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बुखार-गले में खराश जैसे लक्षण... नया कोरोना वैरिएंट 'Cicada' कितना खतरनाक? जानें क्या BA.3.2 पर काम नहीं करेगी वैक्सीन...

बुखार-गले में खराश जैसे लक्षण... नया कोरोना वैरिएंट 'Cicada' कितना खतरनाक? जानें क्या BA.3.2 पर काम नहीं करेगी वैक्सीन...

Covid New Variant, BA.3.2 variant (Cicada): कोरोना, एक ऐसा वायरस, जिसका नाम सामने आते ही लोगों की चिंता बढ़ जाती है, ये वायरस अभी भी जिंदा है। वक्त के साथ ये वायरस अलग-अलग रूप बदलता रहा, हर बार एक नए वैरिएंट के साथ, नई चिंता लेकर सामने आता रहा। अब, एक बार फिर, इसका नया वैरिएंट चर्चा में है। सवाल वही है, क्या हम सच में सुरक्षित हैं, या खतरा अभी भी बाकी है? आज हम यही समझने की कोशिश करेंगे कि ये नया वैरिएंट कितना खतरनाक है, भारत के लिए कितना खतरा है। साथ ही जानेंगे इसके लक्षण क्या हैं और हमें इससे कितना सतर्क रहने की जरूरत है...

पहले जानें कोरोना के इस नए वैरिएंट के बारे में

अमेरिका में कोरोना के नए वेरिएंट BA.3.2 के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, इसे "सिकाडा" (Cicada) नाम दिया गया है। बता दें कि BA.3.2, SARS-CoV-2 (COVID-19) वायरस का एक उभरता हुआ उप-वेरिएंट (sub-variant) है, जो ओमिक्रॉन (Omicron) वंश से संबंधित बताया जा रहा है। यह पहले के JN.1 वैरिएंट से अलग है और इसमें स्पाइक प्रोटीन में 70-75 म्यूटेशन पाए गए हैं। ये म्यूटेशन वायरस को शरीर की कोशिकाओं में घुसने में मदद करते हैं और यह इम्युनिटी (वैक्सीन/पुराने संक्रमण) से बच सकता है। 

द लैंसेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, BA.3.2 वैरिएंट में इम्युनिटी से बचने की सबसे ज्यादा क्षमता देखी गई। यानी वैक्सीन या पहले के संक्रमण से बनी एंटीबॉडी इस पर कम असर कर सकती हैं। बाकी वैरिएंट (जैसे XFG, LF.7.9) भी कुछ हद तक इम्युनिटी को चकमा दे सकते हैं। BA.3.2 की बात करें तो यह इम्युनिटी से बचता है, लेकिन फैलने की क्षमता कम है। इसके अलावा सिकाडा (BA.3.2) दिखने में चिंताजनक है, क्योंकि यह इम्युनिटी को चकमा दे सकता है, लेकिन अभी यह उतनी तेजी से फैलने वाला वैरिएंट नहीं माना जा रहा।

कहां बढ़ रहे हैं इसके मामले?

नया वैरिएंट अमेरिका के 25 राज्यों में पाया जा चुका है, इसमें कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा, न्यूयॉर्क, टेक्सास, वर्जीनिया जैसे बड़े राज्य शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीमित जांच (टेस्टिंग) की वजह से सभी केस सामने नहीं आए, यह वैरिएंट 23 देशों में भी रिपोर्ट हो चुका है। ऐसे में इससे इसका ग्लोबल खतरा बढ़ता दिख रहा है।

क्या है एक्सपर्ट की राय?

डॉ. पंकज बंसल (सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन, शारदा केयर हेल्थसिटी) के मुताबिक- कोरोना के नए 'सुपर वेरिएंट्स', जैसे कि सिसाडा या BA.3.2, को लेकर लोगों में चिंता होना स्वाभाविक है, हालांकि, इस स्थिति को समझदारी से देखने की आवश्यकता है। वायरस समय के साथ विकसित होता रहता है और नए वेरिएंट्स लगातार सामने आते हैं। कुछ वेरिएंट्स तेज़ी से फैलने की क्षमता रखते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वे हमेशा अधिक गंभीर बीमारियां उत्पन्न करेंगे।

उन्होंने कहा जहां तक वैक्सीन का सवाल है, इसका मुख्य उद्देश्य गंभीर संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु के जोखिम को कम करना है। अब तक के अनुभवों से यह स्पष्ट हुआ है कि वैक्सीन नए वेरिएंट्स के खिलाफ भी काफी हद तक सुरक्षा प्रदान करती है, विशेष रूप से जब सभी खुराक ली जाती हैं।

भारत में इसका कितना खतरा?

बता दें कि अभी के समय में भारत में BA.3.2 (Cicada) का खतरा "मध्यम से कम" माना जा रहा है। लेकिन नजर रखने की जरूरत है, घबराने की नहीं। यह वैरिएंट 20 से ज्यादा देशों में फैल चुका है, इसलिए हमें भी सतर्क रहने की जरूरत है। भले ही Cicada वैरिएंट का खतरा उतना बड़ा नहीं है, पर इसकी इम्युनिटी से बचने की क्षमता को देखते हुए इसे नजरअंदाज करना समस्या का कारण बन सकता है। एक्सपर्ट हमेशा सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। क्योंकि कोविड अब एंडेमिक बन चुका है, यानी यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और समय-समय पर नए वेरिएंट सामने आते रहेंगे।

लक्षण जान लें

रिपोर्टों की मानें तो इसके लक्षण अन्य ओमिक्रॉन स्ट्रेन के समान ही हो सकते हैं, लेकिन गले में खराश को प्रमुख बताया जा रहा है। इस स्थिति में गले में तेज दर्द या खराश (Severe sore throat) प्रमुख लक्षण हो सकता है। इसके अलावा तेज बुखार, लगातार खांसी, शरीर में अत्यधिक थकान, बदन दर्द और सिरदर्द, नाक बहना (Runny nose) या सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

डिस्क्लेमर: "केसरी न्यूज 24 मीडिया नेटवर्क" की यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्य के लिए दी गई है। इसमें बताए गए तथ्य विभिन्न रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की राय पर आधारित हैं। इसे किसी भी प्रकार की मेडिकल सलाह के रूप में न लें। वायरस से जुड़ी स्थिति समय के साथ बदल सकती है, इसलिए आधिकारिक स्रोतों और स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी है।