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अखिलेश का विवादित बयान : "रामभद्राचार्य को जेल भेज देना चाहिए था,"शंकराचार्य पर FIR है  सरकारी साजिश, यूपी राजनीति में मचा हड़कंप..

अखिलेश का विवादित बयान : "रामभद्राचार्य को जेल भेज देना चाहिए था,"शंकराचार्य पर FIR है सरकारी साजिश, यूपी राजनीति में मचा हड़कंप..

लखनऊ, राज्य ब्यूरो। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी का तूफान आ गया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए एक ऐसा बयान दिया है जिसने हलचल मचा दी है।अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर जगतगुरु रामभद्राचार्य का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें बहुत पहले ही जेल भेज देना चाहिए था। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय था जब उन्होंने खुद रामभद्राचार्य पर दर्ज मुकदमा वापस लिया था, जो शायद उनकी बड़ी गलती थी।

शंकराचार्य पर FIR को बताया सरकारी साजिश

अखिलेश यादव का गुस्सा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर दर्ज हुई FIR को लेकर फूटा है। बच्चों के यौन शोषण मामले में दर्ज इस FIR को अखिलेश ने सरकार की 'दोहरी नीति' और 'बदले की राजनीति' करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार अब शंकराचार्य को अपमानित करने के लिए 20 साल पुरानी घटनाओं को खोदकर निकाल रही है। अखिलेश ने सवाल उठाया कि जो सरकार खुद को सनातनी कहती है, उसने कड़ाके की ठंड में शंकराचार्य को धरने पर बैठने दिया और यहाँ तक कि उन्हें स्नान करने से भी रोका गया, जो सनातन परंपरा में कभी नहीं हुआ।

रामभद्राचार्य पर केस वापसी को बताया अपनी 'गलती'

सपा प्रमुख ने बेहद सख्त लहजे में कहा, "अगर शिकायतकर्ता रामभद्राचार्य का शिष्य है, तो मुझसे बड़ी भूल हुई है। मैंने कभी रामभद्राचार्य पर जो मुकदमा दर्ज था, उसे वापस लिया था। असल में मुझे उन्हें तभी जेल भेज देना चाहिए था।" अखिलेश ने आगे कहा कि वैचारिक मतभेद होना आम बात है, लेकिन सरकार जिस निचले स्तर पर जाकर आरोप लगवा रही है, उससे साफ है कि अब इस सरकार की विदाई तय है। उन्होंने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सरकार अब बचने वाली नहीं है।