Headlines
Loading...
अविश्वास प्रस्ताव के फैसले तक लोकसभा में नहीं जाएंगे ओम बिरला, विपक्ष के 118 सांसद द्वारा हस्ताक्षर सहित नोटिस पर स्पीकर का बयान...

अविश्वास प्रस्ताव के फैसले तक लोकसभा में नहीं जाएंगे ओम बिरला, विपक्ष के 118 सांसद द्वारा हस्ताक्षर सहित नोटिस पर स्पीकर का बयान...

नईदिल्ली, न्यूज। विपक्ष द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव पर ओम बिरला ने बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने फैसला किया है कि जब तक उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता है, तब तक वह लोकसभा की चेयर पर नहीं बैठेंगे।मंगलवार को विपक्ष ने स्पीकर पर सदन के कामकाज में पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। 

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, विपक्ष के इस प्रस्ताव पर अब ओम बिरला ने फैसला किया है कि उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर जब तक सदन में चर्चा और निर्णय नहीं हो जाता है, तब तक वे सदन में नहीं जाएंगे। संभावना जताई जा रही है कि बजट सत्र के दौरान 9 मार्च को स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है।

सत्ता पक्ष और विपक्ष कर सकता है मनाने की कोशिश

हालांकि ओम बिरला के इस फैसले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष उन्हें मनाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन ओम बिरला सदन में स्पीकर की कुर्सी पर बैठने को तैयार होंगे या नहीं इस पर अभी कोई जानकारी नहीं है।

विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव में क्या कहा?

विपक्ष के सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लोकसभा महासचिव को रूल 94(सी) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है। इस नोटिस पर विपक्ष के 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। यह प्रस्ताव लोकसभा में कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने पेश किया है, जिसमें संविधान के आर्टिकल 94(सी) का इस्तेमाल करते हुए स्पीकर को हटाने का प्रावधान है।

नोटिस में विपक्ष ने स्पीकर पर सदन की कार्यवाही खुलेआम पक्षपातपूर्ण तरीके से चलाने और विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं को बार-बार बोलने का मौका न देने का आरोप लगाया।

राहुल को न बोलने देने का आरोप

अपने आरोप को साबित करने के लिए प्रस्ताव में कई उदाहरणों का हवाला दिया गया। इसमें कहा गया कि 2 फरवरी को राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपना संबोधन पूरा नहीं करने दिया गया। 3 फरवरी को आठ विपक्षी सांसदों को बजट सेशन के बाकी समय के लिए मनमाने ढंग से सस्पेंड कर दिया गया, जिसके बारे में नोटिस में दावा किया गया कि यह सदस्यों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए सजा देने जैसा है।

पत्र में विपक्ष ने 4 फरवरी की एक घटना का भी जिक्र किया, जब विपक्षी सदस्यों के बार-बार कहने के बावजूद, एक भाजपा सांसद को कथित तौर पर चेयर से बिना किसी डांट के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर पूरी तरह से आपत्तिजनक और निजी हमले करने की इजाजत दी गई थी और संबंधित सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।