काम राक्षसों जैसा... कपड़ा संन्यासियों वाला... शंकराचार्य का योगी पर तंज, बोले- कहीं आप ही तो कालनेमि नहीं?...
यूपी के हरदोई के माधौगंज में आयोजित जनसभा में लोगों को संबोधित करते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि हमारे समाज में कुछ कालनेमि आए हैं। कालनेमि एक राक्षस था। साधु कपड़ा पहनकर हनुमान के सामने गया था। उसका मतलब है अंदर से कुछ और हो बाहर से कुछ और दिखाई दे।
हमने कहा, 'आदित्यनाथ जी, आप बाहर से गेरुआ कपड़ा पहनकर अपने आपको योगी कह रहे हो। लेकिन आपके राज में गायों की संख्या कम हो रही है। गो हत्यारे से चंदा आपकी पार्टी ले रही है। तो काम तो राक्षसों जैसा दिखाई दे रहा है और कपड़ा संन्यासियों जैसे दिखाई दे रहा है। कहीं आप ही तो कालनेमि नहीं हो? अभी तक जवाब नहीं दिया है। क्या हिंदू समाज को जो उनको वोट देकर मुख्यमंत्री पद पर बैठाता है क्या उनको शंका होने पर पूछने का अधिकार नहीं हैं।'
शंकराचार्य ने कहा कि मंच पर खडे होकर कहा गया कि कटोगे तो बंटोगे। एक होगे तो सेफ होगे। लेकिन ये तो मंच की बता थी। जब कानून बनाने का समय आया तो यूजीसी का कानून लेकर आ गए। एक जाति को दूसरी जाति के विरुद्ध खड़ा कर दिया। आपस में लड़ो मरो और हमारा फायदा हो। मंच में कुछ और कहते हैं असल में कुछ और है।
39 दिन हो गए बता नहीं सके कि कैसे हिंदू हैं?
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, 'यूपी सरकार ने 24 घंटे में पूछा कि आप शंकराचार्य कैसे हैं तो हमने 12 घंटे मे उत्तर दे दिया। हमने भी पूछा कि 40 दिन में बताओ कि तुम कैसे असली हिन्दू हो। 39 दिन बीत गए आज तक बता नहीं सके कैसे हिंदू हैं। वक्तव्य दे रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में किसी की औकात नहीं कि गाय को खरोंच भी लगाए। डिप्टी सीएम, मुख्यमंत्री का भी वक्तव्य आया है कि गाय को खरोच नहीं आ सकती। अभी हम वाराणसी से लखनऊ के लिए निकले। सुलतानपुर भी आए। वहां सैकड़ों लोग मिले। बताया कि कुछ महीना पहले गाय को काटकर फेंक दिया गया था। आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।'
चोटी हिन्दुओं की धर्म ध्वजा है
शंकराचार्य ने कहा कि चोटी हिंदुओं की धर्म ध्वजा है। आज हमारे धर्म की ध्वजा को उखाड़ उखाड़कर फेंकने वाली पुलिस आ गई है। वह भी अपने आपको गेरुआधारी कहने वाले के राज में। पांच हजार लोग जो साधू संत थे वे अयोध्या में जब प्राण प्रतिष्ठा का नाटक किया गया था तब पहुंचे हुए थे। तब मैं अपनी जगह बैठकर शास्त्र की मर्यादा के अनुसार बोल रहा था। अखिलेश जब मुख्यमंत्री थे तब भी गणेश जी की मूर्ति का अपमान किया जा रहा था।
अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि वहां पर भी हजारों लोग थे तब शंकराचार्य की प्रतिकृति के रूप में शास्त्र के अनुसार बोला। कांग्रेस की सरकार हो, बसपा की सरकार हो। जब जब जो भी सरकार रही हो तो हमने धर्म शास्त्र के अनुसार बात कही है। हमारा रिकार्ड नहीं है कि हम किसी नेता के अनुसार बोले हों। हमारा शिष्य कोई हो सकता है। हमारे अनुसार बोलने लगे हो सकता है। लेकिन शंकराचार्य किसी नेता का चेहरा हो जाए अभी इतने बुरे दिन शंकराचार्य के नहीं आए हैं।