'अमिताभ से स्टेज पर न मिल पाने से थे नाराज'.. समझौतों के बावजूद कैसे जेल पहुंचे राजपाल? वकील ने बताई विवाद की वजह...
नई दिल्ली। मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिल गई है और वे तिहाड़ जेल से बाहर आ चुके हैं. यह पूरा मामला साल 2012 में उनकी फिल्म 'अता पता लापता' के लिए बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल से लिए गए 5 करोड़ रुपये के लोन से जुड़ा है।राजपाल के वकील भास्कर उपाध्याय का कहना है कि यह विवाद तब बढ़ा, जब फिल्म के म्यूजिक लॉन्च पर अमिताभ बच्चन मुख्य गेस्ट के रूप में आए थे।
शिकायतकर्ता माधव अग्रवाल भी बिग बी के साथ मंच शेयर करना चाहते थे, लेकिन राजपाल की टीम ने इससे मना कर दिया, क्योंकि अमिताभ बच्चन ने इसके लिए कोई फीस नहीं ली थी। वकील के मुताबिक, इसी बात से नाराज होकर माधव ने कानूनी रास्ता अपनाया और फिल्म की रिलीज रुकवाने की कोशिश की।
मामला सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के बीच 2013 और फिर 2016 में समझौते हुए, जिसमें बकाया रकम करीब 10.40 करोड़ रुपये तय की गई थी. राजपाल ने कुछ रकम चुकाई भी, लेकिन बाकी पैसों के लिए जब उनके एक गारंटर ने अपनी 15 करोड़ की संपत्ति गिरवी रखने की पेशकश की, तो शिकायतकर्ता ने उसे ठुकरा दिया और राजपाल को जेल भेजने की मांग पर अड़ा रहा। मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में वकील ने दावा किया कि शिकायतकर्ता ने चालाकी से उन पुराने चेक को भी दोबारा कोर्ट में पेश कर दिया, जिन्हें समझौते के तहत रद्द कर दिया जाना चाहिए था. इसी वजह से ट्रायल कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी मानते हुए भारी जुर्माना और सजा सुना दी।
सजा, जमानत और इंसाफ की उम्मीद
राजपाल यादव को कानूनी बारीकियों के चलते नवंबर 2018 में तीन महीने की जेल की सजा काटनी पड़ी थी. राजपाल की लीगल टीम ने इस फैसले को चुनौती देते हुए तर्क दिया है कि एक ही मामले में दो अलग-अलग कार्यवाहियां एक-साथ नहीं चल सकतीं. टीम ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि मामले की दोबारा मेरिट के आधार पर सुनवाई की जाए, क्योंकि वे पैसे चुकाने के लिए हमेशा तैयार थे, लेकिन प्रोसेस को गलत तरीके से मोड़ा गया. फिलहाल, हाईकोर्ट ने उनकी दलीलों को ध्यान में रखते हुए उन्हें अंतरिम जमानत दे दी है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।