। प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा, जिसके बाद इंटरव्यू होता था।

क्या था पूरा मामला 

प्रारंभिक परीक्षा में जनरल कैटेगरी के लिए कट-ऑफ 267 अंक था, जबकि अनुसूचित जाति (एससी) उम्मीदवारों के लिए यह 233 अंक था। एक एससी कैंडिडेट जी. किरण ने 233 अंक के रिलैक्शेसन का फायदा उठाया। उन्होंने 247.18 अंक प्राप्त किए और परीक्षा पास कर ली। वहीं, एक जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट एंटनी एस. मारियप्पा ने 270.68 अंक लाकर जनरल कट-ऑफ पार किया।

ऐसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा केस

हालांकि, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के बाद जब फाइनल मेरिट लिस्ट आई, तो किरण 19वें स्थान पर थे और एंटनी 37वें स्थान पर। यानी, किरण का फाइनल रैंक एंटनी से बेहतर था। हालांकि, जब कैडर (राज्य) आवंटित करने की बारी आई, तो कर्नाटक में जनरल कैटेगरी के लिए केवल एक 'इनसाइडर' (होम स्टेट) की सीट खाली थी और एससी कैटेगरी के लिए कोई 'इनसाइडर' सीट नहीं थी।

हाईकोर्ट ने फैसले में क्या कहा था

ऐसे में सरकार ने जनरल इनसाइडर सीट एंटनी को आवंटित कर दी और किरण को तमिलनाडु कैडर में भेज दिया। किरण को यह फैसला पसंद नहीं आया। उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) और फिर कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की। दोनों अदालतों ने किरण के पक्ष में फैसला सुनाया। उनका तर्क था कि किरण का फाइनल रैंक एंटनी से बेहतर है, इसलिए उन्हें जनरल सीट मिलनी चाहिए।

ऐसे सुप्रीम कोर्ट ने पलटा HC का फैसला

हालांकि, यूनियन ऑफ इंडिया (सरकार) इस फैसले से सहमत नहीं थी और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि IFS परीक्षा एक एकीकृत चयन प्रक्रिया है, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा पास करना मुख्य परीक्षा में बैठने के लिए जरूरी है।

इन नियमों के तहत SC ने दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने आईएफएस परीक्षा नियमों के रूल 14(ii) का हवाला दिया। इस नियम में एक शर्त है। इसके मुताबिक, आरक्षित श्रेणी के वे उम्मीदवार ही अनारक्षित सीटों पर विचार किए जा सकते हैं, जिन्होंने परीक्षा के किसी भी फेज में कोई छूट या रियायत नहीं ली हो। अदालत ने साफ कहा कि जी. किरण ने प्रारंभिक परीक्षा में एससी कैटेगरी के लिए दी गई छूट का फायदा उठाया था। ऐसे में भले ही उन्होंने फाइनल मेरिट लिस्ट में जनरल कैटेगरी के उम्मीदवार से बेहतर रैंक हासिल किया हो, वे अनारक्षित सीट के हकदार नहीं हो सकते।

'एक बार कोटे का लाभ ले लिया तो...'

जस्टिस माहेश्वरी ने अपने फैसले में लिखा कि एक बार जब आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार छूट का फायदा उठाता है तो उसे अनारक्षित रिक्तियों के लिए नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि प्रीलिम्स एग्जाम में मिली छूट को बाद के फेज में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शीर्ष कोर्ट ने एक पुराने मामले (यूनियन ऑफ इंडिया Vs साजिब रॉय) का भी जिक्र फैसले में किया। उस मामले में भी यही कहा गया था कि अगर कोई आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार उम्र, कट-ऑफ या किसी अन्य मामले में कोई छूट लेता है, तो वह अनारक्षित सीट पर तब तक नहीं जा सकता जब तक रूल स्पष्ट रूप से इसकी इजाजत न दें।