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योगी सरकार का खजाना भरने में जिला सोनभद्र अव्वल, महोबा और हमीरपुर ने भी राजस्व संग्रह में गाड़े अपने झंडे...

योगी सरकार का खजाना भरने में जिला सोनभद्र अव्वल, महोबा और हमीरपुर ने भी राजस्व संग्रह में गाड़े अपने झंडे...

लखनऊ, ब्यूरो। उत्तर प्रदेश भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप खनिज संसाधनों का संतुलित और सतत उपयोग सुनिश्चित करते हुए राज्य के अर्थव्यवस्था में अधिकाधिक योगदान का सतत प्रयास कर रहा है। इस संबंध में विभाग की ओर से हाल ही में संपन्न हुई मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में फरवरी माह के राजस्व संग्रह के आंकड़े जारी किए गए। 

जिसके अनुसार प्रदेश के खनिज संपदा से संपन्न प्रमुख दस जनपदों से लगभग 2543.42 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया गया। जिसमें सर्वाधिक राजस्व प्राप्ति सोनभद्र जनपद से हुई है, इसी क्रम में महोबा, हमीरपुर, झांसी और जालौन जनपद खनन आधारित राजस्व प्राप्ति में प्रमुख रहे।

भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग प्रदेश में अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करते हुए राजस्व संग्रह में वृद्धि सुनिश्चित कर रहा है। इस क्रम में खनिज एवं उपखनिज के खनन से फरवरी माह में सर्वाधिक राजस्व प्राप्ति सोनभद्र जनपद से हुई है। सोनभद्र जनपद ने मुख्य खनिजों के खनन से 402.79 करोड़ रुपये, जबकि उपखनिजों के खनन से 275.49 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। वहीं महोबा ने 394.9 करोड़ रुपये, हमीरपुर ने 389.61 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया। जबकि झांसी से 215.83 करोड़ रुपये, जालौन से 225.62 करोड़ तथा सहारनपुर से 227.58 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति दर्ज की गई।

इस क्रम में अन्य प्रमुख जनपदों में बांदा ने 209.98 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया, जबकि प्रयागराज से 136.9 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। फतेहपुर और कौशांबी जैसे जनपदों से क्रमशः 40.31 करोड़ रुपये और 24.41 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया गया। समीक्षा बैठक में विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के दस प्रमुख खनिज संपन्न जिलों से फरवरी माह में लगभग 2543.42 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो विभागीय प्रयासों और सुदृढ़ निगरानी व्यवस्था का परिणाम माना जा रहा है।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए विभाग की ओर से प्रदेश में खनन गतिविधियों की सतत निगरानी एवं खनन पट्टों के आवंटन और संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है, जिससे राजस्व संग्रहण में सुधार हुआ है।