नाम गैस, पर काम बिल्कुल अलग! LPG, CNG, LNG और PNG में क्या है बड़ा अंतर? जानिए कौन सी गैस कहां और कैसे होती है इस्तेमाल...
Difference between Gases: आज से पहले आपने घर में आने वाली LPG या कार में यूज होने वाली CNG गैस के बारे में सुना होगा. लेकिन मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध से भारत में उपजे गैस संकट में आपने LPG, CNG, PNG और LNG का नाम भी सुना होगा.अभी सरकार ने भी PNG ग्राहकों के लिए नया आदेश जारी किया है. जिसमें सरकार ने पीएनजी कनेक्शन वालों के लिए LPG सिलेंडर की सप्लाई बंद कर दी है।
अब आपके मन में सवाल होगा कि ये सभी गैसें हैं, तो इनके नाम अलग क्यों हैं और इनका इस्तेमाल अलग-अलग जगह क्यों किया जाता है? दरअसल इन गैसों का स्रोत, इन्हें रखने का तरीका और इस्तेमाल का क्षेत्र अलग होता है. इसी वजह से हर गैस की अपनी खास भूमिका होती है. इसलिए हम आज आपको यहां पर LPG, CNG, PNG और LNG के बीच का असली फर्क बताने जा रहे हैं।
LPG घरों की रसोई में इस्तेमाल होने वाली गैस
LPG यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस का इस्तेमाल सबसे ज्यादा घरों में खाना बनाने के लिए किया जाता है. इसे दबाव में तरल (liquid) बनाकर सिलेंडर में भरा जाता है. यही वजह है कि यह आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाई जा सकती है. देश के कई गांवों और छोटे शहरों में अभी भी रसोई गैस के रूप में LPG सिलेंडर ही सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है. सिलेंडर खत्म होने पर नया सिलेंडर मंगाकर गैस की सप्लाई जारी रखी जाती है।
PNG का मतलब पाइपलाइन से घर तक आने वाली गैस
PNG का मतलब है पाइप्ड नेचुरल गैस. यह भी एक तरह की नेचुरल गैस होती है, लेकिन इसे सिलेंडर में नहीं रखा जाता. शहरों में बिछी पाइपलाइन के जरिए यह गैस सीधे लोगों के घरों तक पहुंचती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि लोगों को सिलेंडर खत्म होने की चिंता नहीं रहती. गैस लगातार पाइप के जरिए आती रहती है. बड़े शहरों में अब धीरे-धीरे PNG का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है और कई घरों में यह गैस रसोई तक पहुंच चुकी है।
CNG गाड़ियों के लिए बेहतर ईंधन
CNG का फुल फॉर्म होता है कंप्रेस्ड नेचुरल गैस. जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से वाहनों में किया जाता है. इसे बहुत ज्यादा दबाव के बाद सिलेंडर में भरा जाता है और फिर गाड़ियों में इस्तेमाल किया जाता है. आज कई शहरों में ऑटो, टैक्सी और बसें CNG से चलती हैं. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि यह पेट्रोल और डीजल के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाती है. इसी कारण इसे साफ ईंधन भी माना जाता है।
LNG गैस को दूर तक पहुंचाने का तरीका
LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस. इसमें नेचुरल गैस को बहुत कम तापमान पर ठंडा करके तरल (liquid) रूप में बदल दिया जाता है. ऐसा करने से गैस का आकार काफी छोटा हो जाता है. इस वजह से इसे बड़े टैंकों या जहाजों के जरिए लंबी दूरी तक भेजना आसान हो जाता है. बाद में जरूरत के अनुसार इसे फिर से गैस में बदलकर इंडस्ट्री, बिजलीघरों या शहरों की गैस सप्लाई में इस्तेमाल किया जाता है।
नाम अलग, काम भी अलग
अगर आसान शब्दों में समझें तो इन चारों गैसों का काम अलग-अलग है. LPG आमतौर पर सिलेंडर में घरों तक पहुंचती है. PNG पाइपलाइन के जरिए रसोई तक आती है. CNG गाड़ियों को चलाने में काम आती है, जबकि LNG गैस को लंबी दूरी तक पहुंचाने का एक तरीका होता है. यही वजह है कि सभी गैसें होने के बावजूद इनके नाम और यूज अलग-अलग होते हैं।