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BHU में अब चार वर्षीय बीए बीएड कोर्स, 12वीं के बाद सीधे बनेंगे शिक्षक, बचेगा एक साल...

BHU में अब चार वर्षीय बीए बीएड कोर्स, 12वीं के बाद सीधे बनेंगे शिक्षक, बचेगा एक साल...

वाराणसी, ब्यूरो। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की सिफारिशों को लागू करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा संकाय ने शैक्षणिक सत्र 2026-2027 से एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आइटीईपी) अंतर्गत चार वर्षीय बीए बीएड (सेकेंडरी स्टेज) डिग्री कोर्स शुरू करने की घोषणा की है।

अब तक की पारंपरिक व्यवस्था में छात्र पहले तीन साल की ग्रेजुएशन (बीए, बीएससी या बीकाम) करते थे और फिर दो साल का बीएड करते, यानी शिक्षक बनने के लिए कुल पांच साल लगते थे लेकिन बीएचयू में शुरू किए जा रहे इस एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम के बाद समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा।

यह कार्यक्रम आठ सेमेस्टर में विभाजित किया गया है, जिसमें कुल 180 क्रेडिट होंगे। इस पाठ्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ड्यूल-मेजर व्यवस्था है। प्रथम मेजर (शिक्षा) में कुल 96 क्रेडिट होंगे, जो छात्र को पेशेवर शिक्षक के रूप में तैयार करेंगे।

द्वितीय मेजर (विषय) में कला या सामाजिक विज्ञान के किसी एक विषय में 84 क्रेडिट अर्जित करने होंगे। यह कार्यक्रम शिक्षा संकाय द्वारा कला और सामाजिक विज्ञान संकाय के सहयोग से संचालित किया जाएगा। शिक्षा संकाय के वरिष्ठ प्रोफेसर सुनील सिंह ने बताया कि अभी तक यह व्यवस्था वसंत कालेज फार विमेन राजघाट और आर्य महिला पीजी कालेज चेतगंज में प्रभावी की जा रही है लेकिन भविष्य की नीतिगत स्थिति के अनुसार मुख्य कैंपस में भी लागू किया जा सकता है।

दोनों कालेजों में कुल सौ सीटों पर प्रवेश होगा। खास बात यह है कि विषय संबंधी पाठ्यक्रम वही होंगे, जो विश्वविद्यालय के अन्य स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रमों में लागू हैं ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता और मानकों में एकरूपता बनी रहे। ऐसे में छात्रों का समय बचेगा, चार साल के भीतर ही स्नातक और बीएड दोनों की डिग्री हासिल कर सकेंगे।

मल्टीपल एंट्री-एग्जिट की व्यवस्था होगी, इस कोर्स में बीच में पढ़ाई छोड़ने या पुनः जुड़ने का विकल्प भी उपलब्ध होगा, इसे विशेष तौर से माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को तैयार करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह अध्यादेश भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन और एनसीटीई के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जो आने वाले समय में देश को उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षक प्रदान करेगा।

इस पाठ्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका समानांतर ढांचा है, जहां पुराने ढर्रे में छात्र पहले विषय पढ़ते थे और फिर शिक्षण सीखते थे लेकिन विवि का यह नया माडल दोनों को साथ लेकर चलेगा। इस कोर्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि छात्र अपनी विषय विशेषज्ञता व शिक्षक प्रशिक्षण में संतुलन बना सके।

इनका विस्तार प्रथम छह सेमेस्टर (तीन वर्ष) तक रहेगा। यानी छात्र अपने चुने हुए विषय (जैसे इतिहास, भूगोल, या राजनीति शास्त्र) की गहराई को शुरुआती तीन सालों में ही आत्मसात कर लेगा। शिक्षा शास्त्र पूरे आठ सेमेस्टर (4 वर्ष) तक चलेगा।

पाठ्यक्रम की संरचना और क्रेडिट वितरण

* मुख्य विषय : स्नातक स्तर के मुख्य विषयों के लिए 60 क्रेडिट निर्धारित हैं।
* गौण विषय :24 क्रेडिट दिए गए हैं, जो छात्र की बहुमुखी प्रतिभा बढ़ाएंगे।
* शिक्षा : शिक्षा शास्त्र और शिक्षण कौशल के लिए 96 क्रेडिट (52 सैद्धांतिक 44 व्यावहारिक व अनुभव आधारित) आवंटित हैं।

विभिन्न चरणों में सुविधानुसार पाठ्यक्रम छोड़ सकेंगे

* 1 वर्ष के बाद : यूजी सर्टिफिकेट
* 2 वर्ष के बाद: यूजी डिप्लोमा
* 3 वर्ष के बाद: यूजी डिग्री
* 4 वर्ष के बाद बीए बीएड की पूर्ण उपाधि।

पाठ्यक्रम की कई श्रेणियां

* भारतीय शिक्षा का विकास, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, समावेशी शिक्षा और शिक्षा नीति जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे।
* भाषा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कला शिक्षा, भारतीय ज्ञान प्रणाली, योग और पर्यावरण शिक्षा जैसे आधुनिक विषय हैं।
* माध्यमिक स्तर के विषयों को पढ़ाने की कला सिखाई जाएगी। 
* सातवां सेमेस्टर पूरी तरह से व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए समर्पित किया जाएगा।
* व्यावहारिक प्रशिक्षण में प्री-इंटर्नशिप, स्कूल अवलोकन, शिक्षण सामग्री विकास और 10 क्रेडिट की मुख्य स्कूल इंटर्नशिप शामिल।
* समाज के साथ जुड़ाव और सामुदायिक सेवा के लिए दो क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं।