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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत, अब आरोपों के चक्रव्यूह में फंसे खुद ही शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज; जानें क्या है पूरा विवाद?...

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत, अब आरोपों के चक्रव्यूह में फंसे खुद ही शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज; जानें क्या है पूरा विवाद?...

प्रयागराज। ज्योंतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज मामले में नया मोड़ आ गया है। जहां एक ओर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगाकर उन्हें बड़ी राहत दी है, वहीं दूसरी ओर उन पर आरोप लगाने वाले आशुतोष महाराज खुद विवादों के घेरे में आ गए हैं। इस पूरे मामले में अब साक्ष्यों की सत्यता और शिकायतकर्ता के इतिहास को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

शंकराचार्य को कोर्ट से मिली संजीवनी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर स्टे लगा दिया है. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता से जवाब मांगा है. शंकराचार्य ने इन आरोपों को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और सनातन धर्म के खिलाफ एक बड़ी साजिश करार दिया है.

कौन हैं आशुतोष महाराज और क्यों उठे सवाल?

शंकराचार्य पर नाबालिग बटुकों के यौन शोषण का आरोप लगाने वाले आशुतोष महाराज (आशुतोष पांडेय) अब खुद जांच के घेरे में हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, आशुतोष महाराज का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और उन्हें शामली का 'हिस्ट्रीशीटर' बताया जा रहा है. उन पर गोवध अधिनियम, गैंगस्टर एक्ट और धोखाधड़ी समेत करीब 21 मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है। 

शाहजहांपुर के एक व्यक्ति रमाशंकर दीक्षित ने भी दावा किया है कि आशुतोष ने उन्हें पैसे का लालच देकर अपनी बेटियों से शंकराचार्य पर झूठा आरोप लगाने के लिए उकसाया था।

हत्या की साजिश और AI फोटो का विवाद

विवाद उस समय और गहरा गया जब आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य उनकी और पीड़ित बटुकों की हत्या करवा सकते हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी गाड़ी का पीछा किया जा रहा है. वहीं, शंकराचार्य पक्ष की ओर से एक फोटो जारी की गई थी जिसमें आशुतोष महाराज पुलिस अधिकारियों के साथ केक काटते दिख रहे थे, जिसे आशुतोष ने AI जनरेटेड और फर्जी बताया है।

बटुकों का बयान और जांच जारी

इस मामले में पुलिस ने पीड़ित बटुकों के बयान दर्ज किए हैं और मेडिकल जांच की प्रक्रिया भी पूरी की गई है. शंकराचार्य के समर्थकों का कहना है कि यह सब उन्हें बदनाम करने और गौ रक्षा अभियान से पीछे हटने के लिए दबाव बनाने की कोशिश है. फिलहाल, हाई कोर्ट के आदेश के बाद गिरफ्तारी का खतरा टल गया है, लेकिन कानूनी लड़ाई अब और पेचीदा हो गई है।