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रामनवमी पर सूर्य की किरणें करेंगी रामलला का अभिषेक, 25 मार्च को होगा सीबीआरआई टीम द्वारा सूर्यतिलक का परीक्षण...

रामनवमी पर सूर्य की किरणें करेंगी रामलला का अभिषेक, 25 मार्च को होगा सीबीआरआई टीम द्वारा सूर्यतिलक का परीक्षण...

ब्यूरो, अयोध्या। रामनवमी पर इस बार भी राम मंदिर में विराजमान रामलला का सूर्यतिलक कराया जाएगा। इसे निर्बाध संपन्न कराने के लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) की टीम के 25 मार्च को रामनगरी आने की संभावना है। टीम में शामिल विशेषज्ञ यहां पहुंच सूर्यतिलक का परीक्षण करेंगे।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अगले दस वर्ष तक रामनवमी पर रामलला के ललाट का सू्र्य किरणों से अभिषेक कराने के लिए सीबीआरआइ से अनुबंध किया है।

राम मंदिर में 27 मार्च को रामनवमी के दिन मध्याह्न 12 बजे रामलला का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर चार-पांच मिनट तक सूर्य की किरणें रामलला के ललाट को प्रकाशित करेंगी।

प्रथम रामनवमी पर भी हुआ था सूर्यतिलक

भव्य राम मंदिर में रामलला के विग्रह की 22 जनवरी 2024 को हुई प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत प्रथम रामनवमी के अवसर पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इच्छानुसार सूर्यतिलक संपन्न कराया था। इसे द्वितीय रामनवमी पर भी संपन्न कराया गया था।

अब ट्रस्ट ने इसे हर वर्ष रामनवमी पर संपन्न कराने की योजना बनाई है और इसके लिए ट्रस्ट ने सीबीआरआइ से दस वर्ष का अनुबंध भी कर लिया है। सूर्यतिलक के समय श्रद्धालुओं को राम मंदिर में आस्था, विज्ञान व तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। तकनीक के माध्यम से मुख्य शिखर से भूतल पर विराजमान रामलला के मस्तक पर सूर्य की किरणों से चार-पांच मिनट तक अभिषेक कराया जाता है।

प्रधानमंत्री की अभिलाषा को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के निर्देश पर सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) रुड़की, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) बेंगलुरु व भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के विज्ञानियों व विशेषज्ञों की टीम ने पूरा किया था।

सूर्य तिलक दिया गया आयोजन का नाम

विज्ञानियों ने सघन परीक्षण कर तकनीक विकसित की थी, जिसके माध्यम से पीतल के पाइप व लेंस के सहारे प्रकाश की किरणें रामलला के मस्तक तक लाई गईं थीं। इसी आयोजन को सूर्य तिलक का नाम दिया गया है। बेंगलुरु की आप्टिका संस्था की ओर से विकसित तकनीक में किरणों को रिफ्लेक्टर व लेंस के माध्यम से सीधे गर्भगृह में 75 मिलीमीटर गोलाकार रूप में पहुंचाया जाता है।

इस प्रक्रिया को आप्टो मैकेनिकल सिस्टम (दर्पण व लेंस) के आधार पर पूरा किया गया था। इस वर्ष 27 मार्च को पड़ रही रामनवमी पर इस आयोजन की पुनरावृत्ति होगी। इसके परीक्षण के लिए सीबीआरआई टीम के 25 मार्च तक पहुंचने की संभावना है। राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र के अनुसार टीम रामनवमी से पूर्व यहां पहुंच कर परीक्षण करेगी।