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चित्रकूट:34 मासूम,47 देश,74 गवाह, बच्चों संग दरिंदगी कर वीडियो बनाने वाले जेई पति-पत्नी को पास्को कोर्ट ने दी फांसी की सजा...

चित्रकूट:34 मासूम,47 देश,74 गवाह, बच्चों संग दरिंदगी कर वीडियो बनाने वाले जेई पति-पत्नी को पास्को कोर्ट ने दी फांसी की सजा...

चित्रकूट। साल 2020 चित्रकूट के लिए बड़ा ही डरावना सा था। यहां एक दंपति की खौफनाक करतूत सामने आई थी। ये लोग मासूम छोटे बच्चों के अश्लील वीडियो और फोटो डार्क वेब के जरिए विदेशों में बेचते थे। अब करीब पांच साल बाद पति-पत्नी दोनों को बांदा कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। सबसे हैरानी की बात ये थी कि ये आदमी कोई अनपढ़ गवार नहीं था बल्कि पढ़ा-लिखा सरकारी नौकरी करने वाला था। आइए जानते हैं शुरू से सबकुछ।

मरते दम तक लटकाए रखा जाए: जज

पति रामभवन सिंचाई विभाग का जेई था, जबकि पत्नी दुर्गावती हाउस वाइफ थी। रामभवन की पोस्टिंग चित्रकूट में थी। पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा- दोनों पति-पत्नी को मरते दम तक फंदे पर लटकाए रखा जाए। कोर्ट ने दोनों को इस साल 18 फरवरी को दोषी ठहराया था। वहीं, सीबीआई ने रामभवन को 18 नवंबर, 2020 को अरेस्ट किया था। दुर्गावती को गवाहों पर दबाव डालकर समझौता कराने का दोषी पाया गया।

यह है पूरा मामला

बांदा का रहने वाला रामभवन चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जेई के पद पर तैनात था। रामभवन अपनी पत्नी दुर्गावती के साथ मिलकर गरीब घरों के बच्चों को लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। दोनों मिलकर नाबालिगों का कुकर्म करते थे. बच्चों की उम्र 5 से 16 साल के बीच होती थी। बच्चों के साथ पत्नी संबंध बनाती थी, जबकि रामभवन उनसे कुकर्म करता था। इतना ही नहीं, दोनों लैपटॉप के कैमरे के जरिए बच्चों के अश्लील वीडियो भी बना लेते थे। 

इसकी शिकायत मिलने पर 31 अक्टूबर, 2020 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रामभवन के खिलाफ केस दर्ज किया। आरोप था कि वह बच्चों के अश्लील वीडियो/फोटो बनाकर डार्क वेब के जरिए अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क तक पहुंचाता था। इसके बाद 18 नवंबर 2020 को सीबीआई ने रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को गिरफ्तार कर लिया था।

ये सामान हुआ था बरामद

उस समय इंजीनियर की उम्र 40 साल से भी कम थी। आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश के जिला चित्रकूट समेत बांदा और आसपास के जिलों में बच्चों के यौन शोषण का आरोप था। यह भी आरोप था कि आरोपी के साथ कुछ और लोग भी शामिल थे। सीबीआई ने इन आरोपियों के घरों पर जब तलाशी ली थी तब 8 लाख रुपये नगद, मोबाइल फोन, लैपटॉप, वेब कैमरा, पेन ड्राइव और मेमोरी कार्ड और खिलौनों समेत इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज डिवाइस बरामद हुए। 

आरोपी के ईमेल की जांच से पता चला है कि वह बाल यौन शोषण सामग्री साझा करने के उद्देश्य से कथित तौर पर कई भारतीय और विदेशी नागरिकों के संपर्क में भी था। आरोपी ने इंटरनेट पर सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों का उपयोग करते हुए डार्क नेट इत्यादि के माध्यम से कथित तौर पर बाल यौन उत्पीड़न सामग्री को भारी मात्रा में बनाया और उन्हें साझा किया।

सीबीआई ने चार्जशीट की थी दाखिल

सीबीआई ने गिरफ्तारी के 88वें दिन बाद बांदा कोर्ट में 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में मेडिकल रिपोर्ट और बच्चों के बयानों को आधार बनाया गया था। इस दौरान CBI की टीम ने 4 से 42 साल तक की उम्र के लोगों के बयान दर्ज कराए। सभी का मेडिकल परीक्षण कराने के साथ डिजिटल एविडेंस को कनेक्ट किया गया था।

अबतक ये हुआ

पॉक्सो कोर्ट के अधिवक्ता कमल सिंह ने बताया कि सीबीआई को इंटरपोल की तरफ से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति 3 नंबरों से 7 से लेकर 18 साल के बच्चों के पोर्न वीडियो बनाकर इंटरनेट में अपलोड करता है। साथ ही एक एक पेन ड्राइव भी थी। उसमें 34 बच्चों के वीडियो और 679 फोटो थीं। ये बच्चे बांदा, चित्रकूट समेत आसपास के जिलों के थे। उस नंबर को ट्रेस किया गया, तो पता चला कि रामभवन अपनी पत्नी के साथ इस गंदे काम को कर रहा था। 

रामभवन सिंचाई विभाग में जेई के पद पर तैनात था। सीबीआई ने बांदा पुलिस के साथ मिलकर जेई और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया था। बच्चों से जुड़ा मामला होने के चलते सीबीआई ने पॉक्सो कोर्ट में ट्रायल कराया। इस मामले में फरवरी 2021 में चार्जशीट लगाई गई थी। 74 गवाह CBI ने पॉक्सो कोर्ट में पेश किए। 

आज पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने पति-पत्नी को फांसी की सजा सुनाई है। ये भी कहा है कि डीएम को एक पत्र लिखा जाए, जिसमें पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपए की राशि देने का काम किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि इन दोनों ने ये गंदे वीडियो चीन, अमेरिका, ब्राजील और अफगानिस्तान समेत 47 देशों को बेचे थे। जो बच्चे दरिंदगी का शिकार हुए थे, उनका इलाज दिल्ली AIMS में किया गया था।