कबाड़ में पड़ी कारों से 600 करोड़ का घोटाला !!लाखों में बेचे गए कुछ हजार के नंबर प्लेट, भ्रष्ट अधिकारियों-दलालों ने मिलकर किया खेल...
केसरी न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली। कहते हैं जितना दिमाग गलत काम में लगता है, उतना सही काम में लग जाए तो सबका भला हो जाए। यही बात राजस्थान के आरटीओ विभाग के अधिकारियों को भी समझ नहीं आई और उन्होंने दलालों के साथ मिलकर पूरे प्रदेश में ऐसा खेल खेला कि खुलासा होने पर सबके होश उड़ गए। भ्रष्ट अधिकारियों और दलालों ने मिल कर कबाड़ में पड़ी विंटेज कारों के नंबरों को दोबारा लाखों रुपये में बेचकर 600 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की वसूली कर डाली। अब जबकि इसका खुलासा हुआ है तो पूरे राज्य के परिवहन विभाग में अफरा-तफरी मची हुई है। अधिकारियों और दलालों के इस खेल को आप भी समझिए और इनकी मेहनत देखकर आपके होश न उड़ जाएं तो कहना।
अरबों का यह घोटाला राजस्थान के परिवहन विभाग में सामने आया है। जांच में सामने आया कि सबसे ज्यादा मामले जयपुर, झुंझुनूं, सलूम्बर, सवाई माधोपुर और दौसा जैसे जिलों में पकड़े गए. एक मामले में 650 से ज्यादा विंटेज नंबर फर्जी या पुराने दस्तावेजों के जरिये आधुनिक वाहनों को आवंटित कर दिए गए. ब्रोकर ऐसे 'भूतिया' रजिस्ट्रेशन को निशाना बनाते थे, जो या तो कभी अस्तित्व में नहीं थे या जिनके रिकॉर्ड पूछने पर 'जल गए' या 'खो गए' बता दिए जाते थे।
कैसे करते थे पूरा घोटाला
राज्य के VAHAN पोर्टल पर डिजिटल रिकॉर्ड्स का गलत इस्तेमाल कर भ्रष्ट अधिकारियों और दलालों ने गांवों में पड़े पुराने और निष्क्रिय 'विंटेज' वाहन रजिस्ट्रेशन नंबरों को फिर से सक्रिय कर नई लग्जरी कारों को अवैध रूप से ट्रांसफर कर दिया और मोटा मुनाफा कमाया। यह घोटाला मार्च 2025 में प्रमुखता से सामने आया था, जिसमें पुराने जमाने के कीमती नंबर (खासकर कम अंक वाले, सात अंकों की सीरीज के नंबर) जो दूरदराज के इलाकों में बंद, कबाड़ या अस्तित्वहीन वाहनों से जुड़े थे। उनका इस्तेमाल कर एजेंट और ब्रोकर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के कर्मचारियों के साथ मिलकर पुराने आवेदन पत्रों को फिर से सक्रिय करते थे और इन नंबरों को नए खरीदारों को बिना आधिकारिक नीलामी के आवंटित कर देते थे। इसके बदले वे हर नंबर पर 4-5 लाख रुपये तक वसूलते, जबकि इन नंबरों को कभी महज 21 हजार तक में बेचा गया था।
जयपुर में पकड़ा गया पहला मामला
जयपुर RTO (I) ने मार्च 2025 में पहली बार इस मामले को चिन्हित किया, जब उन्होंने महीने के अंत में सामान्य से कहीं ज्यादा विंटेज नंबरों के लेन-देन देखे. 31 मार्च 2025 को गांधी नगर थाने में FIR दर्ज कराई गई, जिसके बाद राज्यभर में जांच शुरू हुई. 2025 के अंत तक जयपुर RTO ने 2,000 से ज्यादा वाहन मालिकों को संदिग्ध विंटेज नंबर मिलने पर नोटिस जारी किए. VAHAN पोर्टल पर इन रजिस्ट्रेशनों को 'नॉट टू बी ट्रांजेक्टेड' स्टेटस में डालकर बिक्री, ट्रांसफर या अन्य सेवाओं पर रोक लगा दी गई. 24 से 26 दिसंबर 2025 तक दस्तावेजों की जांच के लिए फिजिकल वेरिफिकेशन कैंप लगाए गए, जिसमें 90 से ज्यादा 7 अंकों की सीरीज को होल्ड पर रखा गया।
ईडी ने भी जांच में डाला हाथ
संबंधित जांच में VIP नंबरों में भी गड़बड़ियां सामने आईं, जिससे 2018 से 2023 के बीच राज्य सरकार को 500-600 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. नवंबर 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दस्तावेज मांगे और 500 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी में मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका जताई. इन कार्रवाइयों में दौसा RTO जगदीश अमरावत को निलंबित करना (नवंबर 2025), दर्जनों अधिकारियों और एजेंटों पर FIR (केवल जयपुर के एक मामले में तीन अंकों वाले नंबरों में 39 लोगों पर) और सभी RTO को साल के अंत तक जांच रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए गए।
उजागर हुई डिजिटलीकरण की खामियां
परिवहन अधिकारियों ने इसे डिजिटलाइजेशन की खामियों का 'सिस्टमेटिक शोषण' बताया, जिसमें पुराने ग्रामीण रजिस्ट्रेशन जो अक्सर नजरअंदाज या निष्क्रिय रहते थे, उन्हें मुनाफे के लिए हथियार बना लिया गया. एक रिपोर्ट में इसे 'साइंस टू स्टील' कहा गया, जिसमें बताया गया कि एजेंट फर्जी कागजातों के जरिये बेकार पुराने नंबरों को शहर के खरीदारों के लिए कीमती बना देते थे. विभाग ने अब ऐसे विंटेज नंबरों की पुनः सक्रियता पर राज्यभर में रोक लगा दी है और VAHAN पोर्टल पर सख्त जांच के निर्देश दिए हैं. जिन वाहन मालिकों के नंबर फर्जी पाए जाएंगे, उनकी रजिस्ट्रेशन रद्द की जा सकती है. साथ ही भविष्य में ऐसे घोटाले रोकने के लिए नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठ रही है।