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पूजा आज :शीतला अष्‍टमी कब? कौन हैं शीतला माता जिनकी पूजा करने से दूर रहती हैं बीमारियां खाया जाता है बासी खाना...

पूजा आज :शीतला अष्‍टमी कब? कौन हैं शीतला माता जिनकी पूजा करने से दूर रहती हैं बीमारियां खाया जाता है बासी खाना...

Sheetla Ashtami 2026: हिंदू धर्म में शीतला माता को आरोग्‍य की देवी माना जाता है। मान्‍यता है कि शीतला माता की पूजा करने से चेचक, स्किन संबंधी बीमारियां, बुखार और अन्‍य संक्रामक बीमारियां नहीं होती हैं। शीतला माता की पूजा का पर्व शीतला अष्‍टमी या बासौड़ा पर्व के रूप में मनाते हैं। हर साल चैत्र कृष्‍ण अष्‍टमी के दिन शीतला अष्‍टमी मनाई जाती है। साल 2026 में शीतला अष्‍टमी या बासौड़ा 11 मार्च 2026, बुधवार को है। उससे पहले 10 मार्च को शीतला सप्‍तमी मनाई जाती है।

उत्तर भारत, राजस्थान, गुजरात, बंगाल और मध्य भारत में शीतला माता की पूजा का यह पर्व बासौड़ा प्रमुख तौर पर मनाते हैं। चूंकि बासौड़ा या शीतला अष्‍टमी के दिन बासी खाना खाया जाता है इसलिए एक दिन पहले शीतला सप्‍तमी को कई पकवान बनाकर तैयार किए जाते हैं, जिनका भोग शीतला माता को लगाया जाता है।

गधे पर क्‍यों सवार हैं शीतला माता?

शीतला माता को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। वे शीतलता देने वाली देवी हैं। धर्म-शास्‍त्रों में शीतला माता के रूप का जो वर्णन किया है उसके अनुसार शीतला माता गधे पर सवार रहती हैं। वहीं उनके हाथ में झाड़ू, जल से भरा कलश, सूप और नीम की पत्तियां होती हैं। ये सभी चीजें रोग निवारण के प्रतीक हैं। झाड़ू और सूप का संबंधी साफ-सफाई से है। यानी कि अच्‍छी सेहत के लिए साफ-सफाई जरूरी है। वहीं जल शीतलता का प्रतीक है। नीम की पत्तियां कई बीमारियों से निजात दिलाती हैं।

होली के बाद की सप्तमी या अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी कहा जाता है। इस दिन माता को ठंडा भोजन (बासी खाना) अर्पित किया जाता है। इसलिए इसे बसौड़ा भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन पकाया गया खाना खाने से बीमारियाँ नहीं होतीं। शीतला माता की पूजा बच्चों को चेचक, खसरा और त्वचा रोगों से बचाने के लिए एवं परिवार में स्वास्थ्य, शांति और रोगमुक्ति के लिए की जाती है। मान्यता है कि माता रूठ जाएं तो घर में बीमारी फैल सकती है।

वहीं शीतला अष्टमी पर माता शीतला का गधे (गर्दभ) की सवारी करना स्वच्छता, धैर्य और अथक परिश्रम का प्रतीक है। यानी कि अच्‍छी सेहत के लिए साफ-सफाई, शारीरिक श्रम, सही भोजन जरूरी है।

बासी खाने का भोग क्‍यों?

धार्मिक मान्यता के अनुसार शीतला माता को ठंडी चीजें प्रिय हैं, इसलिए उन्‍हें 1 दिन पहले बने भोजन का भोग लगाया जाता है। साथ ही इस दिन बासी भोजन खाना इस बात का भी प्रतीक है कि अब ये इस सीजन का आखिरी बासी भोजन है। चूंकि इसके बाद गर्मी बढ़ जाती है इसलिए इसके बाद से रोज ताजा और हल्‍का भोजन ही खाएं। शीतला माता को मीठे चावल, पूरी, हल्‍वा, दही बड़े आदि का भोग लगाया जाता है।

(Disclaimer - प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया..यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है। हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है। "केसरी न्यूज 24" इसकी पुष्टि नहीं करता है।)