Headlines
Loading...
यूपी में माफिया की कुर्क करीब 70 करोड़ ₹ की भूमि 'हनुमान जी' को मिली, ढाई साल चली ऐसे कानूनी लड़ाई, जानिए...

यूपी में माफिया की कुर्क करीब 70 करोड़ ₹ की भूमि 'हनुमान जी' को मिली, ढाई साल चली ऐसे कानूनी लड़ाई, जानिए...

ब्यूरो, फर्रुखाबाद। वर्षों तक हनुमान मंदिर ट्रस्ट की करीब 70 करोड़ से अधिक कीमत की गांव अर्राहपहाड़पुर स्थित 4.3810 हेक्टेयर जमीन माफिया और उसके सहयोगियों के नाम राजस्व रिकार्ड में घूमती रही, फर्जी खरीद-बिक्री और आदेश होते रहे।

प्रशासन तब जागा जब मामला गैंग्स्टर एक्ट तक पहुंचा। डीएम की अदालत ने सुनवाई के बाद माना कि वास्तव में भूमि श्री हनुमान जी महाराज विराजमान मंदिर ट्रस्ट की है। आदेश में भूमि को ट्रस्ट के पक्ष में मुक्त करने का निर्देश तहसीलदार को दिया गया है।

पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने गैंग्स्टर एक्ट के तहत 15 मई 2023 को कार्रवाई करते हुए डीएम को आख्या भेजी कि राज्य स्तरीय माफिया व गैंग लीडर अनुपम दुबे और उसके सहयोगी रमेश चंद्र, अभिषेक, अनुराग आदि ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर श्री हनुमान जी महाराज विराजमान मंदिर की ट्रस्ट संपत्ति पर कब्जा किया।

पुलिस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आरोपियों ने 1968 और 2004 के फर्जी अदालती आदेश तैयार कराकर जमीन अपने नाम दर्ज करा ली, फिर इसे डा. प्रभात गुप्ता, राजीव रस्तोगी सहित अन्य लोगों को बेचकर करोड़ों रुपये कमाए।

इसी आधार पर प्रशासन ने 18 मई 2023 को संपत्ति कुर्क कर ली थी। इस पूरे मामले में मंदिर ट्रस्ट की ओर से मुख्तारआम एकलव्य कुमार ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने अदालत में तर्क दिया कि यह जमीन 1941 की पंजीकृत वसीयती ट्रस्ट डीड के तहत वक्फ हनुमान जी महाराज विराजमान की है और माफिया ने अधिकारियों से सांठगांठ कर राजस्व रिकार्ड में हेराफेरी कराई।

मामले में निर्णायक मोड़ तब आया जब बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी (एसओसी) ने अपने पांच जनवरी 2026 के आदेश में पुष्टि की कि 10 नवंबर 2004 का वह आदेश, जिसके आधार पर जमीन पर दावा किया जा रहा था, पूरी तरह फर्जी है।

एसओसी ने खतौनी के आधार पर प्रश्नगत संपत्ति को ट्रस्ट संपत्ति मानते हुए उसे मूल खातेदार हनुमान जी महाराज के नाम दर्ज करने का आदेश दिया और फर्जी आदेश को निरस्त कर दिया।

सुनवाई के दौरान जमीन खरीदने वाले डा. प्रभात गुप्ता, राजीव रस्तोगी और आरोपी रमेश चंद्र आदि ने अपनी दलीलें रखीं। खरीदारों ने कहा कि उन्होंने राजस्व रिकार्ड देखकर जमीन खरीदी। वहीं आरोपियों ने इसे विरासत में मिली संपत्ति बताया।

डीएम कोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि जब मूल आदेश ही फर्जी और शून्य है तो उसके आधार पर किया गया बैनामा या अधिकार वैध नहीं हो सकता।

वर्तमान सर्किल रेट के अनुसार संपत्ति का मूल्यांकन 70,09,60,000 रुपये है, जबकि बाजार मूल्य इससे कहीं अधिक आंका जा रहा है। डीएम ने पुलिस अधीक्षक और तहसीलदार सदर को आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।