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बिहार में एड्स का खतरा! 1 लाख के पार मरीजों की संख्या, 'हाई रिस्क' जोन में पटना-गया सहित 13 जिले है शामिल...

बिहार में एड्स का खतरा! 1 लाख के पार मरीजों की संख्या, 'हाई रिस्क' जोन में पटना-गया सहित 13 जिले है शामिल...

पटना, ब्यूरो। बिहार से एड्स को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। राज्य में एड्स से पीड़ित लोगों की संख्या एक लाख के पार हो गई है। इसकी पुष्टि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने खुद की है।

मंगल पांडेय ने विधान परिपद में बताया कि कि बिहार में एक लाख 44 लोग एचआईवी पॉजिटिव हैं। मंगल पांडेय, डॉ. राजवर्धन आजाद और अन्य के ध्यानाकर्पंण पर जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि राज्य के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में 196 समेकित परामर्श और जांच केंद्रों पर एड्स की निशुल्क जांच सुविधा और सलाह उपलब्ध है।

विधान परिषद में गूंजा एड्स का मुद्दा

मंगलवार को बिहार विधान परिषद में डॉ. राजवर्धन आजाद समेत नौ पार्षदों ने ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए इस गंभीर विषय को उठाया। पार्षदों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य की चिंता जताते हुए सरकार से संक्रमण की रोकथाम और उपचार के लिए स्पष्ट जवाब की मांग की। सदन को बताया गया कि बिहार के 13 जिले 'हाई रिस्क' (उच्च जोखिम) श्रेणी में आ चुके हैं, जहां संक्रमण की रफ्तार बेहद तेज है।

जिलों के आंकड़े: पटना सबसे ऊपर

स्वास्थ्य मंत्री की ओर से सदन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, राजधानी पटना संक्रमण के मामले में शीर्ष पर है। पटना में अभी तक 8270 एड्स के मरीजों की पुष्ट हुई है। जबकि दूसरे नंबर पर बिहार का गयाजी जिला है, जहां एचआईवी पॉजिटिव 5760 मरीज पाए गए हैं। वहीं मुजफ्फरपुर में 5520, सीतामढ़ी में 5026, बेगूसराय में 4716 मरीज और भागलपुर में एड्स के 3078 मरीज पाए गए हैं।

राज्य में चल रही 'बिहार शताब्दी एड्स पीड़ित कल्याण योजना': मंगल पांडेय

बिहार स्वास्थ्य विभाग के मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि कि इससे साथ ही एड्स संक्रमित व्यक्तियों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें संबल प्रदान करने के लिए 'बिहार शताब्दी एड्स पीड़ित कल्याण योजना' चलाई जा रही है। इसके तहत प्रत्येक संक्रमित व्यक्ति को 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाती है। संक्रमित व्यक्ति के 18 वर्ष से कम उम्र के दो आश्रित बच्चों को 1000 रुपये प्रतिमाह पारिवारिक योजना के तहत दिए जाते हैं।

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक सरकार 63.81 करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खाते में भेज चुकी है। मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस बीमारी के उन्मूलन और सामाजिक जागरूकता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।